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एससी-एसटी एक्ट के विरोध में भारत बंद का इलाहाबाद में व्यापक असर

एससी-एसटी एक्ट के विरोध में भारत बंद का इलाहाबाद में व्यापक असर दिखा। सिविल लाइंस, कटरा, धूमनगंज समेत कई प्रमुखों बाजारों में दिन में दुकानें बंद रहीं। जो खुली थीं उन्हें आंदोलनकारियों ने बंद करा दिया। आंदोलनकारियों ने भाजपा सांसद श्यामा चरण के होटल कान्हा श्याम में प्रदर्शन किया। हालांकि पुराने शहर के चौक, कोठापारचा आदि क्षेत्र के बाजारों में मिला-जुला असर रहा। बंद के समर्थन में अलग-अलग संगठनों के बैनर तले सैकड़ों युवाओं ने पूरे शहर में जुलूस निकाला और चक्का जाम किया। सिविल लाइंस में युवाओं ने अर्द्धनग्न होकर प्रदर्शन और आवागमन बाधित किया। रसूलाबाद घाट से तेलियरगंज तक कैंडल मार्च निकाला। पूरे शहर में जगह-जगह फोर्स तैनात रही।इलाहाबाद
सुबह 11 बजेे तक बंद का बहुत असर नहीं दिख रहा था। सिविल लाइंस, कटरा तथा अन्य प्रमुख बाजारों में ज्यादातर दुकानें खुल गईं थीं। हालांकि, बवाल की आशंका को देखते हुए दुकानों के शटर आधे ही खुले थे। 12 बजे के बाद तो माहौल पूरी तरह से बदल गया। पूरे शहर में बंद के समर्थन में जुलूस निकलने लगे। सिविल लाइंस, कटरा, चौक, धूमनगंज हर तरफ युवाओं ने जुलूस निकाला और दुकानें बंद कराईं। नाराज आंदोलनकारियों ने होटल कान्हा श्याम परिसर में भी प्रदर्शन किया। ई-टॉन का काउंटर पलट दिया। दूर से युवाओं का हुजूम देखकर लोग दुकानें बंद कर ले रहे थे। सिविल लाइंस में बिग बाजार, पीवीआर, कचहरी के पास फैशन जोन आदि माल बंद रहे।

इसके अलावा कलेक्ट्रेट परिसर और सुभाष चौराहा आंदोलन के केंद्र में रहे। कलेक्ट्रेट में अधिवक्ताओं तथा कई अन्य संगठन से जुड़े लोगों ने एक्ट के विरोध में धरना दिया। लक्ष्मी टाकीज चौराहा, टैंपो स्टैंड आदि स्थान से जुलूस बनाकर पहुंचे लोगों ने कलेक्ट्रेट के सामने चक्काजाम भी कर दिया। इससे काफी देर तक आवागमन बाधित रहा। युवाओं ने घूम-घूमकर कटरा, कर्नलगंज आदि क्षेत्रों में बाजार बंद कराए। सुभाष चौराहा पर नवयुवक ब्राह्मण समाज के बैनर तले लोगों ने अनशन किया। इसके अलावा युवाआें का हुजूम हर तरफ से जुलूस बनाकर सुभाष चौराहा पर पहुंच रहा था। युवाओं ने अर्द्धनग्न होकर प्रदर्शन और चक्का जाम किया। हालांकि, एंबुलेंस को जाने दिया जा रहा था। यह स्थिति दिन भर बनी रही। इसकी वजह से कई बार आवागमन बाधित रहा। प्रदर्शनकारियों में सरकार और राजनीतिक दलों के खिलाफ जबरदस्त नाराजगी रही। प्रदर्शनकारी सरकार और भाजपा के खिलाफ जमकर लगातार नारेबाजी करते रहे। आंदोलन के दौरान बवाल की आशंका बनी रही। इसके मद्देनजर प्रमुख स्थलों पर तो पुलिस तैनात ही रही, जुलूस के साथ भी फोर्स लगी रही।

भारत बंद के दौरान आंदोलनकारियाें ने एससी-एसटी एक्ट के अलावा आरक्षण के खिलाफ भी आवाज बुलंद की। उनमें सरकार के खिलाफ जबरदस्त नाराजगी दिखी। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की गई।
सुभाष चौराहा पर नवयुवक ब्राह्मण समाज के बैनर तले जुटे लोगों ने अनशन किया। इसमें शामिल लवकेश मिश्रा, सुनील पांडेय, सूर्यमणि पांडेय, संजय पांडेय आदि ने जाति के बजाय आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग की। शिवम नंदन त्रिपाठी ने एससी-एसटी एक्ट को समाज का बांटने वाला बताया। भारतीय महाशोषित समाज के बैनर तले हाईकोर्ट स्थित आंबेडकर चौराहा पर लोगों का जमावड़ा हुआ। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष बृजेंद्र कुमार पांडेय, राजेश पांडेय, आशुतोष त्रिपाठी आदि ने एससी-एसटी एक्ट वापस लेने की मांग की। विश्व बंधुत्व ब्राह्मण महासभा की ओर से सुभाष चौराहा पर जुलूस निकाला गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष श्याम सूरत पाण्डेय, फूलचंद दुबे, सत्य प्रकाश पांडेय, शशिकांत दुबे आदि ने सरकार की नीतियों को जनविरोधी बताया।

