बिहार : भाजपा के साथ बनी नीतीश सरकार तो बढ़ी साम्प्रदायिक हिंसा, ये है पांच साल का रिकॉर्ड
बिहार पुलिस मुख्यालय के सूत्रों के मुताबिक रामनवमी जुलूस में परंपरागत हथियारों का प्रदर्शन होता रहा है। लेकिन इस साल रामनवमी के दौरान युवा बड़ी संख्या में नयी-नयी तलवारें चमकाते दिखे थे। अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या किसी विशेष समूह द्वारा इस तलवारों की सप्लाई की गई थी।
बिहार में बीजेपी और जेडीयू की नयी दोस्ती के बाद साम्प्रदायिक दंगे बढ़े हैं। बीजेपी के साथ नीतीश कुमार की नयी पारी के बाद राज्य में अबतक साम्प्रदायिक तानव की 200 घटनाएं हो चुकी हैं। साल 2018 के लगभग 90-91 दिन गुजर चुके हैं, इस साल इन तीन महीनों में ही साम्प्रदायिक तनाव की 64 घटनाएं हो चुकी है। ये खुलासा इंडियन एक्सप्रेस द्वारा सरकारी आंकड़ों के तुलनात्मक अध्ययन से हुआ है। बता दें कि पिछले साल जुलाई में नीतीश कुमार ने लालू यादव की आरजेडी से रिश्ता खत्म कर बीजेपी के रूप में अपना नया राजनीतिक साथी ढूंढ़ा था और NDA में पुनर्वापसी की थी। अगर हम पिछले पांच साल के आंकड़ों की बात करें तो 2012 में 50 ऐसी घटनाएं हुईं थी। 2013 में ये आंकड़ा 112 था। 2014 में यह 110 रहा, 2015 में ये डाटा बढ़कर 155 हो गया। 2016 में इसमें जबर्दस्त इजाफा देखने को मिला और बिहार में साम्प्रदायिक तनाव की घटनाएं बढ़कर 230 हो गईं। जबकि 2017 में धार्मिक टकराव की 270 घटनाएं हुई। ये आंकड़ा पांच साल में सबसे ज्यादा है। 2017 में नीतीश कुमार जुलाई तक आरजेडी के साथ थे, इसके बाद उन्होंने बीजेपी के साथ सत्ता संभाली।
इस साल अबतक धार्मिक टकराव के 64 मामले सामने आए हैं। अगर घटनाओं का मासिक विवरण निकालें तो जनवरी में 21, फरवरी में 13 और मार्च में 30 साम्प्रदायिक तनाव की घटनाएं पुलिस ने दर्ज की। मार्च में हुई कई घटनाएं मुस्लिम बहुत इलाकों से धार्मिक जुलूस निकालने से जुड़ी हुईं हैं। इस साल अररिया लोकसभा उपचुनाव में आरजेडी की जीत के बाद कथित रूप से मुस्लिम युवकों द्वारा देश विरोधी नारे लगाने की वजह से वहां माहौल तनाव पूर्ण हो गया था। इसके अलावा रामनवमी पूजा के दौरान भागलपुर, मुंगेर, औरंगाबाद, समस्तीपुर, शेखपुरा, नवादा और नालंदा में भी हिन्दू-मुस्लिम टकराव की घटनाएं सामने आईं थीं।
बिहार पुलिस मुख्यालय के सूत्रों के मुताबिक रामनवमी जुलूस में परंपरागत हथियारों का प्रदर्शन होता रहा है। लेकिन इस साल रामनवमी के दौरान युवा बड़ी संख्या में नयी-नयी तलवारें चमकाते दिखे थे। अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या किसी विशेष समूह द्वारा इस तलवारों की सप्लाई की गई थी। बिहार पुलिस का कहना है कि रामनवमी (मार्च) और दशहरा (सितंबर-अक्टूबर) के दौरान माहौल वैसे ही नाजुक रहता है। बिहार पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, “यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि इस साल साम्प्रदायिक घटनाओं में इजाफा हुआ है, लेकिन हां हम देखते हैं कि इस बार बड़े पैमाने पर भीड़ इकट्ठा हुई थी।” उन्होंने कहा कि अफवाहों से निपटने के लिए पुलिस को अलर्ट रहना होगा। बिहार के डीजीपी के एस द्विवेदी ने कहा, “हालांकि साम्प्रदायिक घटनाएं हुईं हैं लेकिन पुलिस ने इस पर तुरंत काबू पा लिया है, हम लोगों ने अबतक डाटा का विश्लेषण नहीं किया है, लेकिन हर केस को अलग अलग गंभीरता से देख रहे हैं, और सबूतों, गवाहों के आधार पर इस पर विचार कर रहे हैं। हो सकता है कि कुछ नेता और लोग दिक्कत पैदा करना चाहते हैं, लेकिन हम लोग हर केस को देख रहे हैं ताकि इस मॉस मोबलाइजेशन को समझ सकें।”
