सेना प्रमुख रावत ने भ्रष्टाचार पर मांगी कंपनियों की सहायता की, माना- लिप्त हैं कुछ अधिकारी
सीएडी को आर्मी कैंटीन भी कहा जाता है। रिपोर्ट
के मुताबिक आर्मी कैंटीन ने वित्त वर्ष 2018 में 18000 करोड़ रुपये का सेल
किया है, जो कि 5 से 7 फीसदी के बीच भारत में बिकने वाले गुड्स का है। वर्ष 2011 में एक संसदीय पैनल ने सैनिकों को रेशन मुहैया कराने वाला कैंटीन में जारी भ्रष्टाचार के बारे में सेना को घेरा था।
सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी) से कंपनियों को मदद मांगी है। उन्होंने हिन्दुस्तान यूनिलीवर, प्रोक्टर एंड गैम्बल और नेस्ले जैसे कंपनियों से कैंटीन स्टोर डिपार्टमेंट (सीएसडी) में परिमार्जन भ्रष्टाचार के लिए मदद की मांग की है। सीएसडी इन कंपनियों का सबसे बड़ा ग्राहक है इकोनोमिक टाइम्स के अनुसार सेना प्रमुख का कहना है कि सीएसडी में भ्रष्टाचार हो रहा है और इसमें वर्दी मौजूद अधिकारियों को भी शामिल किया गया है।
रावत ने सोमवार को मुंबई में आयोजित वेंडर मीट में शिरप कंपनियों के अधिकारियों से कहा, 'पिछले कुछ वर्षों से कैंटीन सेवा के कामकाज में कुछ समस्याएं आ रही हैं। कुछ अवसरों पर वर्दी में मौजूद हमारे अधिकारी भी बिजनेस पार्टनर कंपनी में मौजूद हैं, उनके दोस्तों की मदद से भ्रष्टाचार कर रहे हैं। हम बिजनेस पार्टनर से इस समस्या के समाधान में मदद चाहते हैं। हम चाहते हैं कि कैंटीन सेवा में कुछ गड़बड़ी न हो और इन गड़बड़ियों में अगर किसी भी अधिकारी में शामिल हो, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए आप हमारी सहायता करें। 'सीएसडी को आर्मी कैंटीन भी कहा जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक आर्मी कैंटीन ने वित्त वर्ष 2018 में 18000 करोड़ रुपये का सेल किया है, जो कि 5 से 7 फीसदी के बीच भारत में बिकने वाले गुड्स का है।
आपको बता दें कि 2011 में एक संसदीय पैनल ने सैनिकों को रेशन मुहैया कराने के लिए कैंटीन जारी किया था, भ्रष्टाचार के बारे में सेना को घेरा था और कैंटीन में भी ऑडिट की मांग की गई थी। साल 2012 में सीएसडी द्वारा कैंटीन के लिए खरीददारी में बिचौलियों की भूमिका खत्म करने का कवायद शुरू किया गया था। रावत ने एफएमसीजी कंपनियों से कहा, 'हम कैंटीन की सेवा में पारदर्शिता लााना चाहते हैं और इसके लिए हमें आपकी सहायता की ज़रूरत है हम आप को यकीन है कि यह भ्रष्टाचार में शामिल किसी भी व्यक्ति को नहीं छोड़ा जाएगा फिर चाहे वह मुख्यालय में तैनात हो या फिर रीजनल सेंटर में या फिर डीपो में हम रक्षा क्षेत्र में किसी तरह का गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं कर सकते। '
सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी) से कंपनियों को मदद मांगी है। उन्होंने हिन्दुस्तान यूनिलीवर, प्रोक्टर एंड गैम्बल और नेस्ले जैसे कंपनियों से कैंटीन स्टोर डिपार्टमेंट (सीएसडी) में परिमार्जन भ्रष्टाचार के लिए मदद की मांग की है। सीएसडी इन कंपनियों का सबसे बड़ा ग्राहक है इकोनोमिक टाइम्स के अनुसार सेना प्रमुख का कहना है कि सीएसडी में भ्रष्टाचार हो रहा है और इसमें वर्दी मौजूद अधिकारियों को भी शामिल किया गया है।
रावत ने सोमवार को मुंबई में आयोजित वेंडर मीट में शिरप कंपनियों के अधिकारियों से कहा, 'पिछले कुछ वर्षों से कैंटीन सेवा के कामकाज में कुछ समस्याएं आ रही हैं। कुछ अवसरों पर वर्दी में मौजूद हमारे अधिकारी भी बिजनेस पार्टनर कंपनी में मौजूद हैं, उनके दोस्तों की मदद से भ्रष्टाचार कर रहे हैं। हम बिजनेस पार्टनर से इस समस्या के समाधान में मदद चाहते हैं। हम चाहते हैं कि कैंटीन सेवा में कुछ गड़बड़ी न हो और इन गड़बड़ियों में अगर किसी भी अधिकारी में शामिल हो, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए आप हमारी सहायता करें। 'सीएसडी को आर्मी कैंटीन भी कहा जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक आर्मी कैंटीन ने वित्त वर्ष 2018 में 18000 करोड़ रुपये का सेल किया है, जो कि 5 से 7 फीसदी के बीच भारत में बिकने वाले गुड्स का है।
आपको बता दें कि 2011 में एक संसदीय पैनल ने सैनिकों को रेशन मुहैया कराने के लिए कैंटीन जारी किया था, भ्रष्टाचार के बारे में सेना को घेरा था और कैंटीन में भी ऑडिट की मांग की गई थी। साल 2012 में सीएसडी द्वारा कैंटीन के लिए खरीददारी में बिचौलियों की भूमिका खत्म करने का कवायद शुरू किया गया था। रावत ने एफएमसीजी कंपनियों से कहा, 'हम कैंटीन की सेवा में पारदर्शिता लााना चाहते हैं और इसके लिए हमें आपकी सहायता की ज़रूरत है हम आप को यकीन है कि यह भ्रष्टाचार में शामिल किसी भी व्यक्ति को नहीं छोड़ा जाएगा फिर चाहे वह मुख्यालय में तैनात हो या फिर रीजनल सेंटर में या फिर डीपो में हम रक्षा क्षेत्र में किसी तरह का गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं कर सकते। '


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