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कुम्भ2019 ; 'राम लला हम आएंगे मंदिर वहीं बनाएंगे......' के गीत पर भी झूम कर नृत्य

प्रातःकाल संवाददाता,प्रयागराज

वसंत पंचमी के स्नान के लिए अभी से प्रयागराज में श्रद्धालुओं का बड़ी संख्या में आगमन प्रारम्भ हो गया है | कुम्भ में पधारने वाले इन आगंतुकों के लिए एक तरफ जहां कुम्भ मेले का धार्मिक वातावरण कौतुहल का विषय है वहीं प्रयागराज शहर में चल रही सांस्कृतिक गतिविधियां उनके लिए आकर्षण का केंद्र बिंदु बनी हुई हैं |  उत्तरप्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा कुम्भ परिसर में तैयार किये गए पांच प्रमुख सांस्कृतिक मंचों  पर कला और संस्कृति की झलक प्रस्तुत कर रहे कार्यक्रम आज भी दर्शकों द्वारा सराहे गए |   
गंगा मंच - प्रयागराज - मुंबई से पधारे भोजपुरी फिल्म अभिनेता रवि किशन ने शुक्रवार को जब गंगा मंच पर 'बम बम बोल रहा है काशी.....' के गीत पर अपने समूहों के साथ शिव तांडव नृत्य शुरू किया तब पंडाल में हजारों हाथ हवा में लहराने लगे | इसी क्रम में बनारस घराने के गायक का होली गीत 'होली खेले मसाने में......'गाया गया तो श्रोताओं का धैर्य जवाब दे गया सभी अपने स्थानों पर खड़े हो कर नृत्य करने लगे | जैसे फागुन की बहार आ गयी हो | इसी तरह से 'राम लला हम आएंगे मंदिर वहीं बनाएंगे......' के गीत पर भी झूम कर नृत्य हुआ | फिल्म अभिनेता की अगुवाई में मार्शल इवेंट ऑर्गनाइजर  मुंबई के दस कलाकारों ने प्रभावकारी शिव तांडव नृत्य किया | इसमें पांच पुरुष एवं पांच महिला कलाकार शामिल थे | भोजपुरी अभिनेता ने अपने जीवंत किरदार से शिव तांडव नृत्य में जोश भर दिया मानों भगवान भोलेनाथ स्वयं सवारी कर रहे थे |  इसके पहले मुंबई से ही आये कलाकार विजय पंडित की अगुवाई में सप्तधारा नृत्य की प्रस्तुति दी गयी | इसमें देश की प्रमुख सात नदियों को लेकर चरित्र एवं संस्कृति का सन्देश दिया गया था | इसमें मशहूर कोरिओग्राफर एवं संगीतकार नरहरि ने प्रभावकारी मंचन की अगुवाई की | दोनों कार्यक्रमों के दौरान पंडाल खचाखच भरा था | इससे पहले रवि किशन जी ने मीडिया से बात करते हुए कुम्भ के सफल आयोजन पर योगी सरकार की तारीफ़ की | उन्होंने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से सांस्कृतिक सन्देश  के लिए संस्कृति विभाग की भी सराहना की | अभिनेता रवि किशन ने कहा ऐतिहासिक धार्मिक कुम्भ मेला उन्हें गौरवान्वित  करता है | इस वर्ष प्रदेश की सरकार ने कुम्भ के विशेष आयोजन की प्रमुखता से और भी ख़ास बना दिया है | 
सेक्टर ४ के अक्षयवट मंच पर असम के कलाकार उत्पल ज्योति बोरा ने बिहू लोकनृत्य प्रस्तुत किया |  भारत के असम राज्य का लोक नृत्य बिहू त्योहार से संबंधित है. यह खुशी का नृत्य युवा पुरुषों और महिलाओं दोनों द्वारा किया जाता है और इसकी विशेषता फुर्तीली नृत्य मुद्राएँ तथा हाथों की तीव्र गति है इसमें नर्तक पारंपरिक रंगीन असमिया परिधान पहनते हैं | बिहू के बाद लखनऊ की कलाकार कुमकुम धर ने  कुम्भ पर आधारित कुम्भ कत्थक बैले प्रस्तुत किया |  संगीत के इन सुरों के बाद जयपुर के ही कोहिनूर लंगा ने राजस्थानी लंगा गायन प्रस्तुत किया |  लंगा गायन लगा जनजाति की लोक गायन शैली है. इस गायन में मूल रूप से राजपूतों के यहां वंशावलियों का बखान किया जाता है |  इस मंच पर जबलपुर की दुर्गा शर्मा ने वोइलिन वादन किया और कोलकाता की रत्न दत्ता दत्ता द्वारा ओडिसी नृत्य प्रस्तुत किया गया |
