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बिना एफआईआर के गिरफ्तार हो सकते हैं जीएसटी डिफॉल्टर, जमानत भी नहीं मिलेगी !


सुप्रीमकोर्ट कोर्ट ने बुधवार (29 मई, 2019) को हाई कोर्ट को सलाह दी कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) या जीएसटी कानून का उल्लंघन करने वाले आरोपियों को अग्रिम जमानत नहीं दी जाए। इस दौरान कोर्ट ने ऐसे बकायदारों को जमानत नहीं देने के तेलंगाना हाई कोर्ट के फैसले को भी बरकार रखा। दरअसल तेलंगाना हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने 18 अप्रैल को जीएसटी डिफॉल्टर्स की गिरफ्तारी के लिए केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) आयुक्त के अधिकार और शक्ति को बरकरार रखा था और सीजीएसटी अधिनियम, 2017 के उल्लंघन के आरोपियों के लिए किसी भी अंतरिम राहत को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई को हाई कोर्ट के इसी आदेश के खिलाफ अपील खारिज कर दी थी।          
           मामले में केंद्र ने तर्क दिया था कि सीजीएसटी अधिकारी पुलिस नहीं थे और इसलिए उन्हें आपराधिक प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों का पालन करने की आवश्यकता नहीं थी, जो गिरफ्तारी से पहले एफआईआर के पंजीकरण को अनिवार्य करता है। टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक खबर में इस बात की जानकारी दी गई है। दरअसल केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा पारित आदेशों की एक सीरीज के खिलाफ अपील की थी, जिसने सीजीएसटी अधिनियम के उल्लंघनकर्ताओं को इस आधार पर अग्रिम जमानत दी थी कि सीजीएसटी अधिकारियों ने सीआरपीसी के तहत वारंट के रूप में कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की थी।                            
        बॉम्बे हाईकोर्ट के इन्हीं आदेशों को चुनौती देते हुए सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया तुषार मेहता ने कहा भारतीय संसद ने कहा कि संसद ने सीआरपीसी से सीजीएसटी अधिनियम को अलग कर दिया था और अपराधियों से निपटने के लिए एक अलग प्रक्रिया प्रदान की थी। मेहता ने आगे कहा कि हाई कोर्ट के आदेशों से जीएसटी खुफिया महानिदेशालय के कामकाज में बाधा उत्पन्न हुई है। मामले में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की एक अवकाश पीठ ने सुनवाई करते हुए कहा चूंकि देश के विभिन्न हाई कोर्ट्स ने इस मामले में अलग-अलग विचार रखे हैं, हमारा विचार है कि इस कोर्ट द्वारा कानून में स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
           खबरों के मुताबिक इसके साथ ही पीठ ने हाई कोर्ट्स को इस तरह के मामलों में जमानत देने से पहले उस आदेश को ध्यान में रखने को कहा जिसमें उसने तेलंगाना हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था। दरअसल उस आदेश में तेलंगाना हाई कोर्ट ने कहा था कि इस तरह के मामलों में किसी व्यक्ति को गिरफ्तारी से बचने की छूट नहीं दी जा सकती है। पीठ ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए तीन न्यायाधीशों की पीठ के सुपुर्द कर दिया।

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