लोकसभा उपचुनाव : फूलपुर में एक बजे तक 19.20 और गोरखपुर में 30.20 फीसद मतदान
लखनऊ । उत्तर प्रदेश की दो बेहद महत्वपूर्ण मानी जाने वाली गोरखपुर तथा फूलपुर लोकसभा उपचुनाव के लिए आज मतदान हो रहा है। दोपहर में एक बजे तक मतदान ने रफ्तार पकड़ ली है। दिन में एक बजे तक गोरखपुर में 30.20 फीसद तथा फूलपुर में 19.20 प्रतिशत मतदान हो गया। इस तरह एक बजे तक कुल 24.70 प्रतिशत वोट पड़ गए थे। सभी जगह कड़ी सुरक्षा में शांति पूर्वक मतदान हो रहा है।
गोरखपुर लोकसभा में एक बजे तक 30.20 फीसदी मतदान।
गोरखपुर में भी चुनाव को लेकर जिला प्रशासन की तैयारियों की पोल खुलती गई। कई बूथों पर ईवीएम खराब हो गई। इनको बदलने के बाद मतदान प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। दो घंटे में बेहद धीमा मतदान आज रविवार होने का संकेत दे रहा था। इसके बाद वोटर घर से निकले। जहां सात से नौ बजे के बीच में इलाहाबाद के फूलपुर में केवल 4.8 फीसदी मतदान हुआ। शहर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र के मतदान केंद्रों पर सन्नाटा पसरा था। शहर उत्तरी में केवल 1.8 फीसदी मतदान हुआ।
लोकसभा के उप चुनाव के दौरान पहले दो घंटे में मतदान बेहद धीमा रहा। मतदाताओं पर आज रविवार का असर काफी भारी दिख रहा था। सात से नौ बजे के बीच में इलाहाबाद के फूलपुर में केवल 4.80 फीसदी मतदान हुआ। शहर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र के मतदान केंद्रों पर सन्नाटा पसरा था। शहर उत्तरी में केवल 1.8 फीसदी मतदान हुआ।
फूलपुर लोकसभा सीट पर एक बजे तक 19.20 फीसदी मतदान।घ
इलाहाबाद के फूलपुर लोकसभा उपचुनाव के लिए 838 मतदान केंद्रों पर 2155 बूथ बनाए गए हैं। यहां आज करीब 19,63,543 लाख मतदाता फूलपुर उपचुनाव में किस्मत आजमा रहे उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। यहां पर प्रशासनिक व्यवस्था बेहद चुस्त दुरुस्त है।
गोरखपुर लोकसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव की शुरुआत काफी धीमी रही। सुबह के पहले 2 घंटे में नौ बजे तक सभी पांच विधानसभा सीटों पर मात्र 6.80 फीसद मतदान हो सका है। विधानसभावार कितना प्रतिशत मतदान हुआ है कंट्रोल रूम इसकी सूचना एकत्र कर रहा है। सहजनवा, पिपराइच और कैंपियरगंज के कुछ बूथों पर ईवीएम में खराबी के चलते इसे बदलना या ठीक करना पड़ा है। इसके चलते कुछ जगहों पर मतदान देर से शुरू हुआ है। अभी तक कहीं से भी किसी तरह के विवाद या झड़प की सूचना कंट्रोल रूम को नहीं मिली है। जिला निर्वाचन अधिकारी, प्रेक्षक और सभी मजिस्ट्रेट अपने अपने क्षेत्र में दौरा कर रहे हैं। विधानसभावार मतदान का प्रतिशत अभी थोड़ी देर में उपलब्ध कराया जाएगा।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रिक्त सीट गोरखपुर तथा उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की रिक्त सीट फूलपुर लोकसभा क्षेत्र में आज मतदान के साथ ही इन दो दिग्गजों के लिए भी काफी अहम दिन है। सीएम योगी आदित्यनाथ तूफानी दौरे के बाद कल देर शाम गोरखपुर पहुंच गए हैं। वह भी आज मतदान करेंगे। मतदान को लेकर सभी तरह की तैयारियां पूरी है। इन दोनों जगह पर सात बजे से मतदान शुरू हो गया है, जो कि शाम पांच बजे तक चलेगा।
