ग्राम पंचायत, ग्राम विकास अधिकारी गरज, जिला प्रशासन पर उत्पीड़न का लगाया आरोप
ग्राम पंचायत अधिकारी एवं ग्राम विकास अधिकारी समन्वय समिति ने तीन सूत्री मांगों को लेकर धरने पर बैठ गये। गांव गांव तक विकास की रूपरेखा खीचने वाले इन अधिकारियों ने जिला प्रशासन पर गम्भीर आरोप लगाये है। इन तीन सूत्री मांगों में जहां अपने साथ जिला प्रशासन द्वारा किये जा रहे मानवाधिकार हनन की बात उठायी है। वही अपने पदों पर होने वाली भर्तियों पर स्नातक डिग्री का मानक बनाने और समय समय पर प्रमोशन के साथ ही 7वें वेतन आयोग का पैमाना तय करने की मांग रखी है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन ऐसी मांगों को कितनी गम्भीरता से लेता है।
हालांकि समिति ने आरपार की लड़ाई का जज्बा पाल रखा है। ग्राम पंचायत अधिकारी एवं ग्राम विकास अधिकारी समन्वय समिति ने तीन सूत्री मांगों को लेकर कर्मचारियों के ऊपर हो रहे उत्पीड़न के विरूद्ध धरने की शुरूआत जिलाध्यक्ष आलोक कुमार ग्राम विकास अधिकारी संघ ने राष्ट्रगान से किया। अध्यक्षता विनोद कुमार जिलाध्यक्ष ग्राम पंचायत अधिकारी संघ ने किया। संचालन शेख कुतुब उद्दीन ने किया। इसके साथ ही जिला महामंत्री अखिलेश कुमार यादव, सुनील कुमार ने सम्बोधित किया। इस अवसर पर सतीश कुमार सिंह, हेमन्त कुमार सिंह, सहित समस्त विकास खड से आये पदाधिकारीगण उपस्थित रहे।
क्या है इनकी तीन सूत्री मांग......
1 - ग्राम पंचायत अधिकारी एवं ग्राम विकास अधिकारी की शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट के स्थान पर स्नातक किया जाये व अधिमानी शैक्षिक योग्यता सीसीसी प्रमाण पत्र कम्प्यूटर के स्थान पर ओ लेवल कम्प्यूटर किया जाये।
2- इन पदों पर वेतन 5200-202000 ग्रेड वेतन 2800 रुपये अर्थात 7वें वेतन आयोग की मैट्रिक के सापेक्ष लेवल 5 पर प्रारम्भिक मूल वेतन 29,200 रुपये प्रदान किया जाये।
3-सीधी भर्ती के सापेक्ष प्रोन्नति पद कम से कम 30 प्रतिशत सृजित कर समय से 10 वर्ष पर प्रथम प्रोन्नति, 16 वर्ष पर द्वितीय और 26 वर्ष पर तृतीय प्रोन्नति प्रदान किया जाय। इसे लागू न कर पाने की स्थिति में 10, 16, 26 वर्ष पर प्रान्नति पद का वेतन एसीपी की अनुमन्रूता प्रदान किया जाय,.
स्मिति का लिखित आरोप.......