सेक्टर 6 के भारद्वाज मंच पर उड़ीसा का पारम्परिक लोक नृत्य गोटिपुआ की प्रस्तुति की गयी, जिसे गोटिपुआ दशभुजा नृत्य दल ने प्रस्तुत किया | गोटीपुआ उड़ीसा का पारम्परिक लोकनृत्य है जो भगवान जगन्नाथ और श्रीकृष्ण को समर्पित है | यह नृत्य उड़ीसा के घर घर में  छोटे बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ सिखाया जाता है, इस लोक नृत्य के बाद लखनऊ की सुग्रा खान ने लोकगायन प्रस्तुत किया |  जयपुर के सलिल भट्ट द्वारा वीणा वादन प्रस्तुत किया |
सेक्टर 17 के यमुना मंच पर आंबेडकर नगर के सौरभ एवं सचिन की कलाकार जोड़ी ने अवधी लोक गायन प्रस्तुत किया | वही सोनभद्र की आशा देवी ने आदिवासी लोकनृत्य की प्रस्तुति दी | इस नृत्य में सारी महिलाएँ महुआ के पेड़ के नीचे उपस्थित होकर महुआ बिन रही है तथा गीत गा रही है। सुश्री आशा सोनभद्र की रहने वाली है। इनके द्वारा प्रस्तुत कई आदिवासी नृत्य अत्यन्त ही प्रशंसनीय रहे।
उत्तर प्रदेश की सुश्री आशा देवी के बाद प्रस्तुतीकरण के लिए मंच पर मिथलेश लखनवी उपस्थित हुए जो लखनऊ से यहां पहुँचे है। इनके द्वारा भजन एवं गजल की शानदार प्रस्तुती की गयी। जिनमें राम नाम अमि मीठा कोई गाकर देखले आ जाते है। राम कोई बुला के देख लो एवं राना राना इलाहाबादी की गजल- लज्जते गम वहां दीजिए आप फिर मुस्कुरा दीजिए ने खूब तालिया बटोरी।
कार्यक्रम के अन्त में गोरखपुर से आयी मिथलेश तिवारी की प्रस्तुतियाँ भी अत्यन्त ही सराहनीय रही। श्रीमती तिवारी ने रूद्राष्टम के धरा शिव स्तुति करके पांडाल को भक्ति मंच बनाया। तदुपरान्त भक्ति गीत पायो जी मैं तो राम रतन धन पायों एवं कोई कहे गोविन्दा कोई कहे ग्वाला, मैं तो कहूं सावरिया बांसुरीवाला गाकर श्रोताओं का मन मोहा। श्रीमती तिवारी- कुम्भ की भव्यता से अभिभूत है तथा संस्कृति विभाग का आभार व्यक्त करती है।
सेक्टर 13 के सरस्वती मंच पर उत्तरप्रदेश के कलाकार राजबहादुर सिंह के ख़्याल गोई की प्रस्तुति हुई. ख्यालगोई गायन शैल में तुर्रा और कलगी पक्ष के बीच गायन के जरिये सवाल-जबाव होता है और इस कलाकारी के माध्यम से गायक दल अपना हुनर प्रस्तुत करते हैं. इनके बाद प्रयागराज के अभय राज प्रस्तुत करेंगे थ्बरहा. इनके बाद मेरठ की नीता गुप्ता ने कौरवी लोक गीत पेश किया. इस लोकगीत के उपरान्त दिल्ली की माला शर्मा के सिया स्वयंवर नाटिका का मंचन हुआ. इस नाटिका के बाद दिल्ली के ही नाटककार लोकेन्द्र त्रिवेदी ने भी नाटक - गुणवंती का मंचन किया. इस नाटक के बाद उत्तराखंड के भूपेश जोशी का भी नाटक - चारुदत्त  मंचित हुआ |
 प्रयागराज शहर में चल रही सांस्कृतिक गतिविधियां उनके लिए आकर्षण का केंद्र बिंदु बनी हुई हैं.  उत्तरप्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा प्रयागराज शहर में तैयार किये गए बीस सांस्कृतिक मंचों पर कला और संस्कृति की झलक दिखते अनेकों कार्यक्रम रोज़ की तरह आज भी जारी रहे. 
