स्कृति कुम्भ में बिखरी भारत के पूर्वी क्षेत्र की लोक एवं जनजातीय सांस्कृतिक आभा
प्रयागराज, 13 फरवरी 2019 । संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समस्त क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों के साथ इलाहाबाद संग्रहालय, गाँधी समृति एवं दर्शन समिति, ललित कला अकादमी, साहित्य अकादमी, इंदिरा गाँधी राष्ट्रिय कला केंद्र एवं ट्राईफेड के सम्मिलित प्रयासों से प्रयागराज में चल रहे भव्य एवं दिव्य कुम्भ में सांस्कृतिक कुम्भ का आयोजन किया जा रहा है जिसके समन्वयन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नोडल एजेंसी के रूप में उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र को दी गयी है। सांस्कृतिक कुम्भ के अंतर्गत अरैल क्षेत्र में सेक्टर 19 के अंदर कलाग्राम एवं सांस्कृतिक कुम्भ का मुख्य मंच 'चलो मन गंगा जमुना तीर' देश विदेश से आये श्रद्धालुओं को भारत की वैभवशाली संस्कृति से परिचय कराने में अहम भूमिका निभा रहा है।
कलाग्राम में दर्शकों को भारत की संस्कृति के विविध आयामों से परिचय एवं आत्मभूति करवाने के उद्देश्य से 13 पवैलियन बने हैं जिनमें देश के सातों क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों और ट्राईफेड से आये लगभग 250 शिल्पकार अपनी हुनर का प्रदर्शन कर रहे हैं। वे अपने हस्तशिल्पों की बिक्री के साथ ही दर्शकों को उन्हें बनाने की पारम्परिक से भी रूबरू करा रहे हैं जो की सभी दर्शकों को रोमांचित कर दे रहा है। इसी क्रम में आपको इलाहाबाद संग्रहालय, गाँधी समृति एवं दर्शन समिति, ललित कला अकादमी, साहित्य अकादमी एवं इंदिरा गाँधी राष्ट्रिय कला केंद्र के पवैलियन में भारत की सांस्कृतिक धरोहर की झाँकी देखने को मिल रही है। इन शिल्पकारों के साथ ही इसी के साथ ही कलाग्राम में पारम्परिक व्यंजनों की भी स्टाल्स लगी हुई हैं जो आपको देशभर के लाजवाब व्यंजनों को चखने का सुअवसर प्रदान कर रही है। भारत की आत्मा जहाँ गाँव में बस्ती है ठीक उसी आधार पर कलाग्राम के परिसर को भी लोक एवं जनजातीय धुनों से गुलजार बना रखा है मंचीय कलाकारों ने। वे अपने लोक एवं जनजातीय नृत्य की प्रस्तुतियों से कलाग्राम परिसर में उपस्थित समस्त दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।
कलाग्राम में देश विदेश से आये श्रद्धालुओं और सैलानियों के साथ साथ कलाग्राम का भ्रमण कर रहे विशिष्ठ कलाकार और अतिथियों ने भी कलाग्राम में चल रही विविध सांस्कृतिक गतिविधियों को देखा और भारत की माटी के रंगों को देख प्रफुल्लित हुए। उन्हें प्रयागराज में देश भर से आये हस्तशिल्प जहाँ देखने को मिले वहीँ देश के विभिन्न प्रान्तों से आये विभिन्न व्यंजन चखने का सुअवसर भी प्राप्त हुआ। इन सब के बीच दर्शकों में पारम्परिक वर्ल्ड फेमस भारतीय व्यंजनों को चखने की भी होड़ मची रही। इसी क्रम में उन्होंने कलाग्राम स्थित सभी क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों के पवेलियन के अन्दर भारत के विभिन्न प्रान्तों से आये हस्तशिल्प देखने और खरीदने को मिले। आज कलाग्राम