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varanasi : निर्जला एकादशी पर पहली बार काशी विश्वनाथ को नहीं चढ़ेगा गंगाजल, नदी के दूषित होने के कारण दूध से होगा अभिषेक


वाराणसी। निर्जला एकादशी पर गंगा-कलश यात्रा में काशी विश्वनाथ का गंगा जल से अभिषेक की जगह दुग्धाभिषेक किया जाएगा। ऐसा गंगा जल के संक्रमित होने की आशंका से किया जा रहा है। यह निर्णय शनिवार को आयोजक संस्था सुप्रभातम् की बैठक में किया गया।

निर्जला एकादशी पर बाबा को देश की समस्त नदियों के अलावा मारीशस के शिव सरोवर, नेपाल की बागमती और चित्रकूट के पवित्र कूप का जल भी बाबा को अर्पित करने की परंपरा रही है लेकिन कोविड को देखते हुए इस वर्ष बाबा को सिर्फ दूध अर्पित किया जाएगा।

आयोजन सचिव जगदंबा तुलस्यान ने कहा कि शैवालों के कारण हरे और प्रदूषित हो चुके जिस गंगा जल का हम आचमन नहीं कर सकते, उसे बाबा को कैसे अर्पित कर सकते हैं। इसलिए आयोजन समिति के संरक्षक उमाशंकर अग्रवाल, केशव जालान, मुकुंदलाल टंडन, गोपाल गोयल की मौजूदगी में सर्वसम्मति से जलाभिषेक न करने का निर्णय हुआ है।

21 जून को निकाली जाने वाली 24वीं वार्षिक कलश यात्रा में कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करते हुए मात्र 25 सदस्य प्रात: साढ़े सात बजे आरपी घाट से विश्वनाथ मंदिर रवाना होंगे। इस वर्ष यात्रा का नेतृत्व काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी करेंगे। श्री काशी मोक्षदायिनी सेवा समिति के पदाधिकारी पवन चौधरी की अगुवाई में संपूर्ण व्यवस्था संभालेंगे। 

उन्होंने बताया कि वर्ष 1998 में आरंभ श्रीकाशी विश्वनाथ वार्षिक कलशयात्रा में काशी के विभिन्न धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक एवं व्यापारिक संगठनों के लोग 1008 कलशों में भरे गंगाजल से बाबा विश्वनाथ का अभिषेक करते थे। गत वर्ष लॉकडाउन के कारण यात्रा स्थगित करनी पड़ी थी। 

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