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चित्रकला मानव सभ्यता के क्रमिक विकास की छाया

 इलाहाबाद | भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षण एवं संवर्धन प्रदान करने के उद्देश्य से भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा स्थापित उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा बच्चों में रचनात्मक एवं लयात्मक अभिरुचि को बढ़ावा देने के लिए विगत कई वर्षों की भांति इस वर्ष भी 25 मई से 08 जून, 2018 तक 15 दिवसीय 'ग्रीष्मकालीन बाल कार्यशाला' का आयोजन किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 06 से 17 वर्ष तक के बच्चे भाग ले रहे हैं। 

प्रशिक्षक श्री अमरीश कुमार मिश्रा एवं श्रीमती शुभा अग्रहरी के मार्गदर्शन में आधुनिक चित्रकला कार्यशाला के अंतर्गत बच्चों को लैंडस्केप, कम्पोजीशन, पेन्सिल शेडिंग, टेक्सचर पेंटिंग और क्रिएटिव पेंटिंग जिसके अंतर्गत हाथ पैर के पंजे और उँगलियों की छाप से बनवाई गयी है। इनके साथ में वेस्ट मैटेरियल्स से तैयार क्राफ्ट के सामान भी हैं जो बच्चों ने वाटर बोतल, आइसक्रीम स्टिक, अखबार, इत्यादि का इस्तेमाल कर के बनाया है। उन्होंने आगे बताया की बच्चों ने इस कार्यशाला के दरमियान कुछ प्रासंगिक मुद्दों पर भी अपनी पेंटिंग बनाई है जैसे की पर्यावरण संरक्षण, पानी बचाओ, स्वच्छ भारत, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ। इन्ही सब की बीच इस कार्यशाला में बच्चों को पेंटिंग की बारीकियाँ समझाते हुए उनके अंदर के कलाकार और अभिव्यक्ति को कैनवास के माध्यम से व्यक्त करने के तरीके को तराशा जा रहा है। 

केंद्र निदेशक श्री इंद्रजीत सिंह ग्रोवर ने कहा की चित्रकला मानव समाज की प्राचीनतम कलाओं में से एक रही है जिसका विकास मानवजाति के साथ साथ हुआ है। बल्कि कई स्तरों पर यह उस जनजाति या मानव सभ्यता के क्रमिक विकास के शोध में एक महत्वपूर्ण मानक के रूप में इस्तेमाल होती है। हमारा प्रयास है की बच्चे खुले मन के साथ चित्रकला में कुशलता हासिल करें और कम से कम उनमें सौंदर्यबोध विकसित हो सके। 

ये कार्यशालाएं प्रतिदिन प्रातः 07 बजे से 10 बजे तक चल रही हैं और इनकी प्रस्तुतियां 10 जून, 2018 को सांयकाल में केंद्र परिसर के अंदर होंगी। 

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