आखिर कुसीनगर समेत कई जगहों पर हादसों के कारण नानिहलो के मौतों का जिम्मेदार कौन??*
प्रातःकाल एक्सप्रेस न्यूज़ राज्य ब्यूरो । कुसीनगर ही नही प्रदेश के कई क्षेत्रों में पिछले दिनों हुए स्कूल बस हादसों के पीछे नियमों की अनदेखी, लापरवाही और जिम्मेदारों की बे-परवाही सामने आई है,इसका खमियाजा स्कूल बच्चों को जख्मी होकर या अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है!!स्कूल बसों के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय गाइडलाइन और केन्द्रीय मोटर व्हीकल एक्ट को न तो स्कूल मान रहे हैं और न ही स्कूली बच्चों को घर से स्कूल, स्कूल से घर तक छोड़ने का ठेका लेने वाले बस संचालक,जिला परिवहन अधिकारी और ट्रैफिक पुलिस भी नियमों का पालन कराने सख्ती से कराने की बजाए स्कूल, बस संचालकों से दोस्ती निभा रहे हैं,नतीजतन मासूमों की जान के साथ हर रोज खिलवाड़ हो रहा है!!
*इन 5 कारणों से होते हैं हादसे*
गाड़ियो की फिटनेस को दरकिनार करते हुए,मनमाने तरीके से मिल जाती है फ़िटनेस)*
आरटीओ में स्कूल बसों की फिटनेस चेक करने के बाद ही फिटनेस सर्टिफिकेट दिया जाता है,नियम है कि बसों को फिटनेस तभी दिया जाए जब बसें सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन करती हों, लेकिन अधिकारी व कर्मचारी बसों या बिना स्कूल नाम के चलती हुई मारुति वैनों की ऊपरी जांच कर फिटनेस की रस्मदायगी कर सर्टिफिकेट जारी कर रहे हैं!!
*(उम्र सीमा के विपरीत चल रही गाड़िया)*
यात्री बसों को सड़क में चलने की उम्र सीमा 15 साल तक निर्धारित की गई है,वहीं स्कूल बसों को 20 साल तक की छूट दी गई है,जिन बसों की 15 साल की उम्र पूरी हो जाती है, ज्यादातर स्कूल संचालक या बस संचालक इन्हीं खटारा बसों में पीला पेंट पुतवा कर स्कूल में लगा देते हैं,इनके इंजन व पार्ट्स घिस चुके होते हैं,उन्नाव ही नहीं पूरे प्रदेश में चल रही अधिकतर बसें कई साल पुरानी हैं!!
*(स्वास्थ्य चेकअप को हवा में उड़ाते है कुछ स्कूल संचालक)*
हादसों की मुख्य वजह स्वास्थ्य चेकअप की अनदेखी भी है, नियम है कि ड्राइवर,कन्डक्टर के स्वास्थ्य का चेकअप, आंखों का चेकअप कर सर्टिफिकेट जारी किया जाए,लेकिन अधिकांश स्कूल व ठेकेदार ड्राइवरों के स्वास्थ्य चेकअप नहीं कराते,जो कि तमाम हादसों के कारण बनते हैं!!
*(सुप्रीम कोर्ट के स्पीड नियन्त्रण नियम को भी नही मानते अधिकांश स्कूल संचालक)*
सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार स्कूल बस में स्पीड गर्वनर लगाकर बसों की रफ्तार 40 किमी प्रतिघंटा तय कर दी गई थी,कुछ स्कूल संचालकों को छोड़ कर उन्नाव जिले के अधिकांश बड़े विद्यालयों में मानकों की धज्जिया उड़ाते हुए-बच्चो की जान झोकिंम में डाल कर मनमानी करते हुए वैन में खाचाखच भरी 18-20 बच्चों के साथ चलती है गाड़ियां!!
*(अनट्रेंड-और नाबालिकों द्वारा चलाई जा रही अधिकांश गाड़िया)*
नियम है कि बस ड्राइवर को कम से कम 5 साल तक भारी वाहन चलाने का अनुभव हो,जब कि स्कूल बस ड्राइवर या वैन ड्राइवर मनमानी करते हुए हाई स्पीड में गाड़िया चलाते नजर आते है, लेकिन स्कूल बस व ठेकेदार कम वेतन पर अनट्रेंड ड्राइवर रख लेते हैं, साहब कई बार ड्राइवर-कन्डक्टर को ही स्टेयरिंग थमा देते हैं,जो हादसों की वजह बनती है!!
