भ्रष्टाचार के आरोप में बार काउंसिल अध्यक्ष व एक अन्य सदस्य को पद से हटाए जाने की हुई मांग, हाईकोर्ट में करोड़ों रुपए ई लाइब्रेरी घोटाले में रिट याचिका हैं दाखिल
भ्रष्टाचार के आरोप में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य को भी हटाने की मांग हुई तेज। बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के एक सदस्य की डिग्री फर्जी होने का भी लगा आरोप हाईकोर्ट में करोड़ों रुपए ई लाइब्रेरी घोटाले में रिट याचिका हैं दाखिल। फर्जीवाड़े की खुली पोल बार काउंसिल उ०प्र० के सदस्यों ने भी उठाया दबाव बनाने का आरोप ।बार काउंसिल के स्टाप ने भी कहा कार्यालय से पत्रावली गायब होने की बात।
वरिष्ठ संवाददाता प्रातःकाल
लखनऊ : बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष जानकी शरण पांडेय पर पद का दुरुपयोग करते हुए, करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप है। जानकी शरण घोटाले में आकंठ डूबे साबित हुए, इनके साथ भ्रष्टाचार के गम्भीर आरोप का रिश्ता चोली-दामन जैसे है। एक नही बल्कि कई प्रामाणिक आरोपों से घिरे जानकी शरण ने भ्रष्टतंत्र के प्रमुख स्तंभ बन गए हैं। इसी भ्रष्टाचार को लेकर उत्तर प्रदेश अधिवक्ताओं में गुफ्तगू तेज हो गई है। मामले में अधिवक्ताओं ने न्यायिक जांच के साथ भ्रष्टाचार व गबन में लिप्त ऐसे मंचासीन पदाधिकारी के खिलाफ हाईकोर्ट रिट याचिका दाखिल की गयी है।
लगे हैं गंभीर आरोप, क्या है मामला
उत्तर प्रदेश बार अध्यक्ष के ऊपर ई-लाइब्रेरी के निर्माण और प्रत्येक जिले में उसकी स्थापना के लिए दोषी पाया गया हैं। कहीं भी ई-लाइब्रेरी नही, कहीं भी लाइब्रेरी नुमा तंत्र नही। महर्षि अगस्त्य मुनि की तरह सम्पूर्ण ई-लाइब्रेरी को पी गए और डकार तक नही ली। उत्तर प्रदेश के पचहत्तर जिलों में बार काउंसिल में ई-लाइब्रेरी का निर्माण ज़मीन पर नही ,काग़ज़ पर सरपट दौड़ाकर मुक्त हो गए तथा निर्माण लागत का पैसा स्वयं पचा कर बैठ गए।
बताते चलें उक्त प्रकरण की शिकायत बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के सदस्य रज्जाक खान आदि द्वारा की गई, तो जांच-पड़ताल के लिए हाईकोर्ट के पूर्व माननीय न्यायाधीशों की कमेटी का गठन किया गया। जिसमें न्यायाधीश शैलेन्द्र सक्सेना आदि के नेतृत्व में जांच करने पर बार काउंसिल अध्यक्ष जानकी शरण पांडेय द्वारा बड़े पैमाने पर घोटाला पाया गया। इस परिप्रेक्ष्य में न्यासी समिति लखनऊ द्वारा हाउस मिटिग में अध्यक्ष जानकी शरण पांडेय के विरुद्ध मुक़दमा पंजीकृत कराकर सख़्त कार्यवाही की मांग पर निर्णय हुआ लेक़िन प्रशासनिक और सत्तासीन पैठ होने के कारण अभी तक उनके ऊपर रंचमात्र कार्यवाही नही की जा सकी है। "सइंया भये कोतवाल तो अब डर काहे का" की उक्ति अध्यक्ष पांडेय द्वारा यथार्थ में चरितार्थ है।
घोटाले के बादशाह जानकी शरण पांडेय व लेखाकार अशोक श्रीवास्तव की दूसरे घोटाले, जिसमें सरकार द्वारा बनाये गए गेस्ट हाउस पर बिना उत्तर प्रदेश शासन के अनुमति तथा बिना बार काउंसिल की हाउस मीटिंग के ही उसको भी तोड़कर उसका पुनः निर्माण कराना कानूनन असंवैधानिक है। इसके बावजूद इसके द्वारा यह सब निरंतर चलता रहा।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य श्री नाथ त्रिपाठी भी हैं दागदार सदस्यों ने भी लगाया दबाव बनाने का आरोप
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य श्री नाथ त्रिपाठी के ऊपर भी गम्भीर आरोप का खुलासा हुआ है। बार काउंसिल में दो नवयुवकों अंकित पांडेय और संचित श्रीवास्तव की नियुक्ति का है। दोनों नवनियुक्त सज्जन क्रमशः रसूखदार तत्कालीन सहायक सचिव सुभाष पांडेय एवं धाकड़ अनुभाग अधिकारी के पुत्र हैं।इस क्रम में कॉउंसिल द्वारा यह भी खुलासा किया गया कि जिन दोनों लोगों की नियुक्तियां की गयी हैं, बड़े पैमाने पर दस दस लाख रुपए लेकर नियुक्ति की गयी हैं तथा न ही मिनट्स न ही बिज्ञप्ति ही निकाली गयी, न ही कोई अन्य फार्म ही आऐ। अबैधानिक ढंग से दोनों नियुक्तियां बार काउंसिल के रिटायर्ड कर्मचारी के पुत्र गणों की गयी हैं।
