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मुख्यमंत्री योगी के घर गोरखपुर में मासूम बच्चों की मौत का सच पढ़िए...........

 घटना से पहले मुख्यमंत्री का हॉस्पिटल में दौरा और उस बीच ऑक्सीजन की सप्लाई का कांट्रेक्ट ख़त्म रहना। फर्म द्वारा चेतावनी देना और मंडलायुक्त द्वारा ऑक्सीजन की सप्लाई जरी रखने का आग्रह करना तथा फर्म को बकाया  भुगतान और रिन्युअल नहीं देना कही न कही बड़ी घूसखोरी की डिमांड की ओर इशारा करता है।  यह जानते हुए भी की प्रत्येक दिन सैकड़ों जिंदगी इस ऑक्सीजन पर चलती है। ऐसा क्यों किया गया। इस पर कोई मुह खोलने को तैयार नहीं है। 

गोरखपुर के बी आर डी मेडिकल कॉलेज में आक्सीजन की कमी से हुई मासूम बच्चों की मौत पर सरकार लीपापोती में लगी । वही ऑक्सीजन की सप्लाई करने वाली फर्म ने अस्पताल को ऑक्सीजन की सप्लाई करने का कॉन्ट्रेक्ट मार्च में ही समाप्त होने की बात कहकर शासन प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है बताया जा रहा है कि उसके बाद तमाम प्रयासों के बावजूद कॉन्ट्रेक्ट को रिन्यू नहीं किया गया। 
सप्लाई कंपनी पुष्पा सेल्स कंपनी के मालिक परवीन मोदी ने वर्तमान में किसी टेंडर की बात को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने मीडिया से बातचीत में बताया कि अस्पताल के साथ उनका करार मार्च में ही समाप्त हो गया हैं।  और इसे फिर से रिन्यू नहीं किया गया, उन्होंने कहा कि जब तक नए टेंडर की औपचारिकताएं पूरी नहीं हो जातीं, तब तक सप्लायर को बिना किसी रुकावट के इसे जारी रखने के लिए कहा जाता है। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया है।हग

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निलंबन से पहले ही बीआरडी मेडिकल कालेज के प्राचार्य ने पद से दे दिया था इस्तीफा, कहा बच्चों की मौत से आहत हूं  
http://www.pratahkalexpress.in/2017/08/blog-post_63.html?m=1

यह भी जानकारी में आया है क़ि.....

डॉ कफ़ील बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में पिछले छ: महीने से अवकाश पर हैं। स्वयं का बच्चों का अस्पताल चलाते हैं जो गोरखपुर का सबसे बड़ा प्राईवेट अस्पताल है। पर्चेज़ कमेटी के इंचार्ज भी हैं। अच्छी तरह जानते थे कि पुराने भुगतान नहीं करने के कारण ऑक्सीजन नहीं मिल रही है और तब भी बड़ी मशीन ख़रीदते रहे और ऑक्सीजन की ख़रीद पर आँखें बंद रखीं।  जो जाँच का विषय है

गौर करने वाली बात यह है कि योगी सरकार आने के बाद पुष्पा सेल्स से कॉन्ट्रेक्ट खत्म कर  इलाहाबाद के इंपीरियल गैस के साथ किया गया हैं।
परवीन ने बताया कि अस्पताल पर अभी तक उनका 20 लाख रुपए बकाया है।  इसके बावजूद मंडलायुक्त के अनुरोध पर शुक्रवार को लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई की गई थीं। उन्होंने कहा कि मैंने ऐसा सिर्फ मानवता के नाते किया था।  उन्होंने उन मीडिया खबरों को नकार दिया जिसमें कहा गया कि बकाये के कारण आक्सीजन सप्लाई रोक दी गयी थीं। खास बात यह है कि परवीन ने इसके बावजूद मंडलायुक्त गोरखपुर के अनुरोध पर 200 गैस सिलेंडर की सप्लाई दी हैं।
राज्य सरकार के लिए इससे अधिक शर्मिंदगी क्या हो सकती है जब यह बात सामने आई कि केंद्रीय ऑक्सीजन पाइपलाइन संयंत्र के स्टाफ ने अस्पताल के बाल चिकित्सा विभाग के प्रमुख को ऑक्सीजन स्टॉक के बारे में चेतावनी दी गयी थी। उन्होने अपनी चेतावनी में बच्चों को होने वाली आक्सीजन कि समस्या से अवगत कराया था। लेकिन उनकी चेतावनी को दरकिनार कर दिया गया। जिसका अंजाम 60 से अधिक बच्चों को अपनी जान खोकर गवानी पड़ी।
ऐसे में मुख्यमंत्री के औचक निरीक्षण और समीक्षा बैठक को लेकर सवाल उठने लगे हैं।


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