रोजगार को चुनावीं मुद्दा बनाने और भाजपा हराओ अभियान के लिए सोशल मीडिया कम्पेन मंगलवार से चलायेगे प्रतियोगी छात्र
विपक्ष से भी पूंछा कि सरकार बनने पर रोजगार के सवाल का कैसे हल निकालेंगें
प्रातःकाल एक्सप्रेस
प्रयागराज। योगी सरकार से प्रदेश में 5 लाख रिक्त पदों पर विज्ञापन की उम्मीद और भयावह रोजगार संकट के हल की उम्मीद छोड़ चुके नौजवानों के सामने रोजगार को लेकर चिंता बढ़ गई है । 5 साल तक फर्जी आंकड़ों का प्रोपेगेंडा और हवाहवाई घोषणाएं कर महज सुर्खियां बटोरने का काम योगी सरकार ने तो किया ही लेकिन प्रदेश में योगी राज में 1.37 लाख बर्खास्त किये गए शिक्षक समेत सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के सापेक्ष भी नयी भर्ती नहीं किये जाने से कर्मचारियों की संख्या में कमी आई है। लघु, सूक्ष्म व मध्यम उद्योगों में 2.61 करोड़, मनरेगा में 1.50 करोड़, स्किल मैपिंग में 40 लाख रोजगार सृजन के दावे जमीनी हकीकत से अलग है। सच्चाई यह है कि प्रदेश में रोजगार संकट चरम पर है, यही वजह है कि बी०एड०,बी टी सी, डीएलएड, एमटेक, बीटेक, एमसीए, पीएचडी डिग्री हासिल करने वाले युवा भारी संख्या में 5-6 हजार रुपये मानदेय की नौकरियों के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।
बी०एड०उत्थान जन मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष संगीता पाल सहित, बीटीसी संयुक्त मोर्चा के संजय तिवारी, उच्च शिक्षा संघर्ष मोर्चा चंद्रेश कुमार आदि ने भाजपा के घोषणापत्र में सभी रिक्त पदों को भरने, चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार-भाईभतीजावाद खत्म करने आदि जो सामिल थे महज पूरे नहीं किए जा सकें क्या सपा प्रमुख अखिलेश यादव या फिर अन्य सभी पार्टियां अपने चुनावी घोषणा पत्र में रोजगार के लिए की गई घोषणाओं को पूरा करेगी या नहीं। श्री सिंह ने कहा कि अब 97 हजार शिक्षक भर्ती, 27 हजार टीजीटी पीजीटी, 12 हजार एलटी, 52 हजार पुलिस, समूह ग के 50 हजार पद, उच्च प्राथमिक विद्यालयों के बीपीएड शिक्षकों के 48 हजार, तकनीकी संवर्ग आदि किसी के भी चयन प्रक्रिया शुरू होने के आसार नहीं हैं। यह युवाओं के साथ वादाखिलाफी और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है। ऐसे में अब प्रदेश भर के युवाओं के सामने भाजपा हराओ अभियान के अलावा कोई कोई विकल्प नहीं है दरअसल यह इसलिए जरूरी है जिससे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाली भाजपा व योगी सरकार को सबक सिखाया जा सके, साथ ही भविष्य में कोई भी सरकार इस तरह युवाओं के हितों की अनदेखी करने की जुर्रत न कर सके। रोजगार के सवाल को चुनावीं मुद्दा बनाने में पूरी ताकत झोंक दी जाएगी। कहा कि 4 महीने से अनवरत जारी रोजगार आंदोलन चलाने के बाद भी रोजगार के सवाल पर अमल नहीं किया गया। युवाओं ने विपक्ष खासतौर पर अखिलेश यादव से भी पूंछा कि उनकी सरकार बनने पर रोजगार के सवाल को कैसे हल करेंगे, उनकी रोजगार नीति क्या है, प्रदेश में 5 लाख रिक्त पदों को कितने दिनों में विज्ञापित कर भरने की कवायद शुरू होगी और कितने नये पदों का सृजन कर सरकारी नौकरी देने की योजना है युवाओं के मन मस्तिष्क में इस सवाल को लेकर ऊहापोह बना हुआ है।

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