नरेंद्र मोदी सरकार की बनाई समिति फिर से लिखेगी भारत का इतिहास
रिपोर्ट: नरेंद्र मोदी सरकार की बनाई समिति फिर से लिखेगी भारत का इतिहास
कमेटी के चेयरमैन केएन दीक्षित ने बताया कि 'उनकी समीति को एक रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है, जो कि प्राचीन भारतीय इतिहास के कुछ पहलुओं को दोबारा से लिखने में सरकार की मदद करेगी।'
एक रिपोर्ट के अनुसार, मोदी सरकार ने एक समीति का गठन किया है। एनडीटीवी की एक खबर के अनुसार, मोदी सरकार भारतीय इतिहास को दोबारा से लिखने का प्रयास कर रही है। रायटर्स से बातचीत के दौरान इस कमेटी के चेयरमैन केएन दीक्षित ने बताया कि ‘उनकी समीति को एक रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है, जो कि प्राचीन भारतीय इतिहास के कुछ पहलुओं को दोबारा से लिखने में सरकार की मदद करेगी।’ एनडीटीवी ने दावा किया कि कल्चर मिनिस्टर महेश शर्मा ने भी एक इंटरव्यू के दौरान स्वीकार किया है कि ‘इस समीति का काम भारतीय इतिहास को संशोधित करने की बड़ी योजना का हिस्सा है।’
खबर के अनुसार, समीति का उद्देश्य ऐसे पुरातत्विक साक्ष्यों का इस्तेमाल करना है, जो यह साबित कर सके कि हिंदू ही हजारों साल पहले धरती पर रहने वाले इंसानों के उत्तराधिकारी हैं और प्राचीन हिंदू शास्त्र कोई मनगढंत कथाएं नहीं बल्कि तथ्य हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारक मनमोहन वैद्य ने भी रायटर्स से बातचीत के दौरान कहा है कि ‘भारतीय इतिहास का असली रंग भगवा है और सांस्कृतिक परिवर्तन लाने के लिए हमें इतिहास को दोबारा लिखना होगा।’ आरएसएस की इतिहास विंग के हेड बालमुकुंद पांडे का भी कहना है कि ‘भारत के गौरवशाली इतिहास को सहेजने का ये ही सही वक्त है।’ वहीं संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने रायटर्स से बातचीत के दौरान बताया कि ‘वह उम्मीद कर रहे हैं कि समीति द्वारा पेश किए जाने वाले निष्कर्ष को स्कूली किताबों और एकेडमिक रिसर्च में शामिल किया जाएगा।’
वहीं दूसरी तरफ सरकार ने इतिहास दोबारा लिखे जाने की बात से इंकार किया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने अलग-अलग क्षेत्र के 17 लोगों को लेकर एक कमेटी बनायी है। जो कि 12000 साल से लेकर अब तक भारतीय संस्कृति की शुरुआत और उसमें अन्य संस्कृतियों के मिलने के बाद हुए बदलावों का अध्धयन करेगी। इस समीति का कार्यकाल 1 साल का होगा। मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ऐसी किसी समीति को लेकर जानकारी होने से इंकार किया है। समीति के एक सदस्य का कहना है कि फिलहाल रिपोर्ट अपने शुरुआती चरण में है और इसमें अभी वक्त लगेगा। जैसे ही यह तैयार हो जाएगी, वैसे ही इसे सरकार को सौंप दिया जाएगा।
कमेटी के चेयरमैन केएन दीक्षित ने बताया कि 'उनकी समीति को एक रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है, जो कि प्राचीन भारतीय इतिहास के कुछ पहलुओं को दोबारा से लिखने में सरकार की मदद करेगी।'
एक रिपोर्ट के अनुसार, मोदी सरकार ने एक समीति का गठन किया है। एनडीटीवी की एक खबर के अनुसार, मोदी सरकार भारतीय इतिहास को दोबारा से लिखने का प्रयास कर रही है। रायटर्स से बातचीत के दौरान इस कमेटी के चेयरमैन केएन दीक्षित ने बताया कि ‘उनकी समीति को एक रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है, जो कि प्राचीन भारतीय इतिहास के कुछ पहलुओं को दोबारा से लिखने में सरकार की मदद करेगी।’ एनडीटीवी ने दावा किया कि कल्चर मिनिस्टर महेश शर्मा ने भी एक इंटरव्यू के दौरान स्वीकार किया है कि ‘इस समीति का काम भारतीय इतिहास को संशोधित करने की बड़ी योजना का हिस्सा है।’
खबर के अनुसार, समीति का उद्देश्य ऐसे पुरातत्विक साक्ष्यों का इस्तेमाल करना है, जो यह साबित कर सके कि हिंदू ही हजारों साल पहले धरती पर रहने वाले इंसानों के उत्तराधिकारी हैं और प्राचीन हिंदू शास्त्र कोई मनगढंत कथाएं नहीं बल्कि तथ्य हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारक मनमोहन वैद्य ने भी रायटर्स से बातचीत के दौरान कहा है कि ‘भारतीय इतिहास का असली रंग भगवा है और सांस्कृतिक परिवर्तन लाने के लिए हमें इतिहास को दोबारा लिखना होगा।’ आरएसएस की इतिहास विंग के हेड बालमुकुंद पांडे का भी कहना है कि ‘भारत के गौरवशाली इतिहास को सहेजने का ये ही सही वक्त है।’ वहीं संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने रायटर्स से बातचीत के दौरान बताया कि ‘वह उम्मीद कर रहे हैं कि समीति द्वारा पेश किए जाने वाले निष्कर्ष को स्कूली किताबों और एकेडमिक रिसर्च में शामिल किया जाएगा।’
वहीं दूसरी तरफ सरकार ने इतिहास दोबारा लिखे जाने की बात से इंकार किया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने अलग-अलग क्षेत्र के 17 लोगों को लेकर एक कमेटी बनायी है। जो कि 12000 साल से लेकर अब तक भारतीय संस्कृति की शुरुआत और उसमें अन्य संस्कृतियों के मिलने के बाद हुए बदलावों का अध्धयन करेगी। इस समीति का कार्यकाल 1 साल का होगा। मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ऐसी किसी समीति को लेकर जानकारी होने से इंकार किया है। समीति के एक सदस्य का कहना है कि फिलहाल रिपोर्ट अपने शुरुआती चरण में है और इसमें अभी वक्त लगेगा। जैसे ही यह तैयार हो जाएगी, वैसे ही इसे सरकार को सौंप दिया जाएगा।


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