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सुबहा से देर रात तक चलता रहा मजलिस मातम का दौर*

*चौथी मोहर्रम : माहे मोहर्रम की चार को सुबहा से  बख्शी बाज़ार से शुरु हुआ मजलिस मातम का दौर देर रात तक जारी रहा ।मस्जिद काज़ी जी,इमामबाड़ा नाज़िर हुसैन, इमामबाड़ा खुरशैद हुसैन मरहूम,अबरार हुसैन,ज़व्वार हुसैन,रौशनबाग़ मे मतलूब हुसैन,काज़ीगंज मे इमामबाड़ा मोजिज़ अब्बास,चक ज़ीरो रोड स्थित डिप्टी ज़ाहिद हुसैन,चक शिया जामा मस्जिद,छोटी चक,घण्टा घर इमामबाड़ा सय्यद मियां,पान दरीबा स्थित इमामबाड़ा मिर्जा हिमायत हुसैन,बाबर भाई के अज़ाखाना,ज़ायर हुसैन,इमामबाड़ा बड़ा घर सहित रानी मण्डी,दरियाबाद,करैली आदि मुस्लिम बहुल्य इलाक़ो मे देर रात तक मजलिस मातम की सदाएं गूंजती रहीं।
पान दरीबा स्थित इमामबाड़ा हिमायत हुसैन मे निकले ज़ुलजनाह की ज़ियारत करते लोग
मजलिस मे मौलाना रज़ी हैदर,ज़ाकिरे अहलेबैत मुफीद अब्बास,कल्बे अब्बास सहित अन्य ओलमाओं ने जगह जगह आयोजित मजलिस मे शोहदाए करबला पर ढाए गए ज़ुल्म की दास्तां बयान की।
पान दरीबा मे हुई मजलिस के बाद शबीहे ज़ुल्जनाह भी निकाला गया जिसपर लोगों ने फूल माला चढ़ा कर मन्नत भी मांगी और बोसा भी लिया ।अन्जूमन अब्बासिया के नौहा ख्वान व मातमदारों ने खेराजे अक़िदत पेश की।वहीं दूसरी ओर इमामबाड़ा आलमचंद मे हुई मजलिस को मौलाना अख्तर हसन रिज़वी ने खिताब करते हुए हज़रत इमाम हुसैन व 72 शहीदों को याद किया ।अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया के नौहा ख्वान शादाब ज़मन, शबीह अब्बास,यासिर,ज़हीर,कामरान,एजाज़,युसूफ,ज़ुलफेक़ार,आदि ने ग़मगीन नौहे पढ़े।उम्मुल बनीन सोसाईटी के महासचिव व अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया के प्रवक्ता सै०मो०अस्करी ने बताया की माहे मोहर्रम पर घरों मे महिलाओं की भी मजलिसें हुई।जहां बड़ी संख्या मे सीयाह लिबास मे औरतों ने नौहा और मातम का नज़राना पेश करते हुए शहज़ादी फातेमा ज़हरा को उन्के लाल की शहादत के महिने मे पुरसा देते हुए ग़म मनाया।।पहली मोहर्रम से शुरु हुआ मजलिस मातम का दौर दो माह और आठ दिनो तक जारी रहेगा।इस मौक़े पर शहर की तक़रीबन सभी अन्जूमनो की ओर से लगातार मातमदारी और नौहा ख्वानी हो रही है।
भवदीय
सै०मो०अस्करी

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