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सांस्कृतिक केंद्र में गाँव की थाती से जोड़ती लोकगीत की कार्यशाला

 इलाहाबाद 01-जून-2018 | भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षण एवं संवर्धन प्रदान करने के उद्देश्य से भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा स्थापित उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा बच्चों में रचनात्मक एवं लयात्मक अभिरुचि को बढ़ावा देने के लिए विगत कई वर्षों की भांति इस वर्ष भी 25 मई से 08 जून, 2018 तक 15 दिवसीय 'ग्रीष्मकालीन बाल कार्यशाला' का आयोजन किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 06 से 17 वर्ष तक के बच्चे भाग ले रहे हैं। 


"सुगनवा बोले मीठी बोलिया......" ये बोल हैं बिरहा लोकगीत के जिसे केंद्र प्रांगण के अंतर्गत आयोजित लोकगीत की बाल कार्यशाला में सिखाया जा रहा हैं। इस कार्यशाला के प्रशिक्षक श्री विवेक रंजन ने बताया की इस कार्यशाला में मूलतः कजरी, चैती और बिरहा लोकगीतों के अंतर्गत संस्कार गीत जैसे देवी गीत, सोहर, मंगलाचार, विवाह गीत, बिदाई गीत, किसानी गीत, इत्यादि सिखाये जा रहे हैं। उन्होंने बताया की सबसे बड़ी चुनौती थी शहरी बच्चों को गाँव की बोली के शब्दकोष सीखना ताकि वे आत्मीयता के साथ गायन में उनका प्रयोग कर सकें। इसी क्रम में उन्होंने जानकारी देते हुए बताया की लोक गायन भाव के बिना अधूरी है और ये लोकगीत प्रतिरोध की संस्कृति है। उन्होंने कहा की इससे कहीं न कहीं ये बात पुष्ट होती है की न केवल शहर और गाओं के बीच दूरी बढ़ रही है बल्कि दो पीढ़ियों के बीच भी सांस्कृतिक संवादहीनता नज़र आती है। ये लोकगीत दादी नानी के द्वारा बचपन से मैं सुनता हुआ बढ़ा हुआ और कहीं न कहीं उनमें यथार्थ मिलता है पर इस बार केंद्र के कार्यशाला में इतनी अधिक संख्या में लोकगीत के बाल प्रतिभागियों को देख कर प्रतीत होता है की कहीं न कहीं ये कार्यशाला उक्त विदित सांस्कृतिक संवादहीनता तो तोड़ने का कार्य करेगी।

केंद्र निदेशक श्री इन्द्रजीत सिंह ग्रोवर ने कहा की ये लोकगीत ही हैं जो हमें गाँव के थाती से जोड़ते हैं। इनका हमारे समाज और संस्कृति की संरचना में महत्वपूर्ण योगदान है। यह हम सब का कर्तव्य है की हम इसके संवर्धन और संरक्षण के लिए जरूरी कदम उठाएं। ये ग्रीष्मकालीन बाल कार्यशालाएं कहीं न कहीं इन उदेश्यों की पूर्ती करती हुई प्रतीत होती हैं। 

ये कार्यशालाएं प्रतिदिन प्रातः 07 बजे से 10 बजे तक चल रही हैं। आज की कार्यशाला में लोकगीत एवं लोकनृत्य के मुख्य प्रशिक्षक श्री विवेक रंजन सिंह एवं सुश्री भानु त्रिपाठी के साथ सहायक की भूमिका में सुश्री सविता सिंह, तो वहीँ लोक एवं आधुनिक चित्रकला के मुख्य प्रशिक्षक की भूमिका में सुश्री शुभा अग्रहरि एवं श्री अमरीश मिश्रा, इसी क्रम में उत्तर भारत का शास्त्रीय नृत्य कथक की मुख्य प्रशिक्षिका सुश्री प्रियम्वदा सिंह और सहायक की भूमिका में सुश्री रिचा सक्सेना, तो लोकनाट्य (नौटंकी) व समकालीन नाटक के मुख्य प्रशिक्षक श्री सोनी कुमार गुप्ता और सुश्री ऋतिका अवस्थी के साथ सहायक की भूमिका में श्री सचिन चन्द्रा, क्रिएटिव राइटिंग एंड कम्युनिकेशन स्किल की मुख्य प्रशिक्षिका सुश्री फरहा नाज़ रहीं। इन सभी के मार्गदर्शन में प्रतिभागी बच्चों ने अपनी अपनी कला की प्रारंभिक एवं बारीकियों से अवगत हुए। इस कार्यशाला की कोऑर्डिनेटर की भूमिका में सुश्री रिचा पांडेय और सुश्री प्रियंका यादव ने अपनी सार्थक भूमिका निभाई।

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