मज़हब नहीं सिखाता आपस मे बैर रखना, *हिन्दी हैं हम वतन हैं हिनदोस्ताँ हमारा
*मज़हब नहीं सिखाता आपस मे बैर रखना। हिन्दी हैं हम वतन हैं हिनदोस्ताँ हमारा।। इस पंक्ति को चरितार्थ करते हुए सिविल लाइन्स सरदार पटेल मार्ग पर तिरपाल वाली मस्जिद के नाम से जानी जाने वाली मसजिद के नव तामीर (नव निर्माण) के मौक़े पर राहगीरों को बिना जात
बिना मज़हब और बिना फिरक़े के जाने एहतेराम और खुलूस से इस भिषण गर्मी से राहत को ठंडा शरबत पिलाया गया उम्मुल बनीन सोसाइटी के महासचिव सै०मो०अस्करी ने बताया की इस वक्त जहाँ धर्म और मज़हब के नाम पर लोग एक दूसरे के खून के प्यासे हो रहे हैं वहीं मस्जिद के मुतावल्ली अब्दुल क़ुद्दूस, अब्दुल वदूद, अब्दुल क़य्यूम, मोईन उददीन, अयाज़ अहमद,शाम उददीन, एक़बाल हुसैन आदि ने राह चलते लोगों को शरबत पीला कर पुन्य का कार्य किया।बताते चलें की यह वही मसजिद है जीसे विकास मे बाधा और शहर के सौन्दर्यीकरण के कारण यहां के मुतावल्ली अबदुल क़ुद्दूस साहब ने खुद अपने व नमाज़ियों के साथ मिल कर हटा दिया था और आज उसी मसजिद को सड़क चौड़ीकरण से काफी अन्दर कर नव तामीर कराकर नमाजियों के लिए मुहय्या कराया ।।
बिना मज़हब और बिना फिरक़े के जाने एहतेराम और खुलूस से इस भिषण गर्मी से राहत को ठंडा शरबत पिलाया गया उम्मुल बनीन सोसाइटी के महासचिव सै०मो०अस्करी ने बताया की इस वक्त जहाँ धर्म और मज़हब के नाम पर लोग एक दूसरे के खून के प्यासे हो रहे हैं वहीं मस्जिद के मुतावल्ली अब्दुल क़ुद्दूस, अब्दुल वदूद, अब्दुल क़य्यूम, मोईन उददीन, अयाज़ अहमद,शाम उददीन, एक़बाल हुसैन आदि ने राह चलते लोगों को शरबत पीला कर पुन्य का कार्य किया।बताते चलें की यह वही मसजिद है जीसे विकास मे बाधा और शहर के सौन्दर्यीकरण के कारण यहां के मुतावल्ली अबदुल क़ुद्दूस साहब ने खुद अपने व नमाज़ियों के साथ मिल कर हटा दिया था और आज उसी मसजिद को सड़क चौड़ीकरण से काफी अन्दर कर नव तामीर कराकर नमाजियों के लिए मुहय्या कराया ।।


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