हिंदू महासभा ने मोदी को भेजी खून से लिखी चिट्ठी, कहा- वापस ले लें, एससी, एसटी अधिनियम के खिलाफ याचिका
संगठन के लोगों ने मामले में सरकार से पुनःविचार याचिका वापस लेने की मांग की समाचार एजेंसी एएनआई की खबर के मुताबिक हिन्दू महासंघ के कार्यकर्ताओं ने कहा कि अगर उनकी मांग नहीं मानी तो उन्होंने दिल्ली के रामला मैदान में सिर मुंडवाकर विरोध प्रदर्शन किया था।
अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति अधिनियम (एससी / एसटी अधिनियम) में सुप्रीम कोर्ट के बदलावों के बाद दायर की गई केंद्रीय सरकार की पुनर्वित्त याचिका के विरोध में उत्तर प्रदेश के अलगढ़ में अखिल भारतीय हिंदू महासाभा के सदस्यों ने शनिवार (7 अप्रैल) को अपनी खून से प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को चिटती लिखी संगठन के लोगों ने मामले में सरकार से पुनःविचार याचिका वापस लेने की मांग की समाचार एजेंसी एएनआई की खबर के मुताबिक हिन्दू महासंघ के कार्यकर्ताओं ने कहा कि अगर उनकी मांग नहीं मानी तो उन्होंने दिल्ली के रामला मैदान में सिर मुंडवाकर विरोध प्रदर्शन किया था। 2 अप्रैल को दलित संगठनों का आह्वान पर भारत बंद किया गया था। इस दौरान देश भर के कई हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन भी किए गए थे। विपक्ष के द्वारा निशाना सरल जान और हालात बेकाबु देखिए केंद्र सरकार की तरफ से एससी / एसटी अधिनियम में बदलाव के बारे में 2 अप्रैल को ही पुनर्विचार याचिका दर्ज की जाएगी। सरकार के पक्ष से दायर की गई पुनर्विचार याचिका के बारे में जानकारी केंद्रीय मंत्री रवीशंकर प्रसाद ने दी

3 अप्रैल को सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने स्थगन को अस्वीकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि फैसले पर किसी प्रकार का बदलाव नहीं होगा। कोर्ट की तरफ से यह भी कहा जाता है कि मामले में 10 दिनों में सुनवाई हो जाएगी। कोर्ट ने तीन दिन के भीतर सभी पक्षों को अपनी तरफ से जवाब देने के लिए कहा था। इस मामले में अगली सुनवाई 11 अप्रैल को होनी है। कोर्ट ने कहा- "हम एक्ट से कोई छेड़छाड़ नहीं की है। कोर्ट से बाहर क्या हो रहा है, उससे कोई हमारा मतलब नहीं है हमारा कार्य कानूनी बिंदुओं पर बात करना और संविधान के तहत कानून का आकलन करना है। "एक्ट के विरोध में प्रदर्शन और हिंसा फैलाने वाले पर निशाना साधते हुए कोर्ट ने कहा," जो सड़क पर हंगामा कर रहा था, उन्होंने हमारे जजमेंट पढ़ा भी नहीं होगा हम उन निर्दोष लोगों की चिंता सता रही है, जो जेलों के भीतर बंद हैं। "
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने एससी / एसटी अधिनियम के मामले में तत्काल गिरफ्तारी को रोक दिया और अग्रिम जमानत को कहा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून के दुरुपयोग को देखते हुए उसमें ये बदलाव किए गए थे। परन्तु दलित संगठनों ने इन बदलावों से कानून की हल्की हो जाने की आशंका व्यक्त की है और इसके विरोध में भारत बंद का आह्वान किया था। भारत बंद का सबसे प्रभाव मध्य प्रदेश में देखने के लिए किया गया था, जहां मीडिया समाचारों के अनुसार लगभग आठ लोग के हिंसक प्रदर्शन के कारण मृत्यु हो गया था। वहीं शनिवार को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से बीएसपी नेता कमल गौतम और मध्य प्रदेश के भाजपा नेता गिरिराज जटव को भारत बंद कर दिया गया था। बीएसपी नेता पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने जंगली प्रदर्शन के लिए दलितों में शराब बांटी और उन्हें प्रदर्शन के लिए भड़काया था वहीं जतव की गिरफ्तारी के लिए 10 हजार रुपये का पुराना रखा गया था।
अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति अधिनियम (एससी / एसटी अधिनियम) में सुप्रीम कोर्ट के बदलावों के बाद दायर की गई केंद्रीय सरकार की पुनर्वित्त याचिका के विरोध में उत्तर प्रदेश के अलगढ़ में अखिल भारतीय हिंदू महासाभा के सदस्यों ने शनिवार (7 अप्रैल) को अपनी खून से प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को चिटती लिखी संगठन के लोगों ने मामले में सरकार से पुनःविचार याचिका वापस लेने की मांग की समाचार एजेंसी एएनआई की खबर के मुताबिक हिन्दू महासंघ के कार्यकर्ताओं ने कहा कि अगर उनकी मांग नहीं मानी तो उन्होंने दिल्ली के रामला मैदान में सिर मुंडवाकर विरोध प्रदर्शन किया था। 2 अप्रैल को दलित संगठनों का आह्वान पर भारत बंद किया गया था। इस दौरान देश भर के कई हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन भी किए गए थे। विपक्ष के द्वारा निशाना सरल जान और हालात बेकाबु देखिए केंद्र सरकार की तरफ से एससी / एसटी अधिनियम में बदलाव के बारे में 2 अप्रैल को ही पुनर्विचार याचिका दर्ज की जाएगी। सरकार के पक्ष से दायर की गई पुनर्विचार याचिका के बारे में जानकारी केंद्रीय मंत्री रवीशंकर प्रसाद ने दी

