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कंपनियों को 1 दिन के भीतर देनी होगी लोन डिफॉल्ट की सूचना, SEBI ने सख्त किए नियम...

कंपनियों को 1 दिन के भीतर देनी होगी लोन डिफॉल्ट की सूचना, SEBI ने सख्त किए नियम
नई दिल्ली. मार्केट रेग्युलेटर सेबी ने लिस्टेड कंपनियों के लिए डिसक्लोजर नॉर्म्स और कड़े कर दिए हैं। सेबी ने एक सर्कुलर के जरिए कहा कि लोन डिफॉल्ट पर लिस्टेड कंपनियों को एक वर्किंग डे के अंदर इस बात की सूचना सार्वजनिक तौर पर देनी होगी। सेेेबी का यह नियम 1 अक्टूबर 2017 से प्रभावी हो जाएगा। बता दें कि इंडियन बैंकिंग सेक्टर के लिए एनपीए यानी बैड लोन बड़ी मुसीबत है, जिसे कम करने के लिए सरीकार कई तरह के कदम उठा रही है।
एनपीए बैंकों के लिए बड़ी मुसीबत
सेबी के सर्कुलर में कहा गया है कि बैंकों का भारी लोन कॉरपोरेट जगत पर है। कई ऐसे मामले हैं कि लोन का रीपेमेंट समय से नहीं हो पा रहा है, जिससे एनपीए बैंकों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुका है। कई कंपनियां इस मामले में डिफाल्टर घोषित की जा चुकी हैं। कुछ कंपनियों को लेकर बैंकरप्सी कोड के तहत कानूनी प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है।
निवेशकों को डिफाल्ट डेट की जानकारी देनी होगी
सेबी का कहना है कि अगर कंपनियां लोन का रीपेमेंट नहीं कर पा रही हैं तो उन्हें अपने निवेशकों को डिफाल्ट की डेट की जानकारी देनी होगी। वहीं, कंपनियों को स्टॉक एक्सचेंज को भी डिफाल्ट की डेट, कर्ज देने वाले बैंक या फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन, डिफाल्ट अमाउंट और ग्रॉस प्रिंसिपल अमाउंट के बारे में सूचना देनी होगी। सेबी का कहना है कि निवेशकों को इस बात की जानकारी होनी जरूरी है, जो अभी तक नहीं रहती है। 
कई बड़ेस्ट्रेस्ड अकाउंट्सकी पहचान की थी
बता दें कि हाल ही में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) को लेकर कुछ बड़े स्ट्रेस्ड अकाउंट्स की पहचान की थी। इनमें 12 अकाउंट तो ऐसे थे, जिनमें हर खाते में 5000 करोड़ रुपए से ज्यादा लोन है। इनमें से कुछ नाम बैंकरप्सी एंड इन्सॉल्वेंसी कोड के तहत आगे बढ़ाए गए हैं। बता दें कि बैंकों का एनपीए बढ़कर 8 लाख करोड़ हो गया है। 

बैंको परभी सख्‍त आरबीआई
आरबीआई बैड लोन की रिकवरी के लिए एक टाइमलाइन पहले ही तय कर चुकी है। आरबीआई का बैंकों को यह भी ऑर्डर है कि टाइमलाइन में एनपीए एक्शन प्लान पर काम नहीं किया गया तो उन पर मॉनेटरी पेनल्टी लगाई जाएगी। आरबीआई ने यह भी साफ किया है कि ज्वाइंट लेंडर फोरम के 50% मेंबर्स की मंजूरी से बैंक एक्शन ले सकते हैं। इसके लिए बोर्ड की मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। 

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