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भाजपा अध्यक्ष पद को लेकर सोशल मीडिया पर हो रहा मंथन, बड़े फेरबदल की आहट

इलाहाबाद:*महानगर भाजपा अध्यक्ष पद को लेकर सोशल मीडिया पर हो रहा मंथन*-भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने विगत् कुछ दिन पहले पार्टी में संकेत ही नहीं अपितु फेर-बदल कर कार्यकर्ताओं को आगाह कर दिया है कि भाजपा संगठन मे बड़ा परिवर्तन व अनेकों सांसदों का टिकट भी कटने वाला है.विपक्षी पार्टियों की एकता मिशन 2019 की सफलता मे काफी बाधा बन गया है.

कई क्षेत्रीय पदाधिकारियों समेत
करीब आधे दर्जन से ज्यादा जिलाध्यक्ष बदले गये और आगे भी कुछ बदलाव होना भी सुनिश्चित है।
मिशन 2019 की चुनौती और  इलाहाबाद,गोरखपुर,कैराना, नूरपुर के अपेक्षित परिणाम न आने के कारण नाराज पार्टी आलाकमान कुछ प्रमुख जिलों के स्थानीय संगठन मे फेरबदल करेंगे.कई जिलाध्यक्ष की गलत कार्यपद्धति को लेकर पार्टी के निष्ठावान एवं पुराने कार्यकर्ताओं में काफी आक्रोश और ऊपर तक शिकायतों का अम्बार है.
वर्तमान में अगर आकलन करें तो इलाहाबाद महानगर भाजपा के अध्यक्ष अवधेश गुप्ता की कार्यशैली को लेकर वरिष्ठ,जमीनी व पुराने कार्यकर्ताओं में बहुत मदभेद है।लोगों का मानना है कि चाटुकार एवं अवसरवादी लोगों से घिरे होने के कारण खांटी कार्यकर्ताओं की लगातार उपेक्षा की जा रही है.
जबकि प्रधानमन्त्री जी का प्रमुख नारा
         *सबका साथ*
       *सबका विकास*
आज अप्रासंगिक होता जा रहा है.
अवधेश गुप्ता के तानाशाही कार्यशैली के कारण जातिवादी फैक्टर पूरी तरह से हावी दिख रहा है.जिससे अन्य वर्गों मे भीषण असंतोष व्याप्त है.
सोशल मीडिया पर भी वर्तमान अध्यक्ष को हटाने का मुहिम पुराने व् वरिष्ठ कार्यकर्ता लगातार चला रहे है.चाहे संगठन या वकीलों की नियुक्ति का मामला हो चाहे नामित पार्षद और सैकड़ों समायोजन को लेकर हर कार्यकर्ताओं मे वर्तमान अध्यक्ष के तानाशाही रवैये को लेकर जबरदस्त आक्रोश है.
स्थानीय संगठन के शिथिलता के कारण केंद्र और प्रदेश की महत्वपूर्ण योजनायें दम तोड़ती दिख रही है.
सोशल मीडिया पर चल रही बदलाव की आहट से चाटुकारों के दिल की धड़कनें तेज हो गई हैं।
प्रश्न यह है कि क्या अब उनके पैरोकार उन्हें बचा पायेंगें या विदाई होगी।
लोकसभा चुनाव सिर पर है,ऐसे मे विवादित लोगों को पद पर बनाये रखने से उपचुनाव जैसी स्थिति पैदा होना लाजमी है।
अभी भी वक्त है कि स्थानीय परिदृश्य को देखते हुए किसी अनुभवी,संघर्षशील,ईमानदार और कार्यकर्ताओं के बीच गहरी पैठ रखने वाले कार्यकर्ता को अध्यक्ष बनाया जाता है तो इसका लाभ पार्टी को मिलना तय है.

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