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| पटना में 25 मार्च 2018 को रामनवमी शोभा यात्रा के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केन्द्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद (फोटो-पीटीआई) |
बिहार में बीजेपी और जेडीयू की नयी दोस्ती के बाद साम्प्रदायिक दंगे बढ़े हैं। बीजेपी के साथ नीतीश कुमार की नयी पारी के बाद राज्य में अबतक साम्प्रदायिक तानव की 200 घटनाएं हो चुकी हैं। साल 2018 के लगभग 90-91 दिन गुजर चुके हैं, इस साल इन तीन महीनों में ही साम्प्रदायिक तनाव की 64 घटनाएं हो चुकी है। ये खुलासा इंडियन एक्सप्रेस द्वारा सरकारी आंकड़ों के तुलनात्मक अध्ययन से हुआ है। बता दें कि पिछले साल जुलाई में नीतीश कुमार ने लालू यादव की आरजेडी से रिश्ता खत्म कर बीजेपी के रूप में अपना नया राजनीतिक साथी ढूंढ़ा था और NDA में पुनर्वापसी की थी। अगर हम पिछले पांच साल के आंकड़ों की बात करें तो 2012 में 50 ऐसी घटनाएं हुईं थी। 2013 में ये आंकड़ा 112 था। 2014 में यह 110 रहा, 2015 में ये डाटा बढ़कर 155 हो गया। 2016 में इसमें जबर्दस्त इजाफा देखने को मिला और बिहार में साम्प्रदायिक तनाव की घटनाएं बढ़कर 230 हो गईं। जबकि 2017 में धार्मिक टकराव की 270 घटनाएं हुई। ये आंकड़ा पांच साल में सबसे ज्यादा है। 2017 में नीतीश कुमार जुलाई तक आरजेडी के साथ थे, इसके बाद उन्होंने बीजेपी के साथ सत्ता संभाली।
इस साल अबतक धार्मिक टकराव के 64 मामले सामने आए हैं। अगर घटनाओं का मासिक विवरण निकालें तो जनवरी में 21, फरवरी में 13 और मार्च में 30 साम्प्रदायिक तनाव की घटनाएं पुलिस ने दर्ज की। मार्च में हुई कई घटनाएं मुस्लिम बहुत इलाकों से धार्मिक जुलूस निकालने से जुड़ी हुईं हैं। इस साल अररिया लोकसभा उपचुनाव में आरजेडी की जीत के बाद कथित रूप से मुस्लिम युवकों द्वारा देश विरोधी नारे लगाने की वजह से वहां माहौल तनाव पूर्ण हो गया था। इसके अलावा रामनवमी पूजा के दौरान भागलपुर, मुंगेर, औरंगाबाद, समस्तीपुर, शेखपुरा, नवादा और नालंदा में भी हिन्दू-मुस्लिम टकराव की घटनाएं सामने आईं थीं।
बिहार पुलिस मुख्यालय के सूत्रों के मुताबिक रामनवमी जुलूस में परंपरागत हथियारों का प्रदर्शन होता रहा है। लेकिन इस साल रामनवमी के दौरान युवा बड़ी संख्या में नयी-नयी तलवारें चमकाते दिखे थे। अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या किसी विशेष समूह द्वारा इस तलवारों की सप्लाई की गई थी। बिहार पुलिस का कहना है कि रामनवमी (मार्च) और दशहरा (सितंबर-अक्टूबर) के दौरान माहौल वैसे ही नाजुक रहता है। बिहार पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, “यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि इस साल साम्प्रदायिक घटनाओं में इजाफा हुआ है, लेकिन हां हम देखते हैं कि इस बार बड़े पैमाने पर भीड़ इकट्ठा हुई थी।” उन्होंने कहा कि अफवाहों से निपटने के लिए पुलिस को अलर्ट रहना होगा। बिहार के डीजीपी के एस द्विवेदी ने कहा, “हालांकि साम्प्रदायिक घटनाएं हुईं हैं लेकिन पुलिस ने इस पर तुरंत काबू पा लिया है, हम लोगों ने अबतक डाटा का विश्लेषण नहीं किया है, लेकिन हर केस को अलग अलग गंभीरता से देख रहे हैं, और सबूतों, गवाहों के आधार पर इस पर विचार कर रहे हैं। हो सकता है कि कुछ नेता और लोग दिक्कत पैदा करना चाहते हैं, लेकिन हम लोग हर केस को देख रहे हैं ताकि इस मॉस मोबलाइजेशन को समझ सकें।”


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