दादा मियां की मजार पर हुई चादरपोशी और प्रदेश में खुशहाली व अमन की मांगी गई दुआ
असद कुरैशी संवाददाता प्रातःकाल
हज़रत शाह मोहिबुल्लाह इलाहाबादी उर्फ दादा मियां का 372 वां सालाना उर्स हर साल की तरह इस साल मनाया गया । नमाज़ ए फज्र के बाद तिलावते क़ुरान फातेहा और चादर पोशी शुरू हुई। हजरत शाह मुकर्रब उल्लाह अली मियां ने कहा कि हिन्दुस्तान की खानकाहें रूहानी पैगाम का दर्स देती हैं। मजार पर मन्नतें मांगने वालों का सुबह से शुरू हुआ तांता देर शाम तक बदस्तूर जारी रहा। उर्स के दौरान चादर पेश करने की पुरानी परंपरा है, आज भी बरसों से चली आ रही है।
दादा मियां दरगाह पर कव्वालों की महफिलों के साथ हल्क-ए-जिक्र में अकीदतमंदों का अल्लाह के करीब होने व उसका महबूब होने की कोशिशें जारी रहीं। सुबह कुरान ख्वानी से उर्स की शुरुआत के बाद दरगाह पर जियारत करने वालों का तांता लगा रहा। दरगाह में रात नौ बजे हल्क-ए-जिक्र के दौरान सदाएं गूंजती रहीं और अकीदतमंद झूमते रहे। इस दौरान दरगाह में लंगर-ए-आम का दौर भी चलता रहा। देर रात शुरू हुई महफिल-ए-समां से दरगाह परिसर पूरी रात गूंजती रही। इस अवसर पर प्रदेश भर से आए जायरीनों ने अपने-अपने कलाम पेश कर दादा मियां को नजराना-ए-अकीदत पेश किया।
हज़रत शाह मोहिबुल्लाह इलाहाबादी उर्फ दादा मियां का 372 वां सालाना उर्स हर साल की तरह इस साल मनाया गया । नमाज़ ए फज्र के बाद तिलावते क़ुरान फातेहा और चादर पोशी शुरू हुई। हजरत शाह मुकर्रब उल्लाह अली मियां ने कहा कि हिन्दुस्तान की खानकाहें रूहानी पैगाम का दर्स देती हैं। मजार पर मन्नतें मांगने वालों का सुबह से शुरू हुआ तांता देर शाम तक बदस्तूर जारी रहा। उर्स के दौरान चादर पेश करने की पुरानी परंपरा है, आज भी बरसों से चली आ रही है।
दादा मियां दरगाह पर कव्वालों की महफिलों के साथ हल्क-ए-जिक्र में अकीदतमंदों का अल्लाह के करीब होने व उसका महबूब होने की कोशिशें जारी रहीं। सुबह कुरान ख्वानी से उर्स की शुरुआत के बाद दरगाह पर जियारत करने वालों का तांता लगा रहा। दरगाह में रात नौ बजे हल्क-ए-जिक्र के दौरान सदाएं गूंजती रहीं और अकीदतमंद झूमते रहे। इस दौरान दरगाह में लंगर-ए-आम का दौर भी चलता रहा। देर रात शुरू हुई महफिल-ए-समां से दरगाह परिसर पूरी रात गूंजती रही। इस अवसर पर प्रदेश भर से आए जायरीनों ने अपने-अपने कलाम पेश कर दादा मियां को नजराना-ए-अकीदत पेश किया।



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