शव दफनाने को लेकर विवाद, भारी पुलिस बल पहुंची हुआ समझौता
भूमि को विवादित बताकर रोका अंतिम संस्कार, दो समुदायों में तनाव की सूचना पर पहुंची पुलिस
मऊआइमा। कब्रिस्तान में शव दफनाने के दौरान पुलिस ने अंतिम संस्कार रोक दिया। मामले को लेकर गांव में तनाव व्याप्त हो गया। आखिरकार पुलिस ने दोनों पक्षों से बातचीत कर मामला सुलझाया।मऊआइमा के बांका जलालपुर में बुधवार सुबह शव दफनाने को लेकर विवाद हो गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को जमीन के विवादित होने का हवाला देकर रुकवा दिया। बांका जलालपुर निवासी डॉक्टर मोहम्मद ईशा उम्र 60 वर्ष का मंगलवार शाम निधन हो गया। बुधवार सुबह सभी प्रक्रिया के बाद परिजन व रिश्तेदार शव को लेकर कब्रिस्तान में दफनाने पहुंचे। शव कब्र में रखने के बाद मिट्टी डाल रहे थे। इस बीच शिकायत पाकर मऊआइमा पुलिस ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया। लोग नहीं माने। गांव के प्रधान ने ग्रामवासियों के कहने पर जमीन पर अंतिम संस्कार करने की शिकायत की थी। दूसरे पक्ष के लोग उस जमीन को मेला मैदान बता रहे थे। शिकायतकर्ता मांग कर रहे थे कि पहले विवाद सुलझ जाए तब अंतिम संस्कार किया जाए। मौके पर क्षेत्राधिकारी सोरांव अमिता सिंह, राम सागर क्षेत्रीय लेखपाल धर्म कंचन, थाना प्रभारी मऊआइमा चंद्रभान सिंह, थाना नवाबगंज, श होलागढ़ थाना सोरांव की फोर्स के साथ पहुंचे। अधिकारियों ने बुद्धिजीवियों के साथ वार्ता करके मामले को सुलह समझौता कराकर अंत में शव को दफन करवाया। मामला दो समुदाय में होने के कारण एक पक्ष से भारतीय जनता पार्टी के मंडल अध्यक्ष शारदा प्रसाद शुक्ला, पंचायत चुनाव प्रभारी प्रकाश चंद्र त्रिपाठी, आदेश पांडेय, शशांक मिश्रा ,मंगला प्रसाद मिश्रा आदि कार्यकर्ता भी किसी प्रकार का विवाद ना हो सके इसलिए मौजूद रहे। दोनों पक्षों ने सहमति से शव दफन करवाया।


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