गोरखपुर में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं। जहां 970 मतदान केंद्रों व 2141 मतदेय स्थलों पर मतदान सुबह सात बजे से शुरु हो गया है। इसी तरह इलाहाबाद के फूलपुर में इलाहाबाद जिले की कुल पांच विधानसभा सीटें हैं। जहां 793 मतदान केंद्रों व 2059 मतदेय स्थलों पर मतदान सुबह सात बजे से शुरु हो गया है। फूलपुर लोकसभा क्षेत्र में आने वाली इलाहाबाद पश्चिमी विधानसभा सीट के 45 मतदान केंद्र व 95 मतदेय स्थल कौशाम्बी जिले में आते हैं।
इलाहाबाद के फूलपुर लोकसभा क्षेत्र के उपचुनाव में 2155 में 1820 पोलिंग बूथ पर केंद्रीय अद्र्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। आज यहां पर 19.63 लाख मतदाता 22 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला लिखेंगे।
गोरखपुर सदर संसदीय सीट पर हो रहे उपचुनाव में 19.49 लाख मतदाता आज मतदान करेंगे। शहर में सर्वाधिक 4.34 लाख जबकि सहजनवा में सबसे कम 3.57 लाख मतदाता हैं। इनमें आठ लाख से अधिक महिलाएं हैं।
इन दोनों ही सीटों पर भाजपा, सपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला होने की संभावना है। बसपा ने उपचुनाव में प्रत्याशी नहीं खड़े किए हैं। भाजपा ने गोरखपुर से उपेंद्र दत्त शुक्ला को और फूलपुर सीट से कौशलेन्द्र सिंह पटेल को उम्मीदवार बनाया है। सपा ने गोरखपुर से प्रवीण निषाद और फूलपुर से नागेन्द्र सिंह पटेल को मैदान में उतारा है। कांग्रेस ने गोरखपुर से सुरहिता करीम व फूलपुर से मनीष मिश्र को टिकट दिया है।
संवेदनशील सीट होने की वजह से इस उपचुनाव के लिए सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम हैं। केंद्रीय पुलिसबलों समेत राज्य की पुलिस और पीएसी की तैनाती की गई है। गोरखपुर संसदीय सीट न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी बल्कि सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए भी साख की लड़ाई है। मुख्यमंत्री चुने जाने के बाद योगी आदित्यनाथ ने बतौर सांसद गोरखपुर लोकसभा सीट से अपना इस्तीफा दे दिया था। गोरखपुर संसदीय क्षेत्र में कुल पांच विधानसभा क्षेत्र हैं। यहां उपचुनाव के लिए 970 मतदान केंद्रों पर मतदान हो रहा है। कुल 10 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, लेकिन इस सीट पर कड़ा मुकाबला भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच ही माना जा रहा है।
गोरखपुर लोकसभा सीट पर आज हो रहा उपचुनाव अपने आप में काफी ऐतिहासिक है। इस उपचुनाव के लिए समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी जैसी धुर विरोधी पार्टियां बीजेपी के खिलाफ एक साथ खड़ी हो गई हैं। भाजपा ने गोरखपुर से उपेंद्र दत्त शुक्ला को अपना उम्मीदवार बनाया है। उपेंद्र दत्त शुक्ला की पहचान पूर्वांचल में ब्राह्मण चेहरे के रूप में होती है। समाजवादी पार्टी ने उनके खिलाफ निषाद समुदाय से आने वाले पार्टी के नेता प्रवीण निषाद को मैदान में उतारा है। बहुजन समाज पार्टी ने इस उपचुनाव में अपने उम्मीदवार खड़ा नहीं किया है। बसपा ने यहां पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को