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बसंत पंचमी पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब, आज से हो गया बसंत ऋतु का आगाज



प्रातःकाल संवाददाता

कुम्भ/प्रयागराज। शांत, ठण्डी मंद बयार, कटु-शीत को दूर करते हुए बसंत ऋतु, बसंत पंचमी के पर्व से शुरु हो जाती है। प्रकृति के कण-कण में नवप्राण, नवउत्साह, नवउमंग भर जाता है। साथ ही पेड़-पौधों में भी नई कपोलों का उद्भव होना शुरु हो जाता है। बसंत ऋतु एक प्रसिद्ध भारतीय त्योहार है। इस दिन विद्या, बुद्धि और ज्ञान की देवी सरस्वती की पूजा भी बड़े उल्लास के साथ की जाती है। इस ऋतु के आगमन से सर्द का प्रभाव कम होने लगता है, मौसम सुहावना हो जाता है। सरसों के पीले-पीले फूलों से लहलहाती फसल मदमस्त हो जाती है। राग-रंग और उत्सव मनाने के लिए इस ऋतु को ऋतुराज कहा जाता है। तेजस्विनि एवं अनन्त गुण शालिनी सरस्वती देवी की पूजा-आराधना के लिए भी माघ मास की इस पंचमी तिथि की हमारे देश में मान्यता है। बसंत ऋतु के महत्व का वर्णन भारतीय साहित्य में सदियों से महाकवियों, कवियों और विद्वानों द्वारा किया गया है।
धर्म और अध्यात्म की इस दिव्य, भव्य शांत और स्वच्छ कुम्भ नगरी में आज जहाॅ श्रद्धालुओं का जन सैलाब उमड़ा, वहीं 13 अखाड़ों के साधु-संतों ने भी गंगा, यमुना व अदृश्य सरस्वती के संगम तट पर शाही स्नान किया। इस दौरान प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ स्नानार्थियों को सुगमता एवं सरलता के साथ स्नान घाटों तक पहुॅचने के लिए यातायात की खासी रणनीति तैयार की थी और इसके साथ ही घाटों पर स्नानार्थियों की भीड़ एकत्र न हो, उनके वापसी व गन्तव्य तक पहुॅचाने के लिए विशेष व्यवस्था की गयी। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जहाॅ पुलिस के आला अधिकारी स्नान व शाही शोभा यात्रा के दौरान स्वयं उपस्थित रहे, वहीं फोर्स के जवान, पुलिस, वालंटियर्स, मजिस्ट्रेट आदि सचेत रहे।

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