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हज़रत इमाम हुसैन के मदीने से करबला की रवानगी पर दरियाबाद व करैली से निकला क़दीमी मातमी जुलूस" मातमी अन्जुमनों ने पढ़े ग़मगीन नौहे""

सोग़रा को जाके भूल ना जाना मुसाफिरों।""हज़रत इमाम हुसैन के मदीने से करबला की रवानगी पर दरियाबाद व करैली से निकला क़दीमी मातमी जुलूस" मातमी अन्जुमनों ने पढ़े ग़मगीन नौहे"

हज़रत इमाम हुसैन के 28 रजब सन साठ हिजरी को मदीना से करबला की रवानगी पर निकलने वाले क़दीमी जुलूस को मौलाना मो०अक़ील हुसैनी ने खिताब करते हुए कहा की जब हज़रत इमाम हुसैन  मदीने से करबला को रवाना हुए तो बेटी सोग़रा ने अपने बाबा हुसैन से रोते हुए फरयाद की कहा सब भरा घर छोड़ कर जा रहे हैं लेकिन बाबा यह वादा करीये की भय्या अली अकबर मुझे लेने ज़रुर आएंगे।

नन्हा भय्या अली असग़र भी मुझसे जूदा हो रहा है।मैं तनहा कैसे इस उजड़े हुए घर मै रहूंगी।एक एक कर सभी मदीना छोड़ कर करबला को रवाना हो गए।आले रसूल की सय्यदज़ादियों का मदीने से करबला तक ज़िन्दगी का वह पहला सफर था जो 28 रजब से दो मोहर्रम यानी पाँच माह और पाँच दिन मुसलसल जारी रहा जहाँ करबला के मैदान मे रसूल के जाँनिसारों को 10 मोहर्रम को तीन दिन का भूका प्यासा शहीद कर दिया गया।जे के आशियाना मे सफरे करबला के जुलूस की में मजलिस से पहले शुजा हुसैन ने मर्सियाख्वानी तथा हसनैन मुस्तफाबादी,नसीमुल हसन बिसौनवी,कुमैल जाफर,अम्बर वसीम व औन प्रतापगढ़ी ने पेशख्वानी के फराएज़ अन्जाम दिए।

शायर नजीब इलाहाबादी व अनीस जायसी की निज़ामत मे अन्जुमन मज़लूमिया रानी मण्डी,ज़ुलफेक़ारिया क़दीम,मासूमया करैली के नौहा ख्वानों ने ग़मगीन नौहे का नज़राना पेश किया।वहीं दरियाबाद कोठी आग़ा अली खाँ से भी मातमी जुलूस निकला।अन्जुमन हुसैनया क़दीम दरियाबाद,नक़वीया दरियाबाद,अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया बख्शी बाज़ार ने अपने अपने परचम के साथ जुलूस निकाला जो अपने क़दीमी रास्तों से होते हुए देर रात इमामबाड़ा अरब अली खाँ पर पहुँच कर सम्पन्न हुआ।अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया के नौहा ख्वान शादाब ज़मन शबीह अब्बास अस्करी अब्बास,ज़हीर अब्बास,एजाज़ नक़वी,यासिर ज़ैदी,अली रज़ा कामरान रिज़वी आदि ने शायर अनवार अब्बास का लिखा ग़मगीन नौहा :-  *सोग़रा को जाके भूल ना जाना मुसाफिरों*   

*वापस वतन को लौट के आना मुसाफिरो* - 

*क़ासिम भी जाते हैं अली अकबर भी जाते है*

*घर से सकीना बीबी भी असग़र भी जाते*

*घर होता है बग़ैर घराना मुसाफिरो* 

*सोग़रा को जाके भूल ना जाना मुसाफिरो* ...।।।।

जुलूस में बादशाह हुसैन,सै०मो०अस्करी,आसिफ रिज़वी,मेंहदी हसन,राग़िब हसन,सिकन्दर,शकील अख्तर,शाहिद अब्बास,आसिफ अब्बास,शबी हसन आदि मौजूद थे।

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