अपना समर्थन दिया है। ऐसे में लड़ाई सीधे-सीधे बीजेपी बनाम सपा-बसपा गठबंधन की हो सकती है। कांग्रेस फिलहाल किसी गठबंधन का हिस्सा बने अकेले इस उपचुनाव में लड़ रही है। कांग्रेस ने गोरखपुर से डॉ सुरहिता करीम को टिकट दिया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से पांच बार सांसद चुने जा चुके हैं। इस सीट पर 29 वर्ष से भी ज्यादा समय तक गोरखनाथ मंदिर का प्रभाव देखा जाता रहा है। इस बार सपा और बसपा के गठबंधन ने जातीय समीकरण को काफी मजबूत कर दिया है। सपा के निषाद समुदाय के उम्मीदवार और गोरखपुर के पांचों विधानसभाओं में दलितों की मजबूत संख्या भाजपा के लिए सर दर्द साबित हो सकती है। योगी आदित्यनाथ से पहले उनके गुरु महंत अवैद्यनाथ भी इस सीट से तीन बार सांसद चुने गए थे। गोरखपुर उपचुनाव के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जमकर प्रचार किया।
सपा व बसपा ने गोरखपुर में जातीय समीकरण को साधने की कोशिश की है। गोरखपुर के कुल 19.49 लाख मतदाताओं में निषाद वोटरों की संख्या करीब तीन लाख है। यादव मतदाताओं की संख्या दो लाख से ज्यादा है। पिछड़ों और दलितों के वोटरों की संख्या जोड़ ली जाए तो भाजपा को इस सीट पर कड़ी टक्कर मिल सकती है। 2014 के लोकसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ 52 फीसदी से ज्यादा वोट लेकर गोरखपुर से सांसद चुने गए थे।
दरअसल फूलपुर और गोरखपुर उपचुनाव को सीधे-सीधे उत्तर प्रदेश की आने वाले समय की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। सपा और बसपा के इस गठबंधन के इस टेस्ट का नतीजा 2019 के आम चुनाव में दोनों पार्टियों के गठबंधन के भविष्य पर फैसला सुनाएगा। इस चुनाव को योगी आदित्यनाथ की सरकार और सूबे में उसके असर से भी सीधा-सीधा जोड़कर देखा जाएगा।
गोरखपुर लोकसभा में एक बजे तक 30.20 फीसदी मतदान।
गोरखपुर में भी चुनाव को लेकर जिला प्रशासन की तैयारियों की पोल खुलती गई। कई बूथों पर ईवीएम खराब हो गई। इनको बदलने के बाद मतदान प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। दो घंटे में बेहद धीमा मतदान आज रविवार होने का संकेत दे रहा था। इसके बाद वोटर घर से निकले। जहां सात से नौ बजे के बीच में इलाहाबाद के फूलपुर में केवल 4.8 फीसदी मतदान हुआ। शहर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र के मतदान केंद्रों पर सन्नाटा पसरा था। शहर उत्तरी में केवल 1.8 फीसदी मतदान हुआ।
लोकसभा के उप चुनाव के दौरान पहले दो घंटे में मतदान बेहद धीमा रहा। मतदाताओं पर आज रविवार का असर काफी भारी दिख रहा था। सात से नौ बजे के बीच में इलाहाबाद के फूलपुर में केवल 4.80 फीसदी मतदान हुआ। शहर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र के मतदान केंद्रों पर सन्नाटा पसरा था। शहर उत्तरी में केवल 1.8 फीसदी मतदान हुआ।
फूलपुर लोकसभा सीट पर एक बजे तक 19.20 फीसदी मतदान।घ
इलाहाबाद के फूलपुर लोकसभा उपचुनाव के लिए 838 मतदान केंद्रों पर 2155 बूथ बनाए गए हैं। यहां आज करीब 19,63,543 लाख मतदाता फूलपुर उपचुनाव में किस्मत आजमा रहे उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। यहां पर प्रशासनिक व्यवस्था बेहद चुस्त दुरुस्त है।
