नर्सो की लापरवाही मरीजों के लिए बनी बवाले जान, बेड पर तडपते हैं रोगी, मौज करती हैं सेविकाएं
प्रयागराज। उंची दुकान फीका पकवान। यह जुमला मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज के
अधीन संचालित स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय पर सटिक बैठता है। जी हाॅ,
यहां पर जिस उम्मीद के साथ मरीज अपने इलाज के लिए यहां आता है, मोटी पगार
पाने वाली नर्से तथा इनके अधिकारी व पदाधिकारी गलाघोंट कर अपने आवासों या
किसी अन्य स्थानों पर ड्यूटी अवधि में मौंज करती है। हैरानी तो इस बात की
है कि जो मरीज इसकी शिकायत शासन, प्रशासन या चिकित्सालय के उच्चाधिकारियों
से करने की बात करता है उसकी या तो खातिरदारी कर दी जाती है या फिर
अनावश्यक दबाव बनाने का प्रयास भी किया जाता है। कुछ इसी तरह का नजारा बीते
शनिवार, रविवार, सोमवार की रात में देखने को मिला।
प्रातःकाल एक्सप्रेस
गौरतलब है कि मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज के अधीन व संपूर्ण निगरानी में संचालित है स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय। गंभीर बीमारियों के मरीजों की बढती संख्या को देखते हुए विगत डेढ दशक से इसे एम्स जैसा बनाने की चर्चा राजनीतिक और सत्ता के गलियारों में होती आ रही है। पर हैरानी की बात मरीजों की देखरेख की जिम्मेदारी जिन हेल्थ वर्करों पर है वे अपने उत्तरदायित्वों के प्रति जरा भी गंभीर नहीं हैं। चिकित्सक जिन मरीजों को सर्जरी या इसी तरह की सेवाएं देकर मरीज को भर्ती करने की इजाजत देता है उसको मौत के मुंह तक ले जाने की पूरी कोशिश नर्सो के द्वारा की जाती रही है। इसी तरह की शिकायतों की सच्चाई जानने के लिए जब चिकित्सालय का रूख रात में किया तो रूह को कंपा देने वाली स्थिति सामने आने लगी। सर्वप्रथम स्पेशल प्राइवेट वार्ड की ओर रूख किया गया जो अस्पताल के पुराने भवन में स्थित मुख्य चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय से सटा हुआ है। इस वार्ड में जाने का रास्ता प्रशासनिक विंग के गलियारे से होकर गुजरता है। यहीं पर मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य का कक्ष भी है। स्पेशल वार्ड के कक्ष संख्या 3 में हार्निया के मरीज अश्वनी कुमार श्रीवास्तव 26 फरवरी को भर्ती जिनका आपरेशन 28 फरवरी दिन सोमवार को हुआ। हुए। आपरेशन से पूर्व आनन फानन में ग्लूकोज लगाकर इंजेक्शन न लगाये जाने की बातों पर पर्दा डाल दिया गया। इसी तरह की परिस्थिति से स्पेशल वार्ड के कक्ष संख्या चार के मरीज व परिजनों को गुजरना पडा। कक्ष संख्या तीन के मरीज ने बताया कि सर्जरी के बाद देर शाम तक तीन बार चिकित्सक आये और हर बार रात 9 बजे तक पेन किलर इंजेक्शन, एंटोबायोटिक व इसी तरह के अन्य इंजेक्शन हर हाल में लगवा लेने की नसीहत देकर चले गये।
मरीज नर्से की राह देर रात तक देखने के साथ ही दर्द से कराहता रहा। मामले
की जानकारी होने पर मौके पर पहुंचे चतुर्थश्रेणी कर्मचारी संघ स्वरूपरानी
के अध्यक्ष मनोहर पहुंचे और उप प्रधानाचार्य को अवगत कराया कि कोई भी नर्से
स्पेशल वार्ड में नहीं आयी है। इसके साथ ही र्निसंग सुपरिटेंडेंट राधिका
गुपता, सिस्टर इंचार्ज उर्मिला को भी अवगत कराया गया। पर किसी के कानों पर
जूं तक नहीं रेंगी। कक्ष संख्या चार के मरीज भी पूरी रात तडपता रहा। यहीं
नहीं चिकित्सालय का ही कर्मचारी अरविन्द को बाहर जाकर इंजेक्शन लगवाना पडा।
यहीं नहीं अन्य वार्डो के मरीजों का हाल भी कमोवेश एक जैसा ही रहा। हैरान
करने वाली बात तो यह है कि जब मरीजों ने इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से
करने की बात आज मंगलवार को सुबह की तो नर्सेज संघ की अध्यक्ष साफिया खातून
आधा दर्जन से अधिक नर्सो के साथ स्पेशल प्राइवेट वार्ड पहुंच गई और दोषियों
के बचाव में हल्ला मचाने लगी। इसकी शिकायत मरीजों ने उप प्रधानाचार्य डाॅ
बीके पाण्डेय से की तो वे हल्की फटकार लगाते हुए चलते बने। अन्य वार्डो के
मरीजों ने बताया कि रात में कोई भी नर्स नहीं रहती है। जो रहती भी है, वे
अपने कार्यो की खानापूर्ति करके चुपके से गायब हो जाती है और सुबह प्रकट हो
जाती हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डाॅ अजय सक्सेना कहा कि मामला संज्ञान में
आया है। इसकी सच्चाई जानने के बाद दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्यवाही की
जाएगी। प्रधानाचार्य डाॅ एसपी सिंह ने कहा कि यदि ऐसी बात है तो स्थिति
दुःखद है, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही की जाएगी। साफिया खातून, राधिका
गुप्ता, उर्मिला से वार्ता करने की कोशिश मोबाइल नम्बरों पर की गई, पर नो
रिस्पांश का उत्तर मिला।

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