किला चौराहा कला-मंच, अक्षयवट मंच के निकट स्थित कला-मंच और  भारद्वाज मंच के निकट स्थित कला-मंच पर आज छिंदवाड़ा के कलाकार अरविन्द ने गेदी लोकनृत्य प्रस्तुत किया. इनके बाद प्रयागराज के एमटी सम्राट मैजिक ग्रुप ने जादू का कार्यक्रम पेश किया. जादू के बाद लखनऊ की सुषमा त्रिपाठी ने अवधि लोकगीतों और भजनों की प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीत लिया.
केपी इंटर कॉलेज कला-मंच, लेप्रोसी मिशन चौराहा कला-मंच और हाथी पार्क कला-मंच पर आज लखनऊ की शैक्षिक, सामाजिक व सांस्कृतिक संस्था समर्पण ने नाटक का मंचन किया. इनके बाद  दिल्ली के मेसर्स छू मंतर एन्ड पार्टी ने जादू दिखा कर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया.
संस्कृति ग्राम चौराहा कला-मंच, अरैल सेक्टर 19 कला-मंच और वल्लभाचार्य मोड़  कला-मंच पर आज उत्तराखंड के धीरज कुमार ने लोकनृत्य प्रस्तुत किया. उत्तराखंड के ही मुकेश कुमार ने भी लोकनृत्य की सुन्दर प्रस्तुति दे कर दर्शकों का मन मोह लिया.
बैंक चौराहा कला-मंच, सिविल लाइंस बस स्टॉप कला-मंच और पत्थर वाला चर्च कला-मंच पर आज वाराणसी की अभिनव समिति ने कठपुतली शो प्रस्तुत किया. कठपुतली शो के बाद लखनऊ की संस्था रिच फाउंडेशन ने नाटक का मंचन कर दर्शकों की सराहना प्राप्त की.
बालसन चौराहे, इंद्रमूर्ति चौराहे और सुभाष चौराहे के निकट स्थित कला मंचों पर आज  मध्यप्रदेश के तुषार सालम का अहिरी लोक नृत्य देखा गया. जिसके जवाब में आजमगढ़ के कमलेश यादव ने बिरहा लोक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया.   
विश्वविद्यालय तिराहे और राजापुर ट्रैफिक चौराहे के निकट स्थित कला-मंचों पर आज उत्तराखंड के कलाकार वेंकटेश नकुल ने लोकनृत्य की प्रस्तुति दी. उनके लोकनृत्य के उपरान्त  प्रयागराज के कलाकार सत्यनारायण पटेल ने चौलर कजरी लोक नृत्य प्रस्तुत करके दर्शकों की वाहवाही लूटी. 
हीरालाल हलवाई कला-मंच, सरस्वती घाट-नैनी ब्रिज कला-मंच और प्रयागराज जंक्शन कला-मंच पर आज मध्यप्रदेश के कलाकार गोविन्द यदुवंशी ने सेला लोक नृत्य की प्रस्तुति दी. उनके जवाब में गोरखपुर लोक गायक अजीत उपाध्याय ने भोजपुरी लोकगीतों से  समाँ  बाँध दिया
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