3 अप्रैल को सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने स्थगन को अस्वीकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि फैसले पर किसी प्रकार का बदलाव नहीं होगा। कोर्ट की तरफ से यह भी कहा जाता है कि मामले में 10 दिनों में सुनवाई हो जाएगी। कोर्ट ने तीन दिन के भीतर सभी पक्षों को अपनी तरफ से जवाब देने के लिए कहा था। इस मामले में अगली सुनवाई 11 अप्रैल को होनी है। कोर्ट ने कहा- "हम एक्ट से कोई छेड़छाड़ नहीं की है। कोर्ट से बाहर क्या हो रहा है, उससे कोई हमारा मतलब नहीं है हमारा कार्य कानूनी बिंदुओं पर बात करना और संविधान के तहत कानून का आकलन करना है। "एक्ट के विरोध में प्रदर्शन और हिंसा फैलाने वाले पर निशाना साधते हुए कोर्ट ने कहा," जो सड़क पर हंगामा कर रहा था, उन्होंने हमारे जजमेंट पढ़ा भी नहीं होगा हम उन निर्दोष लोगों की चिंता सता रही है, जो जेलों के भीतर बंद हैं। "
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने एससी / एसटी अधिनियम के मामले में तत्काल गिरफ्तारी को रोक दिया और अग्रिम जमानत को कहा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून के दुरुपयोग को देखते हुए उसमें ये बदलाव किए गए थे। परन्तु दलित संगठनों ने इन बदलावों से कानून की हल्की हो जाने की आशंका व्यक्त की है और इसके विरोध में भारत बंद का आह्वान किया था। भारत बंद का सबसे प्रभाव मध्य प्रदेश में देखने के लिए किया गया था, जहां मीडिया समाचारों के अनुसार लगभग आठ लोग के हिंसक प्रदर्शन के कारण मृत्यु हो गया था। वहीं शनिवार को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से बीएसपी नेता कमल गौतम और मध्य प्रदेश के भाजपा नेता गिरिराज जटव को भारत बंद कर दिया गया था। बीएसपी नेता पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने जंगली प्रदर्शन के लिए दलितों में शराब बांटी और उन्हें प्रदर्शन के लिए भड़काया था वहीं जतव की गिरफ्तारी के लिए 10 हजार रुपये का पुराना रखा गया था।


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