गोरखपुर लोकसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव की शुरुआत काफी धीमी रही। सुबह के पहले 2 घंटे में नौ बजे तक सभी पांच विधानसभा सीटों पर मात्र 6.80 फीसद मतदान हो सका है। विधानसभावार कितना प्रतिशत मतदान हुआ है कंट्रोल रूम इसकी सूचना एकत्र कर रहा है। सहजनवा, पिपराइच और कैंपियरगंज के कुछ बूथों पर ईवीएम में खराबी के चलते इसे बदलना या ठीक करना पड़ा है। इसके चलते कुछ जगहों पर मतदान देर से शुरू हुआ है। अभी तक कहीं से भी किसी तरह के विवाद या झड़प की सूचना कंट्रोल रूम को नहीं मिली है। जिला निर्वाचन अधिकारी, प्रेक्षक और सभी मजिस्ट्रेट अपने अपने क्षेत्र में दौरा कर रहे हैं। विधानसभावार मतदान का प्रतिशत अभी थोड़ी देर में उपलब्ध कराया जाएगा।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रिक्त सीट गोरखपुर तथा उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की रिक्त सीट फूलपुर लोकसभा क्षेत्र में आज मतदान के साथ ही इन दो दिग्गजों के लिए भी काफी अहम दिन है। सीएम योगी आदित्यनाथ तूफानी दौरे के बाद कल देर शाम गोरखपुर पहुंच गए हैं। वह भी आज मतदान करेंगे। मतदान को लेकर सभी तरह की तैयारियां पूरी है। इन दोनों जगह पर सात बजे से मतदान शुरू हो गया है, जो कि शाम पांच बजे तक चलेगा।
गोरखपुर में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं। जहां 970 मतदान केंद्रों व 2141 मतदेय स्थलों पर मतदान सुबह सात बजे से शुरु हो गया है। इसी तरह इलाहाबाद के फूलपुर में इलाहाबाद जिले की कुल पांच विधानसभा सीटें हैं। जहां 793 मतदान केंद्रों व 2059 मतदेय स्थलों पर मतदान सुबह सात बजे से शुरु हो गया है। फूलपुर लोकसभा क्षेत्र में आने वाली इलाहाबाद पश्चिमी विधानसभा सीट के 45 मतदान केंद्र व 95 मतदेय स्थल कौशाम्बी जिले में आते हैं।
इलाहाबाद के फूलपुर लोकसभा क्षेत्र के उपचुनाव में 2155 में 1820 पोलिंग बूथ पर केंद्रीय अद्र्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। आज यहां पर 19.63 लाख मतदाता 22 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला लिखेंगे।
गोरखपुर सदर संसदीय सीट पर हो रहे उपचुनाव में 19.49 लाख मतदाता आज मतदान करेंगे। शहर में सर्वाधिक 4.34 लाख जबकि सहजनवा में सबसे कम 3.57 लाख मतदाता हैं। इनमें आठ लाख से अधिक महिलाएं हैं।
इन दोनों ही सीटों पर भाजपा, सपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला होने की संभावना है। बसपा ने उपचुनाव में प्रत्याशी नहीं खड़े किए हैं। भाजपा ने गोरखपुर से उपेंद्र दत्त शुक्ला को और फूलपुर सीट से कौशलेन्द्र सिंह पटेल को उम्मीदवार बनाया है। सपा ने गोरखपुर से प्रवीण निषाद और फूलपुर से नागेन्द्र सिंह पटेल को मैदान में उतारा है। कांग्रेस ने गोरखपुर से सुरहिता करीम व फूलपुर से मनीष मिश्र को टिकट दिया है।
