भारतीय लोकतंत्र के सामाजिक समरसता में अधिवक्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण है:संजय जोशी*
इलाहाबाद 3 जून 2018। भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय संगठन महामंत्री संजय भाई जोशी जी आज अधिवक्ताओं द्वारा आयोजित भारतीय लोकतंत्र एवं समाज में अधिवक्ताओं की भूमिका विषयक संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए.
जोशी जी ने अपने उदबोधन में कहा कि आज न्यायपालिका में 70% जज एक दूसरे के सम्बंधी है.पारदर्शिता पूर्ण जजों की नियुक्ति का कोई व्यवस्था नही है.भारतीय लोकतंत्र के सामाजिक समरसता में अधिवक्ताओं के भूमिका महत्वपूर्ण है.आजकल वकीलों के साथ दुर्व्यवहार की अनेक शिकायतें आ रही है.इस पर रोक लगनी चाहिये. आजकल मुकदमों में ऊपर के न्यायालयों में 4-6 साल और निचली अदालतों में 8-9 साल लग जाने से न्याय पर कुप्रभाव पद रहा है.मुकदमों को लम्बित रखने से न्यायपालिका की गरिमा पर असर पड़ता है.अधिवक्ताओं को आगे बढ़कर इस सिस्टम को बदलना होगा.त्वरित न्याय से पक्षकारों को जल्द परिणाम मिल जाता है.
मुकदमों में बहस और निर्णय में हिंदी के प्रयोग से समझना सभी पक्षों को आसान होगा.न्याय में विलम्ब में दोषियों पर मात्र 2% जुर्माना होता है.
जनहित याचिका अगर समाज और न्याय व्यवस्था के सुधार के लिये हो तो बेहतर होगा.आजकल ऐसे मुकदमों की भरमार होना बहुत तर्कसंगत नही है.
न्यायालय में मुकदमा और पुलिस में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने की संख्या बढ़े तो ये समाज के लिये शुभ संकेत नही है.
समाज में अध्यापकों.डाक्टरों की तरह अधिवक्ताओं का बड़ा सम्मान था जिसमें अब गिरावट आ रही है. आजकल व्यक्ति पैसे के लिये स्वास्थ्य पर ध्यान नही देता और जब पैसा हो जायेगा तो स्वास्थ्य ठीक करने में लग जाता है.
आजकल ज्यादा पैसे लेने वाले को बड़ा वकील माना जाता है. अर्थ प्रधानता नुकसानदायक है.मूल्यों का संवर्धन नही किया जा रहा है.लोकतंत्र में सामान्य लोगों की सोंच का भी महत्व होता है.मुकदमों की गुणवत्ता पर ध्यान देना होगा.समाज को सही दिशा में लें जाने के लिये इस समाज के जिम्मेदार अधिवक्ता समाज को आगे आना होगा.आम लोगों को अधिवक्ता समाज पर काफी विश्वास है. संगोष्ठी की अध्यक्षता वी.पी.श्रीवास्तव एवं संचालन कार्यक्रम के आयोजक के.के.द्विवेदी और धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम के सह संयोजक मनोज दुबे ने किया. कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता राधाकांत ओझा.अनिल तिवारी.राकेश पांडे.बी.एन.सिंह.ब्रजेश सहाय.नर नारायन मिश्र.आर.पी तिवारी.आशुतोष त्रिपाठी.के.के.मिश्र.अभिषेक चौहान.अनिल पाठक.दुर्गेश तिवारी.राम रसिक तिवारी आदि रहे. पूर्व प्रवक्ता देवेन्द्र नाथ मिश्र के अनुसार जोशी जी का प्रयाग आगमन पर भव्य स्वागत किया गया.अपने व्यस्त कार्यक्रम में जोशी जी सुबह सोमेश्वर महादेव मंदिर नैनी में रुद्राभिषेक करने के पश्चात बार के पूर्व अध्यक्ष राधाकांत ओझा एवं अनिल तिवारी के घर गये.इसके पश्चात दिवंगत महानगर के पूर्व उपाध्यक्ष रमेश शर्मा के आवास पर जाकर अपनी शोक संवेदना व्यक्त की.दिन भर पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर स्थानीय राजनैतिक स्थिति की जानकारी ली.आउट दुरंतो से दिल्ली प्रस्थान कर गये.
स्वागत करने वालों में दिवाकर त्रिपाठी.शिवदत्तपटेल.प्रह्लाद तिवारी.सुनील जैन.अभय नारायण पांडे.रामजी शुक्ला.नीलकंठ तिवारी.आदित्य मिश्र.
