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कोरोना महामारी में विज्ञान ही वरदान.....आयुष मिश्रा

आज करो ना महामारी से जूझ रहे हैं जहां विश्व के अधिकांश देशों के लिए जहां सामाजिक दूरी एकमात्र प्रगाण उपचार है वहीं इस वैश्विक महामारी से निपटने के लिए प्रौद्योगिकी विकास एक कारगर हथियार है।
जो चिकित्सा अनुसंधान के साथ-साथ घरों में बंद हो चुके लोगों के लिए भी समय यापन का एक मददगार जरिया भी हो गया है, चिकित्सीय अनुसंधान से आज कोरोना विषाणु के वैक्सीन और एंटीडोट की खोज विश्व के प्रमुख प्रयोगशालाओं मैं जहां प्रथम या इस समय एकमात्र वरीयता हो गई है वही मोबाइल फोन ,टीवी ,इंटरनेट, कंप्यूटर आज विपदा के इस घड़ी में समस्त मानवजन के लिए जीवन यापन का एक साधन हो गया है। जो मनुष्य मस्तिष्क को दिन-प्रतिदिन हो रही भयवाह स्थिति से ध्यान हटाकर वैज्ञानिक तंत्रों पर केंद्रित करने में सहायक है।
संकट के इस घड़ी में भारत  भी विज्ञान का अनुकूलतम उपयोग करके आने वाले कल के लिए नए मार्ग स्थापित कर रहा है, वह चाहे अस्पतालों में आधुनिक उपकरण, वेंटिलेटर की संख्या हो या ऑनलाइन कक्षाओं से बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए जरूरी पाठ्यक्रम। मानव जाति के हर उम्र के लिए किसी ना किसी रूप से विज्ञान वरदान साबित हो रहा है, युवा वर्ग जहां आज विभिन्न मोबाइल ऐप पर  अपने लॉक डाउन में अपनी कार्य प्रणाली को अपडेट और दैनिक जीवन में घटित विभिन्न टास्क को अपलोड कर रहा है वहीं बुजुर्ग टीवी पर हो रहे प्रसारित दैवीय धारावाहिक रामायण और महाभारत से अपनी मानसिक थकान मिटाकर आनंदित हो रहे हैं। यही नहीं हम मनुष्य के जीहवा के महत्वाकांक्षा से आज विज्ञान की पहुंच ओवन आदि उपकरणों से घर की रसोइयों तक हो गई है, जिससे हम सभी विभिन्न पकवानों को पाकर प्रफुल्लित हैं और यह साहस जुटा पा रहे हैं कि हम सभी इस कोरोना जैसी वैश्विक आपदा क्षको परास्त करके रहेंगे। आशा करते हैं विज्ञान के चमत्कारी परिणामों और वरदान से हम सभी विषम से विषम परिस्थिति में भी उम्मीद और मुस्कुराहट सहेज कर रखेंगे।

             आयुष मिश्रा   
 प्रेजिडेंट- युवान फाउंडेशन,
      जनरल सेक्रेटरी- यंग इंडिया यूथ की आवाज़

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