पीएम मोदी की अपील: 21 दिन तक पूरे भारत में लॉक-डाउन, 21 दिनों तक घर में रहें वर्ना
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश भर में बढ़ते कोरोना वायरस के खतरों को देखते हुए आज रात 12 बजे से संपूर्ण देश में संपूर्ण लॉक-डाउन की घोषणा की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हिंदुस्तान के नागरिकों को बचाने के लिए और आपके परिवार को बचाने के लिए ये एक जरूरी फैसला है। ये लॉक-डाउन 21 दिनों यानी 3 सप्ताह तक चलेगा। उन्होंने बताया कि ये एक तरह से कर्फ्यू ही है, जनता कर्फ्यू से जरा ज्यादा सख्त है। कोरोना वायरस से निर्णायक लड़ाई के लिए ये एक जरूरी कदम है।अगर नहीं संभले तो देश 21 साल पीछे चला जाएगा
प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं हाथ जोड़कर प्रार्थना करता हूं कि आप इस समय जहां भी हैं, वहीं रहें। देश के हालात को देखते हुए ये लॉक-डाउन 21 दिन का होगा। आने वाले 3 सप्ताह बहुत महत्वपूर्ण हैं। एक्सपर्ट्स की मानें तो कोरोना वायरस के साइकिल को तोड़ने के लिए 21 दिन लगते हैं। अगर ये 21 दिन नहीं संभले तो देश 21 साल पीछे चला जाएगा।
बाहर निकलना क्या होता है ये 21 दिनों के लिए भूल जाइए
कई बार कोरोना से संक्रमित व्यक्ति बिल्कुल स्वस्थ लगता है। वो संक्रमित है, इसका पता भी नहीं लगता है। इसलिए एहतियात बरतिए और घर में रहिए। प्रधानमंत्री ने अपील की है कि 21 दिन के लिए घर से निकलना भूल जाइए। उन्होंने कहा मैं ये बात एक प्रधानमंत्री के तौर पर नहीं, आपके परिवार के सदस्य के नाते कह रहा हूं। बाहर निकलना क्या होता है, ये 21 दिन के लिए भूल जाइए। आज के फैसले ने, देश व्यापी लॉक-डाउन ने आपके घर के बाहर एक लक्ष्मण रेखा खींच दी है। आपका एक गलत कदम कोरोना जैसी गंभीर बीमारी को आपके घर ला सकता है।

अपने से कोई दवा न लें- सेहत पर पड़ सकती है भारी
मेरी आपसे प्रार्थना है कि इस बीमारी के लक्षणों के दौरान बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा न लें। किसी भी तरह का खिलवाड़ आपके जीवन को और भी खतरे में डाल सकता है। मुझे विश्वास है कि हर भारतीय इस संकट की घड़ी में सरकार के निर्देशों का पालन करेगा। 21 दिन का समय लंबा समय है। मगर ये समय आपके परिवार की रक्षा के लिए और आपकी रक्षा के लिए बेहद महत्वपू्र्ण है। मुझे विश्वास है कि हर भारतवासी इस मुश्किल की घड़ी से विजयी होकर निकलेगा।
सोशल डिस्टेंसिंग है एकमात्र विकल्प
कोरोना वैश्विक महामारी पर पूरी दुनिया की स्थिति को आप देख रहे हैं और सुन रहे हैं। दुनिया के समर्थ से समर्थ देशों को भी कैसे इस महामारी ने बिल्कुल बेबस कर दिया है। ऐसा नहीं है कि ये देश प्रयास नहीं कर रहे हैं, या उनके पास संसाधनों की कमी है। लेकिन कोरोना वायरस इतनी तेजी से फैल रहा है कि तमाम तैयारियों और प्रयासों के बावजूद इन देशों में चुनौती बढ़ती ही जा रही है। इन सभी देशों के 2 महीनों के अध्ययन से जो निष्कर्ष निकल रहा है और एक्सपर्ट्स भी यही कह रहे हैं कि कोरोना वायरस से मुकाबले के प्रभावी उपाय के लिए एकमात्र विकल्प सोशल डिस्टेंसिंग है। कोरोना से बचने का इसके अलावा कोई तरीका, कोई रास्ता नहीं है।
कोरोना के साइकिल को तोड़ना होगा
कोरोना को फैलने से रोकना है, तो उसके संक्रमण के साइकिल को तोड़ना होगा। कुछ लोग इस गलतफहमी में हैं कि सोशल डिस्टेंसिंग केवल बीमार लोगों के लिए आवश्यक है। ये सोचना गलत है। सोशल डिस्टेंसिंग हर नागरिक, हर परिवार, परिवार के हर सदस्य यहां तक कि प्रधानमंत्री के लिए भी है। कुछ लोगों की गलत सोच आपके परिवार और पूरे देश को बहुत बड़ी मुश्किल में झोंक देगी। अगर ऐसी लापरवाही जारी रही, तो भारत को इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। ये कीमत कितनी चुकानी पड़ेगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।

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