---पूरे प्रदेश में लापरवाही के कारण पूर्व में भी कई हादसे आ चुके सामने---
1- *रिवर्स गियर के फेर में 39 बच्चे बाल-बाल बचे!!*
2- *14 बच्चों को ले जा रही बस पलटी, 4 जख्मी👍*
3- *32 छात्राओं को ले जा रही बस सीवर में धंसी👍*
*"अब एक नज़र उन्नाव की ओर"*✍🏻
पूर्व में हुए कई स्कूल बस हादसे के बावजूद स्कूल संचालक इससे कोई सबक नहीं ले रहे हैं, उन्नाव जिले के विभिन्न स्कूलों की बसें नियमों एवं कायदे कानून को ताक पर रखकर चल रही हैं,साहब नियमों को पूरा करना तो दूर-आलम तो यह है,कि कई बसों पर न तो स्कूल का नाम लिखा है,और न ही कोई जानकारी!भले ही स्कूल संचालकों ने सीसीटीवी कैमरों,ट्रेंड चालको की व्यवस्था करने का दावा कर रखा है, लेकिन यह कैमरे अधिकतर बसों के बंद ही पड़े हैं,वहीं बसों के अंदर फायर सेफ्टी के लिए लगे यंत्र भी डेड पड़े हैं,खास बात तो यह है कि चालक-परिचालक को उनके चलाने के बारे में ही कोई जानकारी नहीं है,अधिकांश बसों में चालक-परिचालक की कोई ड्रेस ही नहीं है,इतना ही नहीं स्कूल बस अथवा वैन पीले रंग की होनी चाहिए लेकिन इसकी परवाह किए बिना बच्चों को सफेद रंग की टाटा मैजिक गाड़ी,या खचाखच भरे ऑटो रिक्से में ही ले जाते हुए देखा जा सकता है, कुल मिलाकर सड़कों पर नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए स्कूल वाहन धड़ल्ले से चल रहे हैं,न तो वाहनों में सुरक्षा उपकरण हैं,और न ही वाहनों की फिटनेस!!शहर में भी कई बड़े विद्यालयो में तमाम ऐसी छोटी-बड़ी गाड़ियां स्कूल वैन के नाम पर बच्चों को ढो रही हैं, *(वह भी क्षमता से अधिक)* इन ओवरलोड स्कूल वाहनों के चलते नौनिहालों की जान हमेशा खतरे में बनी रहती है,जिसके जितने ज़िम्मेदार स्कूल संचालक है,उतने ही ज़िम्मेदार शाशन-प्रसाशन के अधिकारी,सहित अभिवावक भी!!
गाड़ियो की फिटनेस को दरकिनार करते हुए,मनमाने तरीके से मिल जाती है फ़िटनेस)*
आरटीओ में स्कूल बसों की फिटनेस चेक करने के बाद ही फिटनेस सर्टिफिकेट दिया जाता है,नियम है कि बसों को फिटनेस तभी दिया जाए जब बसें सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन करती हों, लेकिन अधिकारी व कर्मचारी बसों या बिना स्कूल नाम के चलती हुई मारुति वैनों की ऊपरी जांच कर फिटनेस की रस्मदायगी कर सर्टिफिकेट जारी कर रहे हैं!!
*(उम्र सीमा के विपरीत चल रही गाड़िया)*
यात्री बसों को सड़क में चलने की उम्र सीमा 15 साल तक निर्धारित की गई है,वहीं स्कूल बसों को 20 साल तक की छूट दी गई है,जिन बसों की 15 साल की उम्र पूरी हो जाती है, ज्यादातर स्कूल संचालक या बस संचालक इन्हीं खटारा बसों में पीला पेंट पुतवा कर स्कूल में लगा देते हैं,इनके इंजन व पार्ट्स घिस चुके होते हैं,उन्नाव ही नहीं पूरे प्रदेश में चल रही अधिकतर बसें कई साल पुरानी हैं!!