अजय त्रिपाठी.जनार्दन मिश्र.वीरेंद्र मिश्र. डा.भूपेश द्विवेदी.चंद्र शेखर ओझा.पवन ओझा.भोला तिवारी.चंद्र भूषण सिंह.हर्षित मिश्र.आशुतोष पांडेय.जय चंद्र मिश्र.आनंद सोनकर.ब्रिजेश पांडेय.प्रचँड शुक्ला.रमाकांत विश्वकर्मा. गौतम त्रिपाठी.त्रिवेणी पांडे आदि रहे।रिपोर्ट- सूर्य मणि दुबे(इलाहाबाद)
जोशी जी ने अपने उदबोधन में कहा कि आज न्यायपालिका में 70% जज एक दूसरे के सम्बंधी है.पारदर्शिता पूर्ण जजों की नियुक्ति का कोई व्यवस्था नही है.भारतीय लोकतंत्र के सामाजिक समरसता में अधिवक्ताओं के भूमिका महत्वपूर्ण है.आजकल वकीलों के साथ दुर्व्यवहार की अनेक शिकायतें आ रही है.इस पर रोक लगनी चाहिये. आजकल मुकदमों में ऊपर के न्यायालयों में 4-6 साल और निचली अदालतों में 8-9 साल लग जाने से न्याय पर कुप्रभाव पद रहा है.मुकदमों को लम्बित रखने से न्यायपालिका की गरिमा पर असर पड़ता है.अधिवक्ताओं को आगे बढ़कर इस सिस्टम को बदलना होगा.त्वरित न्याय से पक्षकारों को जल्द परिणाम मिल जाता है.
मुकदमों में बहस और निर्णय में हिंदी के प्रयोग से समझना सभी पक्षों को आसान होगा.न्याय में विलम्ब में दोषियों पर मात्र 2% जुर्माना होता है.
जनहित याचिका अगर समाज और न्याय व्यवस्था के सुधार के लिये हो तो बेहतर होगा.आजकल ऐसे मुकदमों की भरमार होना बहुत तर्कसंगत नही है.
न्यायालय में मुकदमा और पुलिस में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने की संख्या बढ़े तो ये समाज के लिये शुभ संकेत नही है.
समाज में अध्यापकों.डाक्टरों की तरह अधिवक्ताओं का बड़ा सम्मान था जिसमें अब गिरावट आ रही है. आजकल व्यक्ति पैसे के लिये स्वास्थ्य पर ध्यान नही देता और जब पैसा हो जायेगा तो स्वास्थ्य ठीक करने में लग जाता है.
आजकल ज्यादा पैसे लेने वाले को बड़ा वकील माना जाता है. अर्थ प्रधानता नुकसानदायक है.मूल्यों का संवर्धन नही किया जा रहा है.लोकतंत्र में सामान्य लोगों की सोंच का भी महत्व होता है.मुकदमों की गुणवत्ता पर ध्यान देना होगा.समाज को सही दिशा में लें जाने के लिये इस समाज के जिम्मेदार अधिवक्ता समाज को आगे आना होगा.आम लोगों को अधिवक्ता समाज पर काफी विश्वास है. संगोष्ठी की अध्यक्षता वी.पी.श्रीवास्तव एवं संचालन कार्यक्रम के आयोजक के.के.द्विवेदी और धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम के सह संयोजक मनोज दुबे ने किया. कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता राधाकांत ओझा.अनिल तिवारी.राकेश पांडे.बी.एन.सिंह.ब्रजेश सहाय.नर नारायन मिश्र.आर.पी तिवारी.आशुतोष त्रिपाठी.के.के.मिश्र.अभिषेक चौहान.अनिल पाठक.दुर्गेश तिवारी.राम रसिक तिवारी आदि रहे. पूर्व प्रवक्ता देवेन्द्र नाथ मिश्र के अनुसार जोशी जी का प्रयाग आगमन पर भव्य स्वागत किया गया.अपने व्यस्त कार्यक्रम में जोशी जी सुबह सोमेश्वर महादेव मंदिर नैनी में रुद्राभिषेक करने के पश्चात बार के पूर्व अध्यक्ष राधाकांत ओझा एवं अनिल तिवारी के घर गये.इसके पश्चात दिवंगत महानगर के पूर्व उपाध्यक्ष रमेश शर्मा के आवास पर जाकर अपनी शोक संवेदना व्यक्त की.दिन भर पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर स्थानीय राजनैतिक स्थिति की जानकारी ली.आउट दुरंतो से दिल्ली प्रस्थान कर गये.
स्वागत करने वालों में दिवाकर त्रिपाठी.शिवदत्तपटेल.प्रह्लाद तिवारी.सुनील जैन.अभय नारायण पांडे.रामजी शुक्ला.नीलकंठ तिवारी.आदित्य मिश्र.
अजय त्रिपाठी.जनार्दन मिश्र.वीरेंद्र मिश्र. डा.भूपेश द्विवेदी.चंद्र शेखर ओझा.पवन ओझा.भोला तिवारी.चंद्र भूषण सिंह.हर्षित मिश्र.आशुतोष पांडेय.जय चंद्र मिश्र.आनंद सोनकर.ब्रिजेश पांडेय.प्रचँड शुक्ला.रमाकांत विश्वकर्मा. गौतम त्रिपाठी.त्रिवेणी पांडे आदि रहे।रिपोर्ट- सूर्य मणि दुबे(इलाहाबाद)


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