जिलाधिकारी को नहीं मानते प्रतापगढ़ के अधिशाषी अभियंता व ठेकेदार
प्रतापगढ़। योगी राज में लोक निर्माण विभाग प्रतापगढ़ के अधिशाषी अभियंता तथा ठेकेदार जिलाधिकारी को नहीं मानते। शायद यही वजह है की सरकार और पार्टी की छवि धूमिल हो रही है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त तेवर के बाद भी अधिकारी सुधरने का नाम नहीं ले रहे है।प्रतापगढ़ के ठेकेदारो की हिम्मत तो देखिये । की ठेकेदारी करने के लिए हैसियत प्रमाणपत्र जिलाधिकारी से लेते है और यह जिला अधिकारी को नहीं बल्कि अधिशाषी अभियंता को अपना अधिकारी मानते है और डी एम् के आदेश की अवहेलना कर रहे है। आप ठेकेदार प्रमोद कुमार की आवाज़ सुनिए......
भूस्वामी को पी ब्ल्यूडी ऑफिस बुलाकर धमकाया जाता है। जिसकी शिकायत आलाधिकारियों को भी किया गया है। जब की भुक्तभोगी , लो0नि0वि0 के इंजीनियर और ठेकेदार को जिलाधिकारी के आदेश की प्रतिलिपि दिखाता है तो देखने और बात सुनने को तैयार नहीं है। ठेकेदार को शायद यह नहीं पता की लोक निर्माण विभाग भी जिलाधिकारी के आदेश को मानने के लिए बाध्य होता है।
कहाँ का है मामला
बता दे कि जिला प्रतापगढ़ तहसील रानीगंज के ग्राम शाहपुर रानीगंज मार्ग पर लोक निर्माण विभाग द्वारा नईम उद्दीन आदि की नंबरी बाग में जबरन सड़क बना रहा है। उक्त मामले को जिलाधिकारी प्रतापगढ़ ने नंबरी बाग भूमि गाटा संख्या 428 का वाद न्यायालय सिविल जज जू0डि0 सदर को संज्ञान में लेते हुए दिनांक 12 / 12 / 2013 को तथा 27 / 02 / 2018 को अधिशाषी अभियंता को आदेश दे चुके है की भूमिधर में अतिक्रमण ना करे। या फिर सहमती के बाद निर्माण कार्य करे और 5 /4/2018 को एडीएम को जाँच कर भूमिधर पर् अतिक्रमण रोकने को कहा है। लेकिन ठेकेदार जबरजस्ती पर आमादा है। जब की भूमिधर जमीन पर बिना सहमती के कोई भी निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता।
शिकायती पत्र में साफ लिखा है कि राजस्व विभाग के भूमि गाटा संख्या 428 बाग के उत्तर में खेल मैदान और दच्छिन में गाटा संख्या 427 तालाब दर्ज है। जिस पर सड़क निर्माण कराया जा रहा है।
हैरत की बात यह है की बाग, खेल मैदान और तालाब के ठीक पश्चिम में एक बड़ा भूभाग GS जमीन का है जिस पर भूमाफियाओं का कब्ज़ा है। इस पर सड़क निर्माण कराया जा सकता था। लेकिन भूमाफियाओं से जमीन ख़ाली न कराकर हरीभरी बाग़ को तबाह करने पर लोक निर्माण विभाग आमादा है।
आर टी आई और न्यायालय और तालाब खेल मैदान, भूमिधर
गौरतलब हो कि सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई सूचना में राजस्व विभाग कहता है कि बाग़ , तालाब और खेल मैदान पर अतिक्रमण नहीं किया जा सकता। तारीख 10 / 05 / 2016 को राजस्व विभाग जानकारी दिया है की तालाब, बाग और खेल मैदान पर अतिक्रमण नहीं किया जा सकता। लेकिन जब की उच्च न्यायालय लगातार खेल मैदान और तालाब ख़ाली कराने का आदेश देती आई है। हैरत की बात यह है की उक्त भूमि गाटा संख्या 428 का वाद न्यायालय सिविल जज जू0डि0 सदर न्यायालय में लंबित है। बावजूद इसके अधिशाषी अभियंता लोक निर्माण विभाग 2 और ठेकेदार भूस्वामी को धमका रहे है। ठेकेदार कहता है कि जिलाधिकारी के आदेश और न्यायालय को मै नहीं मानता।
अब सवाल उठता है की जिलाधिकारी का कद बड़ा है या अधिशाषी अभियंता , ठेकेदार का। अब देख यह की जिलाधिकारी अपने आप को मुखिया साबित करते है या दबंग ठेकेदार को देंगे मौन समर्थन ।





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