वैदिक मंत्रोच्चार कर महर्षि भारद्वाज # Maharishi Bharadwaj की भव्य प्रतिमा को धारण कराया जनेऊ
भारद्वाज पार्क में निःशुल्क के नाम पर लूट, एक आरटीआई में हुआ खुलासा : नगर निगम प्रयागराज ने एक आरटीआई के जवाब में कहा कि भारद्वाज आश्रम में नगर निगम द्वारा कोई चार्ज नहीं लिया जाता। लेकिन भारद्वाज पार्क के निर्माण, रखरखाव, सौन्दरीकरण के लिए मेसर्स राहुल सिंह को 5 साल के लिए आवंटित किया गया। इसके साथ ही नगर निगम ने अपने जवाब में यह भी कहा कि फर्म द्वारा यूजर चार्ज लिया जाता है लेकिन नगर निगम को विगत कई वर्षो से भारद्वाज पार्क से कोई भी आय नहीं हुई है। इससे साफ है कि नगर निगम अधिकारियों की मिली भगत से विभाग को कई लाखों का नुकसान हुआ है और भारद्वाज आश्रम के रखरखाव के नाम पर फर्म द्वारा अवैध वसूली की जा रही है। नगर निगम के अधिकारी अगर साफ भारद्वाज आश्रम पर साफ नजरिया रखते होते तो फर्म को वसूल के लिए पूरी छूट कभी नहीं देते, कि फर्म जितना चाहे आने वाले श्रद्धालुओं, पर्यटकों से वसूले। बता दें कि भारद्वाज आने वालों से प्रतिव्यक्ति 10 रुपये और बच्चों के लिए 5 रुपये का टिकट लेने के पश्चात ही अन्दर जाने दिया जाताा है।
प्रातःकाल एक्सप्रेस
प्रयागराज। महर्षि भारद्वाज पार्क तो आप गए ही होंगे और इनके बारे में बखूबी जानते भी होंगे क्योंकि इनके साथ रामकथा जुड़ी है। पुराणों में उल्लेख है कि वनवास के लिए चित्रकूट जाते वक्त श्री राम और लक्ष्मण ने प्रयागराज में महर्षि भरद्वाज से उनके आश्रम आकर आशीर्वाद लिया था। उनके नाम पर ही यह पार्क स्थापित किया गया था। महर्षि भरद्वाज को प्रयागराज का प्रथम नागरिक कहा जाता है क्योंकि यह भी पुराणों में है कि उन्होंने ही प्रयागराज नगरी को बसाया था। प्रयागराज में सबसे बड़े गुरुकुल (विश्वविद्यालय) की स्थापना की। उन्हीं भरद्वाज मुनि की प्रतिमा को मंगलवार दोपहर अधिवक्ता और भाजपा नेता विजय कुमार द्विवेदी समेत अन्य तमाम नागरिकों ने 11 ब्राह्मणों के द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जनेऊ धारण कराया।
सनातन परंपरा के हस्ताक्षर हैं मुनि भरद्वाज
बालसन चैराहा स्थित भारद्वाज पार्क का सुंदरीकरण दो साल पहले कुंभ से पहले कराया गया था। तभी यहां महर्षि भरद्वाज की 30 फुट ऊंची और 12 टन वजनी प्रतिमा भी स्थापित की गई थी। इस भव्य और विशाल प्रतिमा का अनावरण जनवरी 2019 में किया गया था। भाजपा नेता विजय द्विवेदी का कहना है कि भरद्वाज मुनि की प्रतिमा को प्रतीकात्मक रूप से जनेऊ नहीं धारण कराया गया था। इसी वजह से यह निर्णय लिया गया किया कि प्रतिमा को जनेऊ धारण कराया जाएगा। प्रयागराज धर्म संस्कृति और सनातन परंपरा की नगरी है। इसकी पहचान ऋषियों की तपोभूमि के रूप में है। ऐसे में सनातन परंपरा के हस्ताक्षर महर्षि भरद्वाज को जनेऊ धारण कराकर इस परंपरा को आगे बढ़ाया गया। यह भी मांग की गई कि बालसन चैराहे का नाम महर्षि भरद्वाज चैराहा किया जाए। कार्यक्रम की अगुवाई कर रहे विजय द्विवेदी ने कहा कि हमारी परंपरा में साधु-संतों क्रांतिकारी और बलिदानियों से प्रेरणा लेकर उनके आदर्शों का पालन करना रहा है। उनके विषय में समाज के नौजवानों को बताना और प्रेरित करने का काम यहां होता रहा है। महर्षि भरद्वाज प्रयागराज की शान रहे हैं। ऐसे में उनका सम्मान करना हर प्रयागराज वासी का कर्तव्य है और हम इस कर्तव्य को निभाते रहेंगे।
निःशुल्क किया जाए पार्क में प्रवेश और बने संग्रहालय
द्विवेदी ने प्रदेश सरकार से यह भी अनुरोध किया है कि भरद्वाज आश्रम में प्रवेश निशुल्क किया जाए और महर्षि भरद्वाज से संबंधित संग्रहालय की स्थापना कराई जाए जिससे प्रयागराज के नवयुवक उनके बारे में गहराई से जानकर उनका अनुसरण कर सकें। मंगलवार को जनेऊ धारण कराने के कार्यक्रम में राजेश पांडेय, मनोज दुबे, राजेन्द्र तिवारी, अभय पांडेय, दीपक मिश्रा, श्याम बिहारी तिवारी, केशव चंद्र द्विवेदी, डा. सीपी शर्मा, आलोक दुबे, अनुराग उपाध्याय, सौरभ पांडेय, अंकित द्विवेदी, आशीष मिश्रा, मनीष पाण्डेय, धनंजय त्रिपाठी, ऋषभ तिवारी, आकाश दुबे, अखिलेश कुमार, प्रवीण तिवारी, नमन श्रीवास्तव, शिवम तिवारी, संदीप द्विवेदी, शुभ त्रिपाठी, आदित्य सिंह, आशुतोष मिश्र, हरिओम त्रिपाठी, अमन मिश्र, करन शुक्ला, अरविंद गिरी, शिवम मिश्रा, अनिल पांडेय, गौरव चैबे, प्रमोद मिश्रा, सोनू पाठक आदि मौजूद रहे। पंडित दीपू शास्त्री द्वारा पूजन कार्य सम्पन्न कराया गया।




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