गठबंधन प्रत्याशी होने पर फूलपुर में वापसी मुश्किल, लोकसभा उपचुनाव नें बढ़ाई क्षेत्र में हलचल
मनोज तिवारी की रिपोर्ट
इलाहाबाद । उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद यह जरूरी हो गया था कि फूलपुर से सांसद केशव प्रसाद मौर्या विधानमंडल के किसी भी सदन का सदस्य बनें । विधानसभा या विधानपरिषद का सदस्य चुने जाने के बाद फूलपुर लोकसभा का उपचुनाव होना है जिसके तहत हर पार्टी के नेता प्रयास में लग गए हैं , जहां भाजपा से प्रत्याशियों में ज्यादा उत्सुकता देखी जा रही है वहीं सपा और बसपा से लोग उम्मीद कर रहे हैं कि एक ही प्रत्याशी आए । भाजपा से संभावित उम्मीदवारों में से डा. विक्रम सिंह पटेल नें पूरे लोकसभा में अपनी बड़ी बड़ी होर्डिंग लगवा कर दावेदारी जता दिया है ।
वीएमकेटी इंटरप्राइजेज नें फूलपुर लोकसभा के कोहना , कटका , झूंसी , हेतापट्टी, नारायनपुर , सोनौटी, सहसों में लोगों से बातचीत किया और उनकी राय जानने की कोशिश की कि उपचुनाव के लिए वो क्या सोचते हैं ।
लगभग तीन सौ लोगों से बातचीत में एक ही बात सामने आई कि वर्तमान सांसद की पिछले तीन साल की कोई उपलब्धि ना होने की वजह से नकारात्मक प्रभाव तो है लेकिन भाजपा के नाम पर भाजपा का प्रत्याशी मजबूत होगा बशर्ते सपा बसपा अलग अलग चुनाव लड़ें।
अगर सपा और बसपा मिल कर चुनाव लड़ते हैं तो उन्हें शहर पश्चिमी , फूलपुर , सोरांव और फाफामऊ में बढ़त मिल सकती है , शहर उत्तरी में गठबंधन प्रत्याशी पिछड़ जरूर सकता है लेकिन वह अंतर को कम नहीं कर पायेगा।
फूलपुर की जनता ने यह भी कहा कि अगर सपा या बसपा में से किसी नें भी अपने प्रत्याशी ना उतारे और गठबंधन की घोषणा भी ना हो तो भी भाजपा का प्रत्याशी मजबूत होगा , बाहरी और स्थानीय का मुद्दा भी हावी रहा , लोगों का कहना है कि लोकसभा में प्रत्याशी आने के बाद ज्यादा तस्वीर स्पष्ट होगी , स्थानीय प्रत्याशी किसी भी तरफ से आएगा वो मजबूत होगा।
विदित हो कि फूलपुर लोकसभा में कुल लगभग बीस लाख वोट है , जिसमें से भाजपा के माने जाने वाले आठ लाख और सपा बसपा के माने जाने वाले बारह लाख वोट हैं , लेकिन विधानसभा चुनावों में जिस तरह से भाजपा नें सपा और बसपा के गैर परंपरागत वोटों में सेंघ लगाया था उससे लगता है कि लोकसभा उपचुनाव में भाजपा अपनी पूरी ताकत झोंक देगी ताकि 2019 में होने वाले आम चुनाव में परेशानी ना हो , वहीं सपा बसपा को यह दिखाना होगा कि उनके गठबंधन करने से किसी का भी पत्ता साफ हो सकता है ।
अगर विपक्ष विखरा नजर आया तो फूलपुर उपचुनाव में भाजपा की वापसी तय है , और विपक्ष के एक होने पर भाजपा के लिए आम चुनाव के पहले अग्नि परीक्षा होगी , फिर भी शासन सत्ता को उपचुनाव का फायदा मिलता है बशर्ते विपक्ष कमजोर हो , विपक्ष के पास सबसे बड़ा नकारात्मक बात यही है कि फूलपुर लोकसभा के अंतर्गत आने वाले पांचो विधानसभा पर भाजपा के विधायक हैं ।
