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भारत के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय संगठन बनाने की जरूरत - आयुष मिश्रा


नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 4 मई सोमवार को
 120 देशों के गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलन को संबोधित किया  । द्वितीय विश्व युद्ध के खत्म होने के बाद दुनिया के अधिकांश देश दो गुटों में बट गए , उस समय के भारतीय प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू, गमल नसीर, के. नखरूमा आदि नेताओं ने ऐसे देशों का एक समूह बनाया जो इन दोनों गुटों में ना मिलकर अपनी स्वतंत्र पहचान विश्व पटल पर स्थापित करना चाहते थे।
अपने वक्तव्य में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा वैश्विक कोरोना महामारी ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय खामियों को उजागर किया है और ऐसे में नई और संतुलित व्यवस्था की जरूरत है और कोविड-19 संक्रमण की इस समस्या ने हमें वर्तमान के अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की परिधि को भी दिखा दिया है, आज जरूरत है विश्व के समस्त देश निष्पक्षता, समानता और मानवता के आधार पर वैश्वीकरण के नए ढांचे की जरूरत को समझें, प्रधानमंत्री मोदी ने ऐसी अंतरराष्ट्रीय संगठन बनाने पर जोर दिया जिसमें अधिक से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हो सके और कहा -केवल आर्थिक विकास पर ध्यान देने के बजाय हमे मानव कल्याण पर ध्यान देने की जरूरत है। 
विशेषज्ञों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र संघ के अलावा दूसरे अंतरराष्ट्रीय संगठन बनाने का विकल्प इसलिए देखना चाहिए क्योंकि संयुक्त राज्य संघ के 75 वर्ष होने के बावजूद आज भी वीटो आदि की शक्तियां उन्हीं देशों में निहित है जो द्वितीय विश्वयुद्ध के विजेता देश थे। भारत, जापान, जर्मनी, ब्राजील, साउथ अफ्रीका जैसे देशों के उभरने से दूसरे अंतरराष्ट्रीय संगठन के बनाए जाने की जरूरत और भी ज्यादा हो गई है जहां यह देश अपनी बातें कारगर तरीके से रख सके। आज मल्टीपोलर वर्ल्ड में सभी प्रभावी देशों की बात समझने और अनुसरण करने की आवश्यकता है ।गुटनिरपेक्ष संघ के प्रसंगिकता पर चली आ रही बहस पर भी नरेंद्र मोदी के इस नेतृत्व वक्तव्य ने विराम लगा दिया है।
आज भारत सहित विश्व के कई देशों के लिए मानव कल्याण सर्वोपरि है , सभी देशों के सुरक्षित रहते हुए आगे बढ़ने के लिए नए अंतरराष्ट्रीय संगठन को बनाने  के विकल्प को और जोर मिलता है जो विश्व के किसी भी बड़ी समस्या से निजात दिलवाने और भविष्य में इस समस्या से पड़ने वाले प्रभाव और उसके समाधान पर ध्यये पूर्वक कार्यरत हो । भारत इस कोरोना महामारी में दवाइयों के साथ दूसरी जरूरी मेडिकल मदद सप्लाई करके विश्व पटल पर जिम्मेदार देश होने के साथ नेतृत्व क्षमता का भी प्रदर्शन किया है, विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित अन्य महत्वपूर्ण संगठनों ने अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतया निर्वाहन ना करके थ्योरी डिबेट को प्रैक्टिस में ला दिया है , जिससे अंतरराष्ट्रीय संगठनों में बदलाव करने की जरूरत और भी प्रगाढ़ हो जाती है भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह पहल ग्लोबल कोऑर्डिनेशन और व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए बेहद उपयोगी है।।
लेखक और विचारक- आयुष मिश्रा

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