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अब असम नहीं मेघालय सीमा पर है गौ तस्करों की नजर: सीसुब महानिरीक्षक

अब असम नहीं मेघालय सीमा पर है गौ तस्करों की नजर: सीसुब महानिरीक्षक

विजय नगर।
भारत बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमा से जब जब मवेशी खासकर गायों की तस्करी का मुद्दा उठता है, तब असम का नाम ही सुर्खियों पर रहता है, लेकिन अब असम की बजाय पड़ोसी राज्य मेघालय गौ तस्करों का लक्ष्य स्थान बन गया है। बांग्लादेश से सटी मेघालय की कुल 444 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा के जरिए विगत समय की तलुना में इस साल मवेशी तस्करी के प्रयासों में पांच गुना तक इजाफा हुआ है जो कि आने वाले वक्त में और बढऩे की संभावना है। 
खुद सीमा सुरक्षा बल के शिलोंग स्थित फ्रंटियर मुख्यालय के आंकड़े कुछ इसी ओर इशारा कर रहे हैं। औपचारिक आंकड़े बताते हैं कि साल 2016 में सीसुब ने 1231 मवेशी जब्त किए थे, जिनकी अनुमानित कीमत डेढ़ करोड़ रुपए आंकी गई थी। जबकि इस साल सिर्फ जुलाई तक सीसुब के जवानों ने 7150 मवेशी जब्त किए जिनकी कीमत साढ़े आठ करोड़ रुपए आंकी गई है। यानी पिछले साल की तुलना में सिर्फ जुलाई तक करीब साढ़े पांच गुना मवेशी पकड़े गए हैं। इसी तरह साल 2016 में करीब ढाई करोड़ रुपए के प्रतिबंधित पदार्थ सीमा पर तस्करी के दौरान जब्त किए गए। जबकि इस साल जुलाई तक करीब सात करोड़ रुपए के प्रतिबंधित पदार्थ जब्त किए गए हैं। इसका मतलब है कि ढाई गुना अधिक समान सिर्फ जुलाई तक पकड़ा गया है। 


इस सबंध में सीसुब के महानिरीक्षक (आईजी) पीके दुबे ने कहा कि असम में सरकार बदलने के बाद मवेशी तस्करी के खिलाफ सीमा सुरक्षा बल के अलावा राज्य की पुलिस ने भी सख्ती दिखाई है। ऐसे में लगातार हो रही नुकसान और असम में बदली राजनैतिक परिस्थितियों के चलते अब तस्करों का गिरोह मेघालय की अंतरराष्ट्रीय सीमा के जरिए तस्करी के नए नए रास्ते ढूंढने में लगा है। मेघालय के सीमा पर बसे कुछ गांवों के स्थानीय लोग इस काम में तस्करों की मदद कर रहे हैं। 

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