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मदर्स डे का महत्व : बच्चों के लिए दिन-रात एक करने वाली माँ की बुढ़ापे में होती है अनदेखी

साठ साल की सुधा ने जब सुबह सात बजे बिस्तर छोड़ा तो अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पा रही थी। फिर भी किसी तक सुबह के कार्यों को पूरा कर बेटी का लंच पैक किया, पति को चाय नाश्ता दिया, बेटे के लिए खाना बनाया।


मगर इन सब के बीच वह अपना ख्याल रखना भूल गईं। सिर्फ एक कप चाय पीकर उन्होंने मां होने के सारे कर्तव्य पूरे किए। सुधा शुरू से बच्चों की देखभाल के क्रम में अपनी सेहत का ध्यान रखना भूल गई। आज उनके बच्चे बड़े हो गए हैं, पर किसी को उतना भी ख्याल नहीं कि वे अपनी मां डॉक्टर के पास ले जाए।


मदर्स डे का महत्व

हर साल मई के दूसरे रविवार को देश-विदेश में 'मदर्स डे' मनाया जाता हैं। हमारे देश में तो मां से जुड़ने का एक दिन नहीं होता। मां-बच्चे का रिश्ता ऐसा होता है कि वे भावनात्मक रूप से एक दूसरे से जुड़े ही रहते हैं। किसी भी रिश्ते को समझने के लिए शायद हर किसी को वक्त चाहिए पर मां-बच्चे का रिश्ता ऐसा है, जो बच्चे के जन्म से पहले ही जुड़ जाता है। तभी तो सिर्फ एक ही लाइन जेहन में आती है- 'तुझे सब है पता मेरी मां'। मां को अपने बच्चे के बारे में हर बात पता होती है। उसे कहने की भी जरूरत नहीं पड़ती। पर समय की आपाधापी में बच्चे अपनी मां की जरूरतें समझ नहीं पा रहे। बड़े होकर उनकी अलग दुनिया हो जाती है। जिसमें उसकी मां शामिल नहीं होती। न उनकी सेहत की चिंता और न ही उनकी जरूरतों का ख्याल। दरअसल जीवन की आपाधापी में ज्यादातर लोग मां को भूल गए हैं।

बच्चा सबसे पहले माँ को ही पहचानता है

जब बच्चे का जन्म होता है तो वह समाज, जाति धर्म और अच्छे-बुरे को नहीं जानता है। वह सिर्फ अपनी मां को ही पहचानता है, उसकी अंगुली पकड़ कर चलना सीखता है, मां से ही उसे अच्छे-बुरे की पहचान होती है। मां की सेवा और त्याग से वह जिंदगी में अपना एक मुकाम बनाता है पर जब बात मां का ख्याल रखने की आती है, तो उसकी देखभाल के लिए कोई नौकरानी या वृद्धाश्रम का सहारा लेता है। कहा जाता है कि पूत कपूत हो सकता है पर माता कुमाता नहीं हो सकती। उम्र के जिस पड़ाव में एक मां को जब अपने बच्चों की जरूरत होती है तो वह उसके साथ नहीं होता। मां-बच्चे के रिश्ते में हर वक्त मिठास बनी रहे, इसके लिए जरूरत है कि बच्चा बड़ा होकर मां का उसी तरह ख्याल रखे जैसे बचपन में उसकी मां रखती थी। इसके लिए जरूरी है कि उम्र के साथ-साथ उनकी सेहत में उतार-चढ़ाव का ध्यान रखा जाए।

माँ का ख्याल रखना जरूरी

आप अपनी मां का हर साल स्वास्थ्य से जुड़े टेस्ट करा उनका ध्यान रख सकते हैं। ब्लड शुगर, यूरिन, ब्लडप्रेशर, कोलेस्ट्राल, पेप स्मियर और मैमोग्राफी जैसे टेस्ट उनके लिए बेहद जरूरी हैं। उन्हें नियमित व्यायाम और योगा के लिए कहें। उम्र बीतने के साथ आर्थराइटिस जैसी समस्या उत्पन्न होने लगती है। शरीर में कैल्शियम की कमी से ऐसी स्थिति आ सकती है। इसीलिए जरूरी है कि खाने-पीने का सही ध्यान रखना चाहिए। खाने में पौष्टिक चीजें शामिल कर उन्हें स्वस्थ रखा जा सकता है। जैसे सोयाबीन, पनीर, ब्रोकोली, अखरोट, अंडा, सेब और ग्रीन टी वगैरह। सबसे बड़ी बात यह है कि मां को अकेला महसूस न होने दें। कोशिश कर उनके साथ रोज थोड़ा समय बिताएं।

-ईशा

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