जल उठा पश्चिम बंगाल, बम बमका
बीरभूम जिले के मोहम्मद बाजार इलाके में पंचायत चुनाव के लिए नामांकन के मुद्दे पर भाजपा और तृणमूल कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गए थे जिसमें बमों का प्रयोग किया गया था। बड़ी संख्या में वहां पुलिसकर्मियों को भेजा गया है
पश्चिम बंगाल में मई में होने वाले पंचायत चुनाव के लिए नामांकन के दौरान जारी राजनीतिक हिंसा के बीच कई जिलों में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और वामपंथी पार्टियां, भाजपा और कांग्रेस सहित विपक्षी पार्टियों के बीच झड़प के खबरें हैं। इस दौरान दिग्गज माकपा नेता बासुदेब आचार्य के साथ मेहनत की मांग के मामले सामने आए हैं। उधर, मुर्शिदाबाद जिले के कांदी इलाके में भी तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं बीच और कूचबिहार और बीरभूम जिलों में भाजपा और तृणमूल के सदस्यों के बीच झड़पों में कई लोग घायल हो गए।
बीरभूम जिले के मोहम्मद बाजार इलाके में पंचायत चुनाव के लिए नामांकन के मुद्दे पर भाजपा और तृणमूल कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गए थे जिसमें बमों का प्रयोग किया गया था। बड़ी संख्या में वहां पुलिसकर्मियों को भेजा गया है एक पुलिस अधिकारी ने बताया, '' हालात अब काबू में हैं। '' पुरूलिया के काशीपुर खंडवाड़ विकास कार्यालय के पास नौ बार सांसद रहे 75 वर्षीय माकपा नेता बासूदेब आचार्य के साथ कल तृणमूल के कथित समर्थकों ने हाथापाई की।
पार्टी सूत्रों ने बताया कि माकपा के उम्मीदवार पंचायत चुनावों के लिए बीडीओ ऑफिस जा रहा है आचार्य उनके साथ थे हमले में घायल हुए आचार्य को पुरुलिया सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्हें पेट में अंदरूनी चोट आई है तृणमूल ने इस घटना में अपनी भूमिका से इनकार किया है
हिंसक घटनाओं के साथ ही पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव का मुद्दा अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचे बीजेपी ने आरोप लगाया है कि राज्य के कई हिस्सों में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता को नामांकन करने के लिए नहीं दे रहे हैं। इस कारण से बीजेपी ने सर्वोच्च न्यायालय से नामांकन की आखिरी तारीख (9 अप्रैल) को बढ़ाने और ऑनलाइन नामांकन की सुविधा के लिए मांग की है। चार अप्रैल को भाजपा के प्रदेश इकाई ने सर्वोच्च न्यायालय में इस बावड़ को एक याचिका दायर की थी। बताओ कि साल 2013 के पंचायत चुनाव में भी 14 प्रतिशत सीटों पर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के अलावा कोई अन्य पार्टी के उम्मीदवार पर्चा नहीं भर पाए गए थे। इससे पहले वाम सरकार के दौरान वर्ष 2003 में भी कुछ ऐसा ही हुआ था। तब करीब 7,000 सीटों पर एक से अधिक उम्मीदवारों के न होने के चलते जनप्रतिनिधि निर्विरोध चुनाव चुने गए थे।
पश्चिम बंगाल में मई में होने वाले पंचायत चुनाव के लिए नामांकन के दौरान जारी राजनीतिक हिंसा के बीच कई जिलों में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और वामपंथी पार्टियां, भाजपा और कांग्रेस सहित विपक्षी पार्टियों के बीच झड़प के खबरें हैं। इस दौरान दिग्गज माकपा नेता बासुदेब आचार्य के साथ मेहनत की मांग के मामले सामने आए हैं। उधर, मुर्शिदाबाद जिले के कांदी इलाके में भी तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं बीच और कूचबिहार और बीरभूम जिलों में भाजपा और तृणमूल के सदस्यों के बीच झड़पों में कई लोग घायल हो गए।
बीरभूम जिले के मोहम्मद बाजार इलाके में पंचायत चुनाव के लिए नामांकन के मुद्दे पर भाजपा और तृणमूल कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गए थे जिसमें बमों का प्रयोग किया गया था। बड़ी संख्या में वहां पुलिसकर्मियों को भेजा गया है एक पुलिस अधिकारी ने बताया, '' हालात अब काबू में हैं। '' पुरूलिया के काशीपुर खंडवाड़ विकास कार्यालय के पास नौ बार सांसद रहे 75 वर्षीय माकपा नेता बासूदेब आचार्य के साथ कल तृणमूल के कथित समर्थकों ने हाथापाई की।
पार्टी सूत्रों ने बताया कि माकपा के उम्मीदवार पंचायत चुनावों के लिए बीडीओ ऑफिस जा रहा है आचार्य उनके साथ थे हमले में घायल हुए आचार्य को पुरुलिया सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्हें पेट में अंदरूनी चोट आई है तृणमूल ने इस घटना में अपनी भूमिका से इनकार किया है
हिंसक घटनाओं के साथ ही पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव का मुद्दा अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचे बीजेपी ने आरोप लगाया है कि राज्य के कई हिस्सों में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता को नामांकन करने के लिए नहीं दे रहे हैं। इस कारण से बीजेपी ने सर्वोच्च न्यायालय से नामांकन की आखिरी तारीख (9 अप्रैल) को बढ़ाने और ऑनलाइन नामांकन की सुविधा के लिए मांग की है। चार अप्रैल को भाजपा के प्रदेश इकाई ने सर्वोच्च न्यायालय में इस बावड़ को एक याचिका दायर की थी। बताओ कि साल 2013 के पंचायत चुनाव में भी 14 प्रतिशत सीटों पर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के अलावा कोई अन्य पार्टी के उम्मीदवार पर्चा नहीं भर पाए गए थे। इससे पहले वाम सरकार के दौरान वर्ष 2003 में भी कुछ ऐसा ही हुआ था। तब करीब 7,000 सीटों पर एक से अधिक उम्मीदवारों के न होने के चलते जनप्रतिनिधि निर्विरोध चुनाव चुने गए थे।


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