ग्राम पंचायतों में रैली, खुली बैठक, प्रचार प्रसार, टिगरिंग कमेटी जैसी तमाम योजनाओं के सफल सम्पादन के प्रयास के बीच अधिकारियों द्धारा स्वच्छ शौचालय हेतु पंचायत सचिवों पर मौखिक सामाग्री आपूर्ति का अनावश्यक दबाव बनाया जाता है। इसके साथ ही लगातार असमय और 5 बजे के बाद व सार्वजनिक अवकाश के दिन मीटिंग बुलाने कि वजह से अपने परिवार के साथ समय न दें पाने के कारण मानसिक रूप से विक्षिप्त होते जा रहे है। कार्य क्षमता कम होती जा रही है। व्यक्तिगत लाभार्भी योजनाओं में प्रेरकीय समीक्षा न कर निर्माण कार्य की समीक्षा करने, ओडीएफ व आवास निर्माण में भिन्न स्तर के अधिकारियों द्वारा उत्पीड़नात्मक व दबाव पूर्ण व्यवहार करने के कारण पंचायत सचिवों में कुंठा, निराशा, अवसाद व भय व्याप्त है। जिससे सचिवों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा हैै कई साथी दुर्घटना के शिकार हो चुके है।
हालांकि समिति ने आरपार की लड़ाई का जज्बा पाल रखा है। ग्राम पंचायत अधिकारी एवं ग्राम विकास अधिकारी समन्वय समिति ने तीन सूत्री मांगों को लेकर कर्मचारियों के ऊपर हो रहे उत्पीड़न के विरूद्ध धरने की शुरूआत जिलाध्यक्ष आलोक कुमार ग्राम विकास अधिकारी संघ ने राष्ट्रगान से किया। अध्यक्षता विनोद कुमार जिलाध्यक्ष ग्राम पंचायत अधिकारी संघ ने किया। संचालन शेख कुतुब उद्दीन ने किया। इसके साथ ही जिला महामंत्री अखिलेश कुमार यादव, सुनील कुमार ने सम्बोधित किया। इस अवसर पर सतीश कुमार सिंह, हेमन्त कुमार सिंह, सहित समस्त विकास खड से आये पदाधिकारीगण उपस्थित रहे।
क्या है इनकी तीन सूत्री मांग......
1 - ग्राम पंचायत अधिकारी एवं ग्राम विकास अधिकारी की शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट के स्थान पर स्नातक किया जाये व अधिमानी शैक्षिक योग्यता सीसीसी प्रमाण पत्र कम्प्यूटर के स्थान पर ओ लेवल कम्प्यूटर किया जाये।
2- इन पदों पर वेतन 5200-202000 ग्रेड वेतन 2800 रुपये अर्थात 7वें वेतन आयोग की मैट्रिक के सापेक्ष लेवल 5 पर प्रारम्भिक मूल वेतन 29,200 रुपये प्रदान किया जाये।
3-सीधी भर्ती के सापेक्ष प्रोन्नति पद कम से कम 30 प्रतिशत सृजित कर समय से 10 वर्ष पर प्रथम प्रोन्नति, 16 वर्ष पर द्वितीय और 26 वर्ष पर तृतीय प्रोन्नति प्रदान किया जाय। इसे लागू न कर पाने की स्थिति में 10, 16, 26 वर्ष पर प्रान्नति पद का वेतन एसीपी की अनुमन्रूता प्रदान किया जाय,.
स्मिति का लिखित आरोप.......
ग्राम पंचायतों में रैली, खुली बैठक, प्रचार प्रसार, टिगरिंग कमेटी जैसी तमाम योजनाओं के सफल सम्पादन के प्रयास के बीच अधिकारियों द्धारा स्वच्छ शौचालय हेतु पंचायत सचिवों पर मौखिक सामाग्री आपूर्ति का अनावश्यक दबाव बनाया जाता है। इसके साथ ही लगातार असमय और 5 बजे के बाद व सार्वजनिक अवकाश के दिन मीटिंग बुलाने कि वजह से अपने परिवार के साथ समय न दें पाने के कारण मानसिक रूप से विक्षिप्त होते जा रहे है। कार्य क्षमता कम होती जा रही है। व्यक्तिगत लाभार्भी योजनाओं में प्रेरकीय समीक्षा न कर निर्माण कार्य की समीक्षा करने, ओडीएफ व आवास निर्माण में भिन्न स्तर के अधिकारियों द्वारा उत्पीड़नात्मक व दबाव पूर्ण व्यवहार करने के कारण पंचायत सचिवों में कुंठा, निराशा, अवसाद व भय व्याप्त है। जिससे सचिवों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा हैै कई साथी दुर्घटना के शिकार हो चुके है।



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