में मंचीय प्रस्तुतियां पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, कोलकता द्वारा करवाई गयी जिसमें श्री रबी दास बाउल एवं दल द्वारा मध्य प्रदेश का बाउल नृत्य, श्री बालाजी साहू एवं दल द्वारा ओडिशा का पारम्परिक शंख वादन, श्री राजू मोग एवं दल द्वारा त्रिपुरा का संगराई मोग नृत्य, सुश्री रेनू दुबे एवं दल द्वारा कमला पूजा, सुश्री अंजिका एवं दल द्वारा मणिपुर का पुंग चोलम नृत्य, नटराज कला केंद्र द्वारा कर्मा नृत्य, संस्क्रुतिका संस्थान द्वारा ओडिशा का सुप्रसिद्ध सम्बलपुरी एवं श्री गुणाधर सहिस द्वारा नटुआ नृत्य प्रस्तुत किया गया।
पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, कोलकता की निदेशक श्रीमती गौरी बसु ने इस कुम्भ में आयोजित सांस्कृतिक कुम्भ और प्रयागराज के सन्दर्भ में अपना अनुभव साझा करते हुए बताया की उनके सहयोगी और प्रतिभागी कलाकार भी उनके साथ इस संस्कृति कुम्भ में उनके सांस्कृतिक केंद्र द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली प्रस्तुतियों को लेकर काफी उत्साहित हैं और संस्कृति कुम्भ के अबतक हो चुके सफलतापूर्वक आयोजन में उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र और उनके निदेशक श्री इंद्रजीत ग्रोवर का काफी अहम और सार्थक योगदान रहा है जिसके लिए मैं उनके साथ संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, मंत्रालय के अधीनस्त अन्य प्रतिभागी संस्थायें और बाकि के सभी क्षेत्रीय सांस्कृतिक संस्थानों को हार्दिक बधाई देती हूँ।"
आज संस्कृति कुम्भ के मुख्य मंच 'चलो मन गंगा जमुना तीर' के अंतर्गत आयोजित होने वाली सांस्कृतिक संध्या का उद्घाटन पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, कोलकता की निदेशक श्रीमती गौरी बसु के करकमलों द्वारा किया गया; जिसके उपरान्त समस्त जन मानस को पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा लोक एवं जनजातीय प्रस्तुतियों से सजी सांस्कृतिक संध्या देखने को मिली। इन सांस्कृतिक संध्या में भारत के पूर्व क्षेत्रों से आये कलाकारों द्वारा उनके क्षेत्र की लोक एवं जनजातीय प्रस्तुतियाँ मंचित की जाएंगी जिसमें श्री देबासीश कुलाहित एवं दल द्वारा खोल बदन, श्री गुरु लिंगोराज बारिक एवं दल द्वारा ओडिशा का गोटीपुआ लोक नृत्य, सुश्री उषा मिश्रा एवं दल द्वारा झारखण्ड का सरायकेला छउ, असोम सांस्कृतिक संस्थान के कलाकारों द्वारा असम का बिहू नृत्य, इंस्टिट्यूट ऑफ मणिपुर परफार्मिंग आर्टिस्ट संस्थान के कलाकारों द्वारा लाई हरोबा नृत्य, श्री कौशिक बोरा एवं दल द्वारा गुवाहाटी का भोर्टल नृत्य एवं उज्जवल कला केंद्र के कलाकारों द्वारा सिक्खिम का मारूनी, घाटू, राई नृत्य एक मंच पर देखने को मिला।
श्रीमती बसु ने जानकारी देते हुए बताया की कलाग्राम एवं संस्कृति कुम्भ के मुख्य मंच 'चलो मन गंगा जमुना तीर' में प्रवेश निःशुल्क है एवं इसी क्रम में शहर के समस्त नागरिकों और कुम्भ मेला में प्रवास कर रहे श्रद्धालुओं एवं सैलानियों को संस्कृति कुम्भ की प्रस्तुतियों को देखने का आवाहन किया।

No comments