इधर बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के सदस्यों ने भी श्री नाथ त्रिपाठी के ऊपर गंभीर आरोप लगाया सदस्यों ने कहा कि बार काउंसिल आफ इंडिया के सदस्य द्वारा नियम 40 में अवैधानिक तौर पर लेने का गंभीर आरोप लगाया तथा बिना हाउस मीटिंग के धन निकालने का आरोप लगाते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन से सदस्य को हटाए जाने की मांग की बार काउंसिल के सदस्यों ने लिखित रूप में बताया कि इनके द्वारा सभी सदस्यों के ऊपर फर्जी ढंग से दबाव बनाकर मनमाना कार्य करना चाहते हैं नहीं करने पर बार काउंसिल इंडिया के सदस्य द्वारा यूपी के सदस्यों के ऊपर धमकी भरे शब्दों में कहते हैं कि मेरी कोई नहीं सुनेगा तो मैं बार काउंसिल आफ इंडिया के अध्यक्ष से कह करके कार्रवाई करा दूंगा क्योंकि वह मेरे रिश्तेदार हैं जिससे बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के सदस्यों में भारी आक्रोश व्याप्त है
पत्रावली को ही कर दिया गायब, मिली धमकी
उक्त एक प्रकरण में उच्चन्यायालय की अधिवक्ता श्रद्धा शुक्ला द्वारा यह एक रजिस्ट्रेशन की शिकायत की गई हैं कि, उक्त पत्रावली में सारे फर्जी मार्कशीट लगा कर बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराया गया है लेक़िन उक्त पत्रावली संख्या 7636/1992 की पत्रावली ही बार काउंसिल के कार्यालय से ग़ायब कर दी गयी। उक्त पत्रावली में मानी जाऐ तो सारी डिग्रिया फर्जी है, इतना ही नही उसी प्रकरण में सदस्य देवेंद्र मिश्रा द्वारा धमकी भी दी गईं तथा पत्रकारों को लाठी डंडा लेकर बार काउंसिल में मारने की धमकी दी गई कि यदि इस प्रकरण में अगर मीडिया में खबर प्रकाशित करो गे तो फर्जी मुकदमे में फंसाकर जेल भिजवा दूंगा इतना ही नही शिकायतें बार-बार होतीं रहीं तो बहुत बुरा ख़ामियाजा भुगतना पड़ सकता है। .इतना हक़ इस भ्रष्ट तंत्र में भ्रष्टाचारी को है कि वह पदासीन होकर धौंस भी जमाए, इससे व्यवस्था की पोल खुलती नजर आ रही है।
मामले में क्या कहते हैं अन्य बार सदस्य
हाईकोर्ट की अधिवक्ता श्रद्धा शुक्ला द्वारा मांगी गई है कि उक्त पत्रावली देवेंद्र मिश्र नगरहा की पत्रावली में लगी डिग्रियां फर्जी है उसकी भी जांच करा कर के उपरोक्त को बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश से निकाला जाए इधर यह भी जानकारी है कि देवेंद्र मिश्र नगरहा तथा वर्तमान अध्यक्ष व बार काउंसिल इंडिया सदस्य द्वारा बराबर धमकियां मिल रही है कि सारे मामले को खत्म कर लो नहीं तो तुम्हारे और तुम्हारे पति तथा परिवार के खिलाफ गंभीर आरोपों में फर्जी मुकदमा पंजीकृत करा करके तुम्हें पूरे परिवार सहित बर्बाद कर दूंगा जिसकी शिकायत मुख्यमंत्री इत्यादि जगह दी जा चुकी है
फिलहाल तमाम बार काउंसिल के सदस्यों ने जानकी शरण पाण्डेय अध्यक्ष व बार काउन्सिल इंडिया सदस्य श्री नाथ त्रिपाठी के ऊपर तमाम सदस्यों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग बार काउंसिल ऑफ इंडिया से की है
चार लाख अधिवक्ताओं के साथ कब होगा न्याय
अब देखना यह है कि इन तमाम आरोपों के मद्देनजर बार काउंसिल आफ इंडिया या हाईकोर्ट में क्या कानूनी सज़ा मिलती है? या नही ! समाज और जिम्मेदार ई-लाइब्रेरी समेत नियुक्तियों और तथाकथित अन्य घोटालों की वाज़िब कार्यवाही की माँग की हैं चार लाख संख्या वाले बार कॉउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के अधिवक्ताओं के साथ न्याय होगा भ्रष्टाचार के आरोप की सख़्त कार्यवाही पर अपनी निगाहें लगा कर प्रतीक्षारत है।
आम हो या खास कानूनी हनक सब पर बराबर
संविधान की रक्षा करने वाले ही यदि कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाकर पद का दुरुपयोग करें तो ऐसे भ्रष्टाचारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। भ्रष्टाचारी में संलिप्तता होने के बावजूद कार्रवाई न होना आम और खास के अंतर के दरमियान को बढ़ा रहा है। पद की गरिमा को कलंकित करने वाले खास व्यक्तियों पर भी कानूनी हनक लागू होना चाहिए। तभी न्याय व्यवस्था का एक संदेश समाज में जन जागृत बनकर शोषित वर्ग पर प्रेरणा को स्थापित करेगा। लोग आज भी न्याय व्यवस्था पर भरोसा है !


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