Breaking News

लोकसभा उपचुनाव : महज उन्नीस साल की उम्र में संभाली चुनावी कमान

इलाहबाद। माफिया डॉन के तौर पर पहचाने जाने वाले बाहुबली नेता और पूर्व सांसद अतीक अहमद एक बार फिर चुनाव मैदान में हैं। वह यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफे से खाली हुई फूलपुर लोकसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में है। डॉन पिछले एक साल से जेल के सीखचों में कैद है, ऐसे में उसके प्रचार की कमान बड़े बेटे उमर ने संभाल ली है।
बाहुबली अतीक अहमद और उनके बेटे उमर अहमद।
बाहुबली अतीक अहमद और उनके बेटे उमर अहमद।

महलों का ऐशौ-आराम छोड़कर जनता के बीच पहली बार उतरा उमर बाहुबली पिता के नक्शे-कदम पर चलते हुए प्रचार कर रहा है। वह दर्जन भर से ज्यादा गाड़ियों के काफिले से चुनाव प्रचार निकलता है। आगे-पीछे नारेबाजी करते हुए तमाम युवाओं की फौज के साये में रहता है। पिता की तरह लंबी मूंछो पर बार-बार हाथ फिराता है और तो और बाहुबली कहे जाने पर शर्म और संकोच महसूस करने के बजाय गर्व से सीना चौड़ा करता दिखाई देता है। 

'साम्प्रदायिक और फासिस्टवादी बीजेपी'
बाहुबली का बेटा पिता के ही अंदाज़ में सामने वाले का इंतजार किए बिना खुद ही सलाम और नमस्कार करता है। उसके बाद खुद ही आगे बढ़कर लोगों से हाथ मिलाता और उन्हें गले लगाता है। अपनी मुस्कुराहट से उमर वोटरों का दिल जीतने की कोशिश करता है तो साथ ही बीजेपी को साम्प्रदायिक और फासिस्टवादी ताकत बताकर लोगों से उसे हराने और अपने पिता को वोट देने की अपील करता है। बाहुबली के बेटे के प्रचार का यह निराला अंदाज वोटरों को काफी प्रभावित कर रहा है। हालांकि किसी पार्टी का सिंबल नहीं होने की वजह से फूलपुर की जनता बाहुबली अतीक को दोबारा अपना सांसद चुनेगी, इसके लिए उमर को अपनी मेहनत के साथ ही किस्मत पर भी भरोसा करना होगा।


महज उन्नीस साल की उम्र में संभाली कमान

जेल में बंद अपने पिता अतीक अहमद का चुनाव प्रचार करने वाले उमर अहमद की उम्र महज उन्नीस साल है। बाहुबली छवि के पिता पिछले एक साल से जेल में बंद हैं, लिहाजा उमर को अब खुद मैदान में उतरकर चुनाव प्रचार की कमान संभालनी पड़ी है। उमर सुबह कार्यकर्ताओं व समर्थकों के साथ बैठक करता है और उसके बाद घंटों टेलीफोन पर दूर- दराज के कार्यकर्ताओं को जरूरी हिदायत देता है।

पिता की तरह काफिला पर असलहा धारी नहीं 
पिता की तरह उमर भी तकरीबन दर्जन भर लग्जरी गाड़ियों के काफिले के साथ निकलता है। एक फर्क जरूर है कि पिता अतीक अहमद अपनी बाहुबली छवि की तरह ही दर्जनों असलहा धारियों के साथ बाहर निकलते थे, लेकिन पिता से ज़्यादा भीड़ के साथ चलने के बावजूद उमर के काफिले में एक भी असलहा धारी नहीं नजर आता। उमर अपने वोटरों के बीच जाकर उनसे पिता के जेल में होने की दुहाई देकर उन्हें इमोशनल ब्लैकमेल करने की कोशिश करता है तो साथ पिता के पांच साल के कार्यकाल में हुए विकास की दुहाई देकर मौजूदा वक्त में खराब सड़कों व क्षेत्र के पिछड़ेपन से बीजेपी पर सियासी हमला बोलने में भी नहीं चूकता।

नुक्कड़ सभाओं के जरिए होगी जमीन तैयार
अतीक अहमद को अगर खुद को बाहुबली कहे जाने पर गर्व होता था तो बेटे उमर का सीना भी इस शब्द को सुनकर चौड़ा हो जाता है। हालांकि उमर बाहुबली शब्द को अपने हिसाब से परिभाषित करता है। बेबाक उमर का मानना है कि बाहुबली बताए जाने से उसे न तो गुस्सा आता है और न ही बुरा लगता है। अपनी दलीलों के साथ वह ये जरूर कहता है कि उसका परिवार जो करता है वह गलत नहीं होता। ऐसे में अगर लोग उन्हें बाहुबली करार दें तो उसकी परवाह नहीं। उमर फिलहाल जनसंपर्क के जरिये वोटरों से सीधे रूबरू होने पर ही ज़ोर दे रहा है, लेकिन हफ्ते भर बाद जगह-जगह नुक्कड़ सभाएं भी करने की तैयारी है।

सपा से बगावत कर लड़ा चुनाव

गौरतलब है कि, बाहुबली अतीक अहमद ने फूलपुर उपचुनाव में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी से बगावत करते हुए निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन किया है। अतीक की इंट्री से फूलपुर का चुनाव न सिर्फ दिलचस्प हो गया है बल्कि कई उम्मीदवारों का गणित भी बिगड़ गया है। विपक्षियों का कहना है कि बेटे के कमान संभालने के बावजूद अतीक को इस बार कामयाबी नहीं मिलेगी। विपक्षी पार्टियों का दावा है कि अतीक को इस बार न तो वोट मिलेगा और न ही हमदर्दी। बाहुबली अतीक इन दिनों देवरिया जेल में है, ऐसे में बेटे उमर ने उसके प्रचार की कमान संभाल ली है। हालांकि कोई सियासी अनुभव न होना उमर के लिए जहां मुश्किलें खड़ी कर सकता है, वहीं उसे लोगों से कुछ सहानुभूति जरूर हासिल होने की उम्मीद है। 

No comments