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शब्द भी एक भोजन है, शब्द शब्द का भी एक स्वाद है, बोलने से पहले चख लीजिए...लारैब अहमद नियाज़ी

"शब्द भी एक भोजन है, शब्द शब्द का भी एक स्वाद है, बोलने से पहले चख लीजिए, स्वयं को अगर अच्छा ना लगे तो दूसरों को मत परोसिये"

पिछले कुछ दिनों से जब हमारी बहन के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल हो रहा था तभी उसके लिए बेहद खूबसूरत और सभ्य समाज के लोगों ने खूबसूरत शब्दों से अपना समर्थन दिया। *किसी ने माँ #देवकी कहा, तो किसी ने #माता_सीता कहा, तो किसी ने #रानी_लक्ष्मीबाई कहा, तो #सावित्री_बाई_फुले कहा।*

लेकिन मैं उन सभी लोगों को बोलना चाहता हूं तुम लोग जिसके बारे में भद्दी भाषा का प्रयोग कर रहे हो, उससे किसी भी विषय पर पांच मिनट तक तार्किक चर्चा नहीं कर सकते हो, इतना मैं दावे के साथ कह सकता हूं, वो इतनी पढ़ी लिखी है कि वहां तक पहुंचने के लिए तुम्हें दुबारा जन्म लेना होगा (जो कि एक महिला की मर्ज़ी के बिना संभव नहीं है) वो एक शानदार वक्ता है, सामाजिक अध्ययन की विद्वान है, और हर तरह के सामाजिक, राजनीतिक मुद्दों पर जोरदार पकड़ भी है।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया भारत में दस सबसे अच्छे विश्विद्यालयों में से एक है और वो वहां सामाजिक अध्ययन केंद्र में वो शोध की छात्रा है, तुम उसका मुक़ाबला नहीं कर सकते हो ये बात भी मैं दावे के साथ कह सकता हूं।

एक बात और कुछ लोग मेरी बहन के समर्थन में आए तो जरूर लेकिन जवाब में उनकी मां बहनों को गालियां देने लगे, मैं कहना चाहता हूं तुममें और उनमें कोई अंतर नहीं है तुम दोनों की मानसिकता एक ही है वो है, महिला विरोधी, समाज विरोधी। किसी महिला के समर्थन में खड़े हो ये बहुत अच्छी बात है लेकिन आप अगर किसी महिला का सम्मान नहीं कर पा रहे हैं तो आप में और उनमें कोई अंतर नहीं बचा। अगर आपके विचार किसी से नहीं मिलते है तो आप उनको जवाब दीजिए पर अंदाज़ एक जैसा नहीं होना चाहिए नहीं तो आप दोनों में कोई अंतर नहीं होगा।
महिलाओं का सम्मान अपने घरों में करना शुरू कीजिए।
धन्यवाद !!
✒️ *लारैब अहमद नियाज़ी* ✍️

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