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ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती : भारतीय दर्शन का ही अंग है सूफी विचारधारा: नरेंद्र मोदी

अजमेर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के सालाना उर्स के मौके पर कहा कि भारतीय दर्शन का मूल शांति, एकता और सद्भावना में निहित है और सूफी विचारधारा भी उसी में समाविष्ट है। दरगाह शरीफ के सालाना उर्स के मौके पर आमतौर पर प्रधानमंत्री की ओर से चादर चढ़ाई जाती है और उनका सन्देश पढकर सुनाया जाता है लेकिन, यह पहला अवसर है जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सन्देश न सिर्फ पढ़कर सुनाया गया साथ ही उनका वीडियो संदेश एलईडी पर भी प्रसारित किया गया।


प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा, "भारत के बारे में कहा जाता है कि यह शब्दों में बयां नहीं होता बल्कि इसे महसूस किया जाना चाहिए। देश में विभिन्न दर्शनों के मूल में शांति, एकता और सद्भावना निहित है, सूफीवाद भी उन्हीं में से एक है। जब हम भारत में सूफी संतों की बात करते हैं तब ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती महान आध्यात्मिक परंपराओं के प्रतीक रूप में दिखाई देते हैं। ‘गरीब नवाज’ द्वारा की गयी मानवता की सेवा भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।"

उन्होंने कहा, "इस महान संत के वार्षिक उर्स के अवसर पर दरगाह अजमेर शरीफ पर चादर भेजते हुए मैं उन्हें ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश करता हूँ और हमारी संस्कृति की विशेषता रहे सद्भावपूर्ण सह अस्तित्व की कामना करता हूं। ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के विश्वभर के अनुयायियों को वार्षिक उर्स पर बधाई और शुभकामनाएं।" केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने आज अजमेर शरीफ में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से चादर पेश की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वीडियो सन्देश को अजमेर में करीब पचास स्थानों पर विशेष तौर से लगाये गये बडे एलईडी स्क्रीन पर हजारों जायरीनों ने सुना। हर स्थान पर श्रोताओं की काफी भीड़ थी।

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