कान्यकुब्ज ब्राह्मण सभा के बैनर तले भी सुभाष चौराहा पर लोगों का जमावड़ा हुआ। दिवाकर नाथ त्रिपाठी, गिरिजा शंकर मिश्रा, सुधीर दिवेदी, शैलेंद्र अवस्थी आदि ने विधेयक तत्काल वापस लेने की मांग की। राष्ट्रीय परशुराम सेना के विमल तिवारी, प्रभाकर पांडेय, अंकित दुबे, शुभम मिश्रा आदि ने एससी-एसटी एक्ट को लागू करने पर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई। श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के मनेंद्र प्रताप सिंह ने एक्ट वापस लेने की मांग की। सेनानी लोकतंत्र रक्षक विकास परिषद की ओर से कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपकर आरक्षण और एससी-एक्ट आदि को खत्म करने की मांग की गई। रोशन लाल भारतीया, उमेश चंद्र, कृष्ण कुमार यादव, मानिक चंद्र पटेल, विनय कुशवाहा आदि ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी पर लोगों को बांटने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि कांग्रेस संसद में बिल का समर्थन करती है और बाहर इसके विरोध में हुए आंदोलन के साथ भी खड़ा होती है।

लोक निर्माण विभाग के ठेकेदारों ने भी एक्ट के विरोध में प्रदर्शन किया और जुलूस निकाला। विरोध करने वालों में सपा नेता पप्पू गौतम, सुशील चंद्र, संत नारायण त्रिपाठी, राजेंद्र कुमार द्विवेदी आदि शामिल रहे। सपा नेता विजय वैश्य ने भी एक्ट का विरोध किया। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन से जुड़े छात्रों ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ भवन के सामने एक्ट के विरोध में प्रदर्शन किया। उन्होंने संघटक कालेजों में भी प्रदर्शन किया तथा कक्षाएं बाधित कीं। आंदोलन में राजीव सिह, प्रियदर्शी त्रिपाठी, शिव मनोरथ शुक्ल, सुशील तिवारी आदि शामिल रहे। भारतीय इंसाफ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.सर्वदेव सिंह ने आरक्षण-अनारक्षण के मुद्दे पर वर्ग संघर्ष का मुद्दा उठाया। उन्होंने बैलेट पेपर से मतदान कराने की भी मांग की।

एससी-एसटी एक्ट के साथ आरक्षण के विरोध में युवाओं का हुजूम बृहस्पतिवार को सड़क पर उतरा। उनके पीछे कोई सियासी ताकत नहीं खड़ी दिखाई दी। स्वत: स्फूर्त इस आंदोलन में युवाओं की भीड़ चौंकाने वाली रही। उनमें गुस्सा भी सभी दलों के खिलाफ रहा। गौर करने वाली बात यह भी रही बिना नेतृत्व वाले इस आंदोलन हर युवा खुद नियंत्रण में रहा और कहीं भी अराजकता नहीं होने दी। कोई उत्तेजित हुआ तो दूसरे ने रोक लिया। इस आंदोलन की कुछ संगठनों ने अगुवाई जरूर की लेकिन सड़क पर उतरे युवाओं का बड़ा तबका ऐसा था जिनके हाथ में किसी का झंडा नहीं था। इस तरह का नजारा भी शायद पहली बार देखने को मिला कि ज्यादातर ने केसरिया कुर्ता पहन रखा था तो सिर पर भी उसी रंग का साफा था, लेकिन नारे मोदी और योगी के खिलाफ लग रहे थे। उनमें से आधे ने तो कुर्ता भी उतार दिया और अर्द्धनग्न होकर अपनी नाराजगी जताई। सुभाष चौराहा से निकलने वाले हर मार्ग पर युवाओं का दिन भर कब्जा रहा। उनमें सरकार और भाजपा के साथ अन्य दलों के खिलाफ भी नाराजगी रही। उनका कहना था कि जनहित के अन्य मुद्दों पर दलों में मतभेद दिखता है, लेकिन एससी-एसटी एक्ट बिल पर सभी एक साथ हो गए। इसे लेकर उनमें नाराजगी रही।

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