*(स्वास्थ्य चेकअप को हवा में उड़ाते है कुछ स्कूल संचालक)*
हादसों की मुख्य वजह स्वास्थ्य चेकअप की अनदेखी भी है, नियम है कि ड्राइवर,कन्डक्टर के स्वास्थ्य का चेकअप, आंखों का चेकअप कर सर्टिफिकेट जारी किया जाए,लेकिन अधिकांश स्कूल व ठेकेदार ड्राइवरों के स्वास्थ्य चेकअप नहीं कराते,जो कि तमाम हादसों के कारण बनते हैं!!
*(सुप्रीम कोर्ट के स्पीड नियन्त्रण नियम को भी नही मानते अधिकांश स्कूल संचालक)*
सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार स्कूल बस में स्पीड गर्वनर लगाकर बसों की रफ्तार 40 किमी प्रतिघंटा तय कर दी गई थी,कुछ स्कूल संचालकों को छोड़ कर उन्नाव जिले के अधिकांश बड़े विद्यालयों में मानकों की धज्जिया उड़ाते हुए-बच्चो की जान झोकिंम में डाल कर मनमानी करते हुए वैन में खाचाखच भरी 18-20 बच्चों के साथ चलती है गाड़ियां!!
*(अनट्रेंड-और नाबालिकों द्वारा चलाई जा रही अधिकांश गाड़िया)*
नियम है कि बस ड्राइवर को कम से कम 5 साल तक भारी वाहन चलाने का अनुभव हो,जब कि स्कूल बस ड्राइवर या वैन ड्राइवर मनमानी करते हुए हाई स्पीड में गाड़िया चलाते नजर आते है, लेकिन स्कूल बस व ठेकेदार कम वेतन पर अनट्रेंड ड्राइवर रख लेते हैं, साहब कई बार ड्राइवर-कन्डक्टर को ही स्टेयरिंग थमा देते हैं,जो हादसों की वजह बनती है!!
---पूरे प्रदेश में लापरवाही के कारण पूर्व में भी कई हादसे आ चुके सामने---
1- *रिवर्स गियर के फेर में 39 बच्चे बाल-बाल बचे!!*
2- *14 बच्चों को ले जा रही बस पलटी, 4 जख्मी👍*
3- *32 छात्राओं को ले जा रही बस सीवर में धंसी👍*
*"अब एक नज़र उन्नाव की ओर"*✍🏻
पूर्व में हुए कई स्कूल बस हादसे के बावजूद स्कूल संचालक इससे कोई सबक नहीं ले रहे हैं, उन्नाव जिले के विभिन्न स्कूलों की बसें नियमों एवं कायदे कानून को ताक पर रखकर चल रही हैं,साहब नियमों को पूरा करना तो दूर-आलम तो यह है,कि कई बसों पर न तो स्कूल का नाम लिखा है,और न ही कोई जानकारी!भले ही स्कूल संचालकों ने सीसीटीवी कैमरों,ट्रेंड चालको की व्यवस्था करने का दावा कर रखा है, लेकिन यह कैमरे अधिकतर बसों के बंद ही पड़े हैं,वहीं बसों के अंदर फायर सेफ्टी के लिए लगे यंत्र भी डेड पड़े हैं,खास बात तो यह है कि चालक-परिचालक को उनके चलाने के बारे में ही कोई जानकारी नहीं है,अधिकांश बसों में चालक-परिचालक की कोई ड्रेस ही नहीं है,इतना ही नहीं स्कूल बस अथवा वैन पीले रंग की होनी चाहिए लेकिन इसकी परवाह किए बिना बच्चों को सफेद रंग की टाटा मैजिक गाड़ी,या खचाखच भरे ऑटो रिक्से में ही ले जाते हुए देखा जा सकता है, कुल मिलाकर सड़कों पर नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए स्कूल वाहन धड़ल्ले से चल रहे हैं,न तो वाहनों में सुरक्षा उपकरण हैं,और न ही वाहनों की फिटनेस!!शहर में भी कई बड़े विद्यालयो में तमाम ऐसी छोटी-बड़ी गाड़ियां स्कूल वैन के नाम पर बच्चों को ढो रही हैं, *(वह भी क्षमता से अधिक)* इन ओवरलोड स्कूल वाहनों के चलते नौनिहालों की जान हमेशा खतरे में बनी रहती है,जिसके जितने ज़िम्मेदार स्कूल संचालक है,उतने ही ज़िम्मेदार शाशन-प्रसाशन के अधिकारी,सहित अभिवावक भी!!


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