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आगाज फाउंडेशन : आखिर कैसे रुकेंगे महिलाओं के खिलाफ अपराध?..सुश्री अनुराधा

राज्य ब्यूरो । यत्र नार्युस्त पूज्ययंति तत्र रमति देवता'। एक वक्त था जब नारी को हम देवी के रूप में पूजते थे लेकिन आज आलम कुछ ऐसा है कि महिलाओं की इज्जत को सरे आम नीलाम किया जाता, उनकी आबरू तार-तार की जाती है। हाल के दिनों में पूरे देश में महिलाओं पर हिंसा सहित विभिन्न तरह के अत्याचार के मामले काफी हद तक बढ़ गए हैं। महिलाओं, नाबालिग लड़कियों तथा छोटी-छोटी बच्चियों के साथ हिंसक घटनाओं में तेजी से इजाफा हो रहा है। इस तरह की घटनाएं किसी एक राज्य या शहर की नहीं है बल्कि पूरे देश को निगल रही हैं। 



  इलाहाबाद सहित अन्य शहरों में बढ़ते हुए महिलाओं के प्रति लूट, राहजनी, छिनैती के मामलों में इन दिनों बढ़ोतरी के विरोध में आज आग़ाज़ फाउंडेशन के तत्वावधान में एक शांति मार्च का आयोजन किया गया। जो शहीद वाल से निकालकर सुभाष चौराहा सिविल लाइन पंहुचा। जिसका नेतृत्व पूर्व उपाध्यक्ष हाईकोर्ट बार एसोसिएशन  सुश्री अनुराधा सुंदरम ने किया ।   
                                                                 

शहीद वाल से शुरू हुए पदयात्रा, नेताजी सुभाष चैराहे में जाकर सभा में परिवर्तित हो गया तथा नेताजी की प्रतिमा का माल्यार्पण किया गया । सभा में शहर में बढ़ती लूट, राहजनी व छिनैती पर वक्ताओं ने रोष प्रकट 
किया । 

  सुश्री अनुराधा सुंदरम ने कहा कि अब महिलाएं जाग उठी हैं,उन्हें अपना हक चाहिए। उन्हें अपने पर हो रहे इन अत्याचारों से निजात चाहिए। इसके लिए सिर्फ सरकार को ही नहीं बल्कि बुद्धिजीवियों के साथ-साथ समाज के वरिष्ठ नागरिकों को भी आगे आना होगा। सबसे पहले उन्हें अपनी सुरक्षा खुद करनी होगी। सिर्फ कानूनों से महिलाओं पर बढ़ रहे अपराधों पर लगाम नहीं लगाया जा सकता है बल्कि लोगों की सोच और मानसिक चिंता धारा में बदलाव अति आवश्यक है। लोगों के नजरिए में बदलाव जरूरी हैमहिलाओं को पर्याप्त शिक्षा देना और उनके स्वास्थ्य का विकास करना होगा।

सचिव सुदीपा मित्रा ने कहा कि आज के दौर में नव उदारवादी बाजारवादी संस्कृति के हमले से रिश्तों के लिहाज के सामाजिक मूल्य छिन्न भिन्न हो गए हैं। प्रशासन,समाज सभी इन पर हो रहे अपराधों को अनदेखी करती है। जब कोई गुनाह होता है सियासी खेल शुरू हो जाता है। 



हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अफजल दुर्रानी, ने कहा कि सिर्फ कानूनों से महिलाओं पर बढ़ रहे अपराधों पर लगाम नहीं लगाया जा सकता है बल्कि लोगों की सोच और मानसिक चिंता धारा में बदलाव अति आवश्यक है। लोगों के नजरिए में बदलाव जरूरी है। 


शांति मार्च में शाहगंज बारवारी दुर्गा पूजा कमिटी से भास्कर मुखर्जी, सरदार गुरप्रीत सिंह, सोहबतिया बाग बारवारी से तमाल घोष, प्रीतम नगर बरवारी से अमित बनर्जी, गवर्निंग कौंसिल बलवंत सिंह, रवि ओम आनंद, हरीश सिंह सोनू, जिला अधिवक्ता संघ के पूर्व कार्यकारिणी सदस्य पवन शंकर श्रीवास्तव व अन्य के अलावा अधिवक्ता आशुतोष त्रिपाठी, स्वतंत्रता सेनानी मोहित बनर्जी स्मृति समिति  के सचिव गौतम कुमार बनर्जी अधिवक्ता, रवि श्रीवास्तव, क्षितिज चैहान अथर्व से पंकज गौड़, रिवोह से हरदीप कौर, आरम्भ संस्था से रितिका अवस्थी, किंशुक चक्रवर्ती ,बंगाली सोशल एंड कल्चरल असोसिएशन से देवराज चटर्जी आदि उपस्थित रहे मार्च का संचालन संस्था की सचिव सुदीपा मित्रा ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन उत्तम कुमार बनर्जी अधिवक्ता ने किया.

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