इलाहाबाद । उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद यह जरूरी हो गया था कि फूलपुर से सांसद केशव प्रसाद मौर्या विधानमंडल के किसी भी सदन का सदस्य बनें । विधानसभा या विधानपरिषद का सदस्य चुने जाने के बाद फूलपुर लोकसभा का उपचुनाव होना है जिसके तहत हर पार्टी के नेता प्रयास में लग गए हैं , जहां भाजपा से प्रत्याशियों में ज्यादा उत्सुकता देखी जा रही है वहीं सपा और बसपा से लोग उम्मीद कर रहे हैं कि एक ही प्रत्याशी आए । भाजपा से संभावित उम्मीदवारों में से डा. विक्रम सिंह पटेल नें पूरे लोकसभा में अपनी बड़ी बड़ी होर्डिंग लगवा कर दावेदारी जता दिया है ।

वीएमकेटी इंटरप्राइजेज नें फूलपुर लोकसभा के कोहना , कटका , झूंसी , हेतापट्टी, नारायनपुर , सोनौटी, सहसों में लोगों से बातचीत किया और उनकी राय जानने की कोशिश की कि उपचुनाव के लिए वो क्या सोचते हैं ।
लगभग तीन सौ लोगों से बातचीत में एक ही बात सामने आई कि वर्तमान सांसद की पिछले तीन साल की कोई उपलब्धि ना होने की वजह से नकारात्मक प्रभाव तो है लेकिन भाजपा के नाम पर भाजपा का प्रत्याशी मजबूत होगा बशर्ते सपा बसपा अलग अलग चुनाव लड़ें।
अगर सपा और बसपा मिल कर चुनाव लड़ते हैं तो उन्हें शहर पश्चिमी , फूलपुर , सोरांव और फाफामऊ में बढ़त मिल सकती है , शहर उत्तरी में गठबंधन प्रत्याशी पिछड़ जरूर सकता है लेकिन वह अंतर को कम नहीं कर पायेगा।
फूलपुर की जनता ने यह भी कहा कि अगर सपा या बसपा में से किसी नें भी अपने प्रत्याशी ना उतारे और गठबंधन की घोषणा भी ना हो तो भी भाजपा का प्रत्याशी मजबूत होगा , बाहरी और स्थानीय का मुद्दा भी हावी रहा , लोगों का कहना है कि लोकसभा में प्रत्याशी आने के बाद ज्यादा तस्वीर स्पष्ट होगी , स्थानीय प्रत्याशी किसी भी तरफ से आएगा वो मजबूत होगा।
विदित हो कि फूलपुर लोकसभा में कुल लगभग बीस लाख वोट है , जिसमें से भाजपा के माने जाने वाले आठ लाख और सपा बसपा के माने जाने वाले बारह लाख वोट हैं , लेकिन विधानसभा चुनावों में जिस तरह से भाजपा नें सपा और बसपा के गैर परंपरागत वोटों में सेंघ लगाया था उससे लगता है कि लोकसभा उपचुनाव में भाजपा अपनी पूरी ताकत झोंक देगी ताकि 2019 में होने वाले आम चुनाव में परेशानी ना हो , वहीं सपा बसपा को यह दिखाना होगा कि उनके गठबंधन करने से किसी का भी पत्ता साफ हो सकता है ।
अगर विपक्ष विखरा नजर आया तो फूलपुर उपचुनाव में भाजपा की वापसी तय है , और विपक्ष के एक होने पर भाजपा के लिए आम चुनाव के पहले अग्नि परीक्षा होगी , फिर भी शासन सत्ता को उपचुनाव का फायदा मिलता है बशर्ते विपक्ष कमजोर हो , विपक्ष के पास सबसे बड़ा नकारात्मक बात यही है कि फूलपुर लोकसभा के अंतर्गत आने वाले पांचो विधानसभा पर भाजपा के विधायक हैं ।

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