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अकीदत व एहतराम से मनाया गया शहीद शाह कुतुब उददीन रहमतुल्लाह अलैहि का सालाना उर्स

अकीदत के आस्ताने पर हर वर्ष हजारों लोग अपनी मनमांगी मुराद पूरी होने पर लंगर और चादरपोशी का एहतराम करते नजर आये। हर तरफ उर्सपाक का जश्न देखने को मिला।यूपी के विभिन्न जिलों से शिरकत करने वाले जायरीनों ने तिलावते र्कुआन, फाहेता और चादरपोशी में अपना ज्यादा तक समय व्यतीत किया। बेसुमार लंगरों ने किसी को शाह कुतुब उददीन रहमतुल्लाह अलैहि के आस्ताने से भूखा नहीं जाने दिया। यही वजह रही की ज्यादातर जायरीन पूरी परिवार के साथ मजार ए अकदस पर तसरीफ लाए। इस्लामिक माह मुहर्रम की 15वीं तारीख को प्रत्येक साल उर्स मनाया जाता है



शकील अहमद मुख्य संवाददाता 
प्रतापगढ:हजरत शहीद शाह कुतुब उददीन रहमतुल्लाह अलैहि का सालाना उर्स रविवार को अकीदत व एहतराम के साथ मनाया गया। इस दौरान सुबह से फातेहा पढ़ने के लिए जायरीनों का रेला उमड़ पड़ा। जबकि शाम के समय अकीदतमंदों की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह बाबा के आस्ताने पर कुरआनख्वानी और तकरीर का हुई। जिसमें तमाम हाफिज व अलीम ए दीन ने शहीदाने कर्बला पर रौशनी डाली।

गुस्ल की रस्म के बाद फातेहा पढ़ने के लिए लोगों के आने का सिलसिला शुरु हुआ तो सोमवार अलसुबह तक बदस्तूर जारी रहा। उर्स कमेटी के सरपरस्तो ने बताया कि रविवार को सुबह से देर शाम तक लगभग 200 लंगर का एहतमाम किया गया गया। आसपास के जिलों से लोग लंगर लंगर लेकर आते है अपनी मुराद पूरी होने पर लोग बडी संख्या में उर्स मुबारक आते है।

बाबा के आस्ताने पर रविवार की शाम के समय गागर शरीफ उठाई गई जो मोहल्ले के विभिन्न रास्तों से होते हुए देर शाम शाह बाबा के आस्ताने पर पहुंचा। उसके बाद तो जायरीनों की भारी भीड़ उमड़ी। जहां अस्थाई रूप से लगाएं गए फूलमाला, चादर व सिरनी की दुकानों से खरीदकर लोगों ने चादर चढ़ाई और फातेहा पढ़ा। वहीं बच्चों ने खिलौना आदि की खरीदारी की। देर शाम महफिल-ए-समां का आयोजन शुरू हुआ। जिसमें कव्वालों ने औलिया-ए-कराम की शान में मनकबत पेश कर जायरीनों को झूमने पर मजबूर कर दिया।


 जवाबी कव्वाली में हिन्दुस्तान के जानेमान कव्वाल शरीफ परवाज लगातार तीसरी बार जीत हासिल कर अपनी हैटिक बनायी। गौरतबल हो कि जिला प्रतापगढ़, तहसील रानींगज स्थित ग्राम शाहपुर-कसिहा उर्स कमेटी के सरपरस्ती में हजरत शहीद शाह कुतुब उददीन रहमतुल्लाह अलैहि का सालाना उर्स हर वर्ष बड़े ही अकीदत व एहतराम के साथ मनाया जाता है। शहर के तमाम मोहल्लों के अलावा गैर जनपद से भी लोग अकीदत लिए फातेहा पढ़ने आते हैं। 

शाह कुतुब रहमतुल्लाह अलैहि का शाहपुर में छठवीं हिजरी में तश्रीफ लाऐ। अगर अधिकारिक रिकार्ड की बात की जाय तो ख्वाजा मोइन उददीन चिश्ती उर्फ गरीब नवाज रहमतुल्लाहि अलैहि की सरपरस्ती में उनके साथ हजरत शाह सदरूददीन रहमतुल्लाह अलैहि सहित दर्जनों औलिया एकराम हिन्दुस्तान आये। इनके दो औलादों में एक हजरत शहीद शाह कुतुब उददीन रहमतुल्लाह अलैहि और दूसरे हजरत शहीद शाह गालिब रहमतुल्लाह अलैहि हुए, जिनकी मजार ए अकदस ग्राम सभा मुआर अधारगंज में है।
तत्पश्चात विभिन्न दिशाओं में जुल्म, जिआदिती, राजाओ, सैनिकों के जुर्म की शिकार जनता की हिफाजत के लिए निकल पडे। इन्ही लोगों में से एक हजरत शाह सदरूददीन रहमतुल्लाह अलैहि ने अवध की कमान सम्हाली।

ऐ किसी से छिपा नही कि प्रतापगढ की जमी अवध की केन्द्रबिन्दु रही। यहां पर कई राजाओं का सम्राट आबाद रहा। बताया जाता है कि उक्त ग्राम सभा का नाम भी बाबा के नाम के प्रथम नाम से ही शाहपुर हुआ, जो आज आबाद, जिन्दाबाद है। इसे प्रतापगढ संसदीय सीट व विधानसभा रानीगंज का सबसे बडा अल्पसंख्यक ग्राम सभा होने का गौरव हासिल है

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