बेंगलुरु की सड़कों पर डूब जा रही कार, जानिए क्यों
राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा है कि झील से जहरीली झाग निकलने की समस्या को सही होने में एक-दो साल लग सकते हैं।


गुरुवार को बेलंदूर झील से निकली झाग सड़क पर। (PTI Photo by Shailendra Bhojak)
बेलंदूर झील से निकलने वाली जहरीली झाग में कई बार इतनी अधिक होती है कि बड़ी गाड़ियां भी उसमें छिप जाती हैं। (तस्वीर- एएनआई)
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु एक बार फिर जहरीली झाग के चपेट में है। पिछले एक हफ्ते से जारी बारिश के बाद गुरुवार (17 अगस्त) को बेंगलुरु की बेलंदूर झील से सफेद रंग की जहरीली झाग निकल रही है। स्थानीय निवासी दुर्गंध और प्रदूषण की शिकायत कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार इस जहरीली झाग से सांस लेने में तकलीफ, त्वचा में जलन और नाकाबिले बर्दाश्त करने लायक दुर्गंध की शिकायत हो सकती है।मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने इसका संज्ञान लिया है। राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा है कि झील से जहरीली झाग निकलने की समस्या को सही होने में एक-दो साल लग सकते हैं। बेंगलुरु में पिछले एक हफ्ते में पिछले एक दशक में अगस्त महीने की सबसे अधिक बारिश हुई है।
झाग इतनी ज्यादा है कि झील से बाहर सड़क पर फैल गयी है और आने-जाने वालों को इसकी वजह से यातायात में दिक्कत हो रही है। बेलंदूर झील बेंगलुरु की 262 झीलों में से सबसे बड़ी झील है। ये करीब एक हजार एकड़ में फैली हुई है। इस झील में पिछले कई सालों से जहरीली झाग निकलने की समस्या है। इस साल अप्रैल में एनजीटी ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए झील के आसपास के 76 औद्योगिक इकाइयों को प्रदूषण फैलाने की वजह से बंद करने का आदेश दे दिया था। 18 मई को एनजीटी ने कर्नाटक राज्य प्रदूषण बोर्ड को ये जांच करने का आदेश दिया था कि झील के आसपास की ऐसी औद्योगिक इकाइयां बंद हुई है या नहीं। एनजीटी ने राज्य की विभिन्न एजेंसियों द्वारा जहरीली झाग पर रोक लगाने के प्रयासों के प्रति भी नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार को फटकार लगायी थी। बेंगलुरु के निवासियों ने इस जहरीली झाग से खतरे के प्रति जागरूकता फैलाने और बेलंदूर झील को बचाने के लिए एक फेसबुक पेज भी बना रखा है।
क्यों निकल रही है जहरीली झाग?- बेलंदूर झील से जहरीली झाग निकलने की असल वजह प्रदूषण मानी जाती है। बेलंदूर झील के आसपास के आवासीय इलाकों और औद्योगिक इकाइयों से असंशोधित सीवेज और अन्य केमिकल अपशिष्ट सीधे झील में जाते हैं। लम्बे समय से झील में जमा हो रहे इन प्रदूषकों की वजह से झील की तली में इनकी मोटी परत बन गई है। झील में जाने वाले प्रदूषकों में अमोनिया, फॉस्फेट और कम घुलनशील ऑक्सीजन शामिल है। इन रसायनों के आपस में मिलने से ही जहरीला झाग तैयार होता है जो बुलबुले के रूप में सतह पर आता है। इन जहरीले रसयानों में डिटरजेंट, ग्रीस और तेल होने की वजह से कई बार ये झाग ज्वलनशील भी होती है। इस जहरीली झाग पर रोक का एक ही तरीका है कि इलाके के प्रदूषण को नियंत्रित किया जाए।

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