संवेदनशील सीट होने की वजह से इस उपचुनाव के लिए सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम हैं। केंद्रीय पुलिसबलों समेत राज्य की पुलिस और पीएसी की तैनाती की गई है। गोरखपुर संसदीय सीट न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी बल्कि सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए भी साख की लड़ाई है। मुख्यमंत्री चुने जाने के बाद योगी आदित्यनाथ ने बतौर सांसद गोरखपुर लोकसभा सीट से अपना इस्तीफा दे दिया था। गोरखपुर संसदीय क्षेत्र में कुल पांच विधानसभा क्षेत्र हैं। यहां उपचुनाव के लिए 970 मतदान केंद्रों पर मतदान हो रहा है। कुल 10 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, लेकिन इस सीट पर कड़ा मुकाबला भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच ही माना जा रहा है।
गोरखपुर लोकसभा सीट पर आज हो रहा उपचुनाव अपने आप में काफी ऐतिहासिक है। इस उपचुनाव के लिए समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी जैसी धुर विरोधी पार्टियां बीजेपी के खिलाफ एक साथ खड़ी हो गई हैं। भाजपा ने गोरखपुर से उपेंद्र दत्त शुक्ला को अपना उम्मीदवार बनाया है। उपेंद्र दत्त शुक्ला की पहचान पूर्वांचल में ब्राह्मण चेहरे के रूप में होती है। समाजवादी पार्टी ने उनके खिलाफ निषाद समुदाय से आने वाले पार्टी के नेता प्रवीण निषाद को मैदान में उतारा है। बहुजन समाज पार्टी ने इस उपचुनाव में अपने उम्मीदवार खड़ा नहीं किया है। बसपा ने यहां पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को अपना समर्थन दिया है। ऐसे में लड़ाई सीधे-सीधे बीजेपी बनाम सपा-बसपा गठबंधन की हो सकती है। कांग्रेस फिलहाल किसी गठबंधन का हिस्सा बने अकेले इस उपचुनाव में लड़ रही है। कांग्रेस ने गोरखपुर से डॉ सुरहिता करीम को टिकट दिया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से पांच बार सांसद चुने जा चुके हैं। इस सीट पर 29 वर्ष से भी ज्यादा समय तक गोरखनाथ मंदिर का प्रभाव देखा जाता रहा है। इस बार सपा और बसपा के गठबंधन ने जातीय समीकरण को काफी मजबूत कर दिया है। सपा के निषाद समुदाय के उम्मीदवार और गोरखपुर के पांचों विधानसभाओं में दलितों की मजबूत संख्या भाजपा के लिए सर दर्द साबित हो सकती है। योगी आदित्यनाथ से पहले उनके गुरु महंत अवैद्यनाथ भी इस सीट से तीन बार सांसद चुने गए थे। गोरखपुर उपचुनाव के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जमकर प्रचार किया।
सपा व बसपा ने गोरखपुर में जातीय समीकरण को साधने की कोशिश की है। गोरखपुर के कुल 19.49 लाख मतदाताओं में निषाद वोटरों की संख्या करीब तीन लाख है। यादव मतदाताओं की संख्या दो लाख से ज्यादा है। पिछड़ों और दलितों के वोटरों की संख्या जोड़ ली जाए तो भाजपा को इस सीट पर कड़ी टक्कर मिल सकती है। 2014 के लोकसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ 52 फीसदी से ज्यादा वोट लेकर गोरखपुर से सांसद चुने गए थे।
दरअसल फूलपुर और गोरखपुर उपचुनाव को सीधे-सीधे उत्तर प्रदेश की आने वाले समय की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। सपा और बसपा के इस गठबंधन के इस टेस्ट का नतीजा 2019 के आम चुनाव में दोनों पार्टियों के गठबंधन के भविष्य पर फैसला सुनाएगा। इस चुनाव को योगी आदित्यनाथ की सरकार और सूबे में उसके असर से भी सीधा-सीधा जोड़कर देखा जाएगा।



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