"मस्जिदें बंद है" मौका है आप के पास, कि अपने घरों को इबादतगाह बनाएं... लारैब अहमद नियाज़ी
"मस्जिदें बंद है" मौका है आपके पास, आप अपने घरों को मस्ज़िद बनाएं। हुज़ूर सल्लललाहो अलैहे वसल्लम सिर्फ फर्ज़ नमाज के लिए मस्जिद जाते थे और नमाज अपने हुजरे में अदा करते थे। इसलिए घरों में नमाज अदा करना चाहिए।
रमज़ान हमें सब्र करना सिखाता है। घरों में इबादत करें, दिनों रात इबादत में लगाएं ताकि ये जो आफत हमारे मुल्क और पूरी दुनिया में अाई है उससे बचा जा सके।
लॉकडाउन के कारण, ऐसे श्रमिक जो दैनिक व्यवसाय करते हैं, उनके अलावा समाज के कई लोग वित्तीय सहायता के भी हकदार हैं। सभी का ख़्याल रखें। अपने पड़ोसी का अवश्य ख्याल रखे कि वह भूखा न सोये, ऐसा करना भी इबतात है
अल्लाह तआला से दुआ करें की पूरी दुनिया के बीमार लोगों की हिफाजत करे और बीमार लोगों को इस जानलेवा कोरोना बीमारी से बचाए, जो इस दुनिया से चलें गए अल्लाह तआला उन पर कृपा करे और उन की आत्मा को शांति प्रदान करे।
रमज़ान के महीने में मस्जिदों में अतेकाफ पर बैठते हैं, जिसमें दुनिया की चीजों से दूर सिर्फ अल्लाह की इबादत करनी होती है, लॉकडाउन में ये एक बेहतीन मौका है जब आप अकेले में घर के एक कमरे को अपने इतेकाफ के लिए जगह बना लें।
साल भर के गुनाहों की माफ़ी मांगी जाए, हिन्दुस्तान को नफरतों से बचाने की गुहार अल्लाह से लगाई जाए।
लारैब अहमद नियाज़ी
छात्र, जामिया मिल्लिया इस्लामिया
लारैब अहमद नियाज़ी
छात्र, जामिया मिल्लिया इस्लामिया


No comments