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कुम्भ कार्य : पीडव्ब्लूडी के ठेकेदार बाल श्रम की उडा रहे है धज्जियां, क्या है बालश्रम कानून

जिले में बाल मजदूरी धड़ल्ले से जारी है, कुम्भ मेला निधि से शहर की कई सड़को का चौड़ीकारण चल रहा है। जिसमे लोक निर्माण, इलाहाबाद विकास प्राधिकरण और नगर निगम कार्यदायी संस्था है। ठेकेदारो के कर की निगरानी के लिए हर निर्माणधीन सड़क पर सम्बन्धितविभाग के अधिशाषी अभियंता और जूनियर इंजीनियर लगे होते है। इसके बावजूद ठेकेदार बाल मजदूरी करा रहे है।
जी हाँ यह हाल आप खुद हिबट रोड वी0एम मार्ग पर देख सकते है। जहाँ रोड चौड़ीकरण कार्य को बाल मजदूरों से करवाया जा रहा है।इस तरह शहर के कई जगह देखा जा सकता है। हैरत की बात है की श्रम विभाग का इतना बड़ा स्टाफ अपना दायित्व भूल सो रहा है।
इलाहाबाद शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के दावे बड़े बड़े किये जा रहे है। दावो को पूरा करने के लिए मासूम नाबालिक बच्चों को ढाल बनाया जा रहा है। चिलचिल्लाती कड़ी धूप में मासूम नाबालिक बच्चों से ईट,पथ्थर उठवाए व् तुड़वाये जा रहे है। ऐसे में एक बड़ा सवाल उठता है। क्या पी0डब्लू0डी के ठेकेदारो के दिलो में  बिलकुल भी रहम नही  है ऐसे जाघन्य अपराध् करने वालो ठेकेदारो पर जिला प्रशासन भी मेहरबान है।
जबकि बाल मजदूरी पर रोक लगाने के लिए यहां एक तरफ भारत सरकार प्रयासरत है। जिले के विभिन्न व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के मालिकों द्वारा चौदह वर्ष तक के बच्चों से कड़ी मेहनत कराया जाना भी बदस्तूर जारी है। पढ़ने लिखने के उम्र में बच्चों से कड़ी मेहनत करवाया जा रहा है। बाल मजदूरी पर रोक न लग पाने का मुख्य कारण है संबंधित विभाग के अधिकारियों द्वारा अपने दायित्व का निर्वहन न करना। पाकुड़ के शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित होटल, ढाबा, चाय-नास्ता दुकान, मोटर गैरेज, ईंटा भट्टों सहित अन्य दुकानों में बाल मजदूर देखे जा सकते है। खुले आम बाल मजदूरी उन्मूलन अधिनियम की धज्जियां व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में उड़ाया जा रहा है। इन बाल मजदूरों का आर्थिक, शारीरिक, मानसिक तथा इनके संवैधानिक अधिकारों का शोषण किया जा रहा है।

भारत में बाल श्रम के खिलाफ राष्ट्रीय कानून और नीतियां

                भारत का संविधान (26 जनवरी 1950) मौलिक अधिकारों और राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांत की विभिन्न धाराओं के माध्यम से कहता है-

14 साल के कम उम्र का कोई भी बच्चा किसी फैक्टरी या खदान में काम करने के लिए नियुक्त नहीं किया जायेगा और न ही किसी अन्य खतरनाक नियोजन में नियुक्त किया जायेगा (धारा 24)।राज्य अपनी नीतियां इस तरह निर्धारित करेंगे कि श्रमिकों, पुरुषों और महिलाओं का स्वास्थ्य तथा उनकी क्षमता सुरक्षित रह सके और बच्चों की कम उम्र का शोषण न हो तथा वे अपनी उम्र व शक्ति के प्रतिकूल काम में आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रवेश करें (धारा 39-ई)।बच्चों को स्वस्थ तरीके से स्वतंत्र व सम्मानजनक स्थिति में विकास के अवसर तथा सुविधाएं दी जायेंगी और बचपन व जवानी को नैतिक व भौतिक दुरुपयोग से बचाया जायेगा (धारा 39-एफ)।संविधान लागू होने के 10 साल के भीतर राज्य 14 वर्ष तक की उम्र के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देने का प्रयास करेंगे (धारा 45)।

बाल श्रम एक ऐसा विषय है, जिस पर संघीय व राज्य सरकारें, दोनों कानून बना सकती हैं। दोनों स्तरों पर कई कानून बनाये भी गये हैं।

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