एकता की मिसाल: हिंदू - मुस्लिम साथ मिलकर बचा रहे हैं ये नदी
सीतापुर के महोली में गोमती नदी की सहायक नदी को साफ रखने के लिए उठाए गए हैं बेमिसाल कदम, पानी की आवश्यकता सभी को होती है, हिन्दू हो या मुस्लिम या फिर अन्य कोई धर्म। पानी को बचाने के लिए उसके स्त्रोत्रों को बचाना जरूरी है, शायद यही सोच लेकर उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद में हिन्दू और मुस्लिम साथ-साथ मिलकर नदी को सहजने का काम कर रहे हैं।
यहां पर महोली कस्बे से कठिना नदी बहती है जो कि गोमती नदी की सहायक नदी है। कठिना नदी को साफ रखने के लिए जो भी कदम उठाए गए है वे अपने आप में बेमिसाल है। नदी किनारे खुले में शौच जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लग चुका है। नगर पंचायत प्रशासन ने इसे निषिद्ध क्षेत्र घोषित कर दिया है, जहां नदी के किनारे खुले में शौच जाना मना है। अगर कोई ऐसा करता मिला तो उस पर दंडात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान है। इसके अलावा समय-समय पर नदी को साफ करने का भी अभियान चलाया जाता है। अभी हाल में 17 मार्च को कठिना नदी की सफाई की गई थी जिसे दोनो ही समुदायों के लोगों ने बड़ी संख्या में मिलकर साफ किया।
सभी धर्मों के लोगो ने उठाया है ये बीड़ा
इस संबंध में नगर पंचायत की अध्यक्ष सरिता कुमारी कहती है कि जैसे हम लोग जैसे अपने घर को साफ रखते हैं वैसे ही हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम लोग अपने कस्बे को भी साफ रखे। नगर के लोगों ने नदी को साफ करने का बीड़ा उठाया है, उसमें हम पूरा सहयोग कर रहे हैं। कठिना तट पर खुले में शौच जाने वाले लोग गंदगी फैला रहे थे। सब लोगों के सहयोग से इसे रोका गया है। अब खुले में शौच प्रतिबंधित है। इस पहल को साकार करने में आगे आने वाले मंहत स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती कहते हैं कि नदी के पानी का प्रयोग कोई धर्म विशेष के व्यक्ति नहीं करते हैं और इसलिए हम लोग कठिना नदी को साफ करने का जिम्मा उठाए है। इस पहल में हिंदू- मुस्लिम साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
बता दें कि अभी हाल में आयोजित हुए सत्संग के बाद सफाई का आयोजन किया गया था। यहां पर उन्होंने न सिर्फ चार दिवसीय सत्संग के माध्यम से लोगों को प्रकृति के संरक्षण के प्रति सजग किया था, बल्कि पांचवें दिन से कठिना नदी की सफाई भी कराई थी। वही मुस्लिम धर्म की तरफ पहल करने वाले मस्जिद की समिति के प्रबंधक मुहम्मद हनीफ व पूर्व सभासद अब्दुल रऊफ कहते हैं कि खुले में शौच से होने वाले नुकसान से हम सभी लोग वाकिफ है ऐसे में हम लोगों ने ये मुहिम चलाई है। नदियों की सफाई भी हम सबकी जिम्मेदारी है। लोग खुले में शौच न करके इसके लिए यहां पर एक टीम का भी गठन किया गया है जो कि सुबह-शाम को सक्रिय रहती है। लोग अगर नदी के किनारे शौच करने के लिए जाते हैं तो उन्हें रोका जाता है। टीम में हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही धर्म के लोग शामिल है।
मंदिर और मस्जिद में भी दिखती है एकता
ऐसा नहीं है कि यहां पर सिर्फ नदी को साफ रखने में ही एकता दिखती है बल्कि यहां पर और भी कामों में एकता दिखती है। महोली कस्बे में कोतवाली के पास प्रज्ञानं सत्संग आश्रम है। इस आश्रम के बिल्कुल पास ही मस्जिद भी है। यहां पर हमेशा ही अमन चैन बना रहे इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मस्जिद में अजान हो रही होती है तो आश्रम के राधाकृष्ण मंदिर का लाउडस्पीकर बंद कर दिया जाता है। इसी तरह मस्जिद के भी अगुवा मंदिर के आयोजनों में पूरा सहयोग करते हैं। यहां पर त्योहारों में भी लोगों के बीच में आपसी प्रेम दिखाई देता है। इसी प्रेम की बदौलत इन दोनों समुदायों की पहल पर कठिना नदी के संरक्षण और स्वच्छता की मुहिम शुरू हुई है।
गोमती नदी की सहायक नदियों में से एक कठिना
सीतापुर का महोली कस्बा कठिना नदी के किनारे बसा हुआ है। जानकार बताते हैं कि साखू के जंगलों से तीव्र वेग में बहने वाली जलधारा कठिना नदी गोमती की सहायक नदी थी। शाहजहांपुर जनपद के खुटार के नजदीक स्थित मोतीझील से जन्म लेकर लखीमपुर में जवान होने वाली 145 किलोमीटर लम्बी कठिना नदी का सीतापुर जनपद के मिश्रिख ब्लॉक के बख्तौली गांव में गोमती नदी में विलय हो जाता है। क्षेत्र में जब नदियों का जिक्र होता है, तो गोमती के साथ कठिना नदी की भी बात जरूर होती है।




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