यूपी योजना भवन के एक निदेशक समेत दो पर घूस मागने का आरोप, मुख्यमंत्री के आदेश पर मुकदमा
लखनऊ । इलाहाबाद में अर्थ एवं संख्या विभाग में कार्यरत अपर साख्यिकी अधिकारी अर्चना मिश्र ने योजना भवन में तैनात विभागीय निदेशक एके पवार समेत दो अधिकारियों पर रिश्वत मागने का आरोप लगाया है। साक्ष्यों के साथ उन्होंने मामले की शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की थी, जिसके बाद दोनों अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएम ने आरोपितों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। इसके बाद अर्चना की तहरीर पर हुसैनगंज पुलिस ने दोनों आरोपितों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली।
एसएसआइ हुसैनगंज दयाशकर सिंह ने बताया कि सीआरपीएफ में सहायक कमाडेंट सुधीर कुमार की पत्नी अर्चना मिश्र इलाहाबाद में अर्थ एवं संख्या विभाग में अपर साख्यिकी अधिकारी हैं। आरोप है कि 31 मई 2018 को अर्चना का स्थानातरण इलाहाबाद से कानपुर के लिए किया गया था। तीन जून को वह कार्यालय से छुट्टी लेकर योजना भवन पहुंची और यहा अर्थ एवं संख्या विभाग के निदेशक एके पवार से मिलीं। पारिवारिक समस्याओं के कारण निदेशक से एक साल तक स्थानातरण रोकने का अनुरोध किया।
इस पर उन्होंने कहा कि इलाहाबाद में आइजी रजिस्ट्रेशन ऑफिस में तैनात अपर साख्यिकी अधिकारी शक्तिपाल सिंह आपसे बात करेंगे। आरोप है कि 13 जून की रात में करीब 08:37 बजे शक्तिपाल सिंह ने अर्चना को फोन किया और स्थानातरण रोकने के एवज में दो लाख रुपये की माग की। इसके बाद 14 जून को अर्चना ने निदेशक एके पवार से बात की। उन्होंने कहा कि शक्तिपाल का फोन मेरे पास आया था।
सुरक्षित है ऑडियो रिकॉर्डिग: अर्चना के मुताबिक दोनों अधिकारियों की मोबाइल की रिकार्डिग उनके पास है, जो तहरीर में भी संलग्न है। बातचीत से दोनों अधिकारियों के संबंध स्वत: उजागर हो रहे हैं। एसएसआइ के मुताबिक अर्चना ने इस संबंध में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर दोनों अधिकारियों के खिलाफ शिकायत की थी। इंस्पेक्टर हुसैनगंज ने बताया कि मुख्यमंत्री के आदेश के बाद एके पवार और शक्तिपाल सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। तहरीर में संलग्न सीडी की भी पड़ताल की जा रही है।
जारी की गईं कई संशोधित सूची: आरोप है कि अपर साख्यिकी अधिकारी अर्चना मिश्र का स्थानातरण 31 मई 2018 के आदेश के तहत किया गया था। इसके अतिरिक्त अर्थ एवं संख्या विभाग में कार्यरत अपर साख्यिकी अधिकारियों का स्थानातरण आठ मई को जनहित में 40 की संख्या में किया गया। इसके बाद 29 मई को संशोधित सूची जारी की गई। आरोप है कि स्थानातरण सूची में कई बार अलग-अलग तिथियों में बदलाव कर प्रकाशित किया गया। अर्चना ने जो स्थानातरण प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। तहरीर के मुताबिक इलाहाबाद समेत अन्य जनपदों में 15-18 साल से अपर साख्यिकीय अधिकारी कार्यरत हैं, लेकिन उनका स्थानातरण नहीं किया गया, जो नियम विरुद्ध है।
महिलाओं को बनाया जा रहा निशाना: सहायक विकास अधिकारी सेवा संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रमोद गुप्ता ने बताया कि विभाग में खासकर महिलाओं को निशाना बनाकर स्थानातरण किया गया। जो लोग स्थानातरण रुकवाने के लिए जाते थे उनसे डेढ़ से दो लाख रुपये मागे जाते थे। गिरोह द्वारा स्थानातरण के नाम पर करोड़ों रुपये के वारे न्यारे किए गए हैं। गिरोह में विभाग के कर्मचारी से लेकर बड़े अधिकारी शामिल हैं। इस संबंध में कई बार मुख्यमंत्री से मुलाकात की गई तो उन्होंने कई अधिकारियों के खिलाफ जाच के आदेश दिए।
एसएसआइ हुसैनगंज दयाशकर सिंह ने बताया कि सीआरपीएफ में सहायक कमाडेंट सुधीर कुमार की पत्नी अर्चना मिश्र इलाहाबाद में अर्थ एवं संख्या विभाग में अपर साख्यिकी अधिकारी हैं। आरोप है कि 31 मई 2018 को अर्चना का स्थानातरण इलाहाबाद से कानपुर के लिए किया गया था। तीन जून को वह कार्यालय से छुट्टी लेकर योजना भवन पहुंची और यहा अर्थ एवं संख्या विभाग के निदेशक एके पवार से मिलीं। पारिवारिक समस्याओं के कारण निदेशक से एक साल तक स्थानातरण रोकने का अनुरोध किया।
इस पर उन्होंने कहा कि इलाहाबाद में आइजी रजिस्ट्रेशन ऑफिस में तैनात अपर साख्यिकी अधिकारी शक्तिपाल सिंह आपसे बात करेंगे। आरोप है कि 13 जून की रात में करीब 08:37 बजे शक्तिपाल सिंह ने अर्चना को फोन किया और स्थानातरण रोकने के एवज में दो लाख रुपये की माग की। इसके बाद 14 जून को अर्चना ने निदेशक एके पवार से बात की। उन्होंने कहा कि शक्तिपाल का फोन मेरे पास आया था।
सुरक्षित है ऑडियो रिकॉर्डिग: अर्चना के मुताबिक दोनों अधिकारियों की मोबाइल की रिकार्डिग उनके पास है, जो तहरीर में भी संलग्न है। बातचीत से दोनों अधिकारियों के संबंध स्वत: उजागर हो रहे हैं। एसएसआइ के मुताबिक अर्चना ने इस संबंध में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर दोनों अधिकारियों के खिलाफ शिकायत की थी। इंस्पेक्टर हुसैनगंज ने बताया कि मुख्यमंत्री के आदेश के बाद एके पवार और शक्तिपाल सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। तहरीर में संलग्न सीडी की भी पड़ताल की जा रही है।
जारी की गईं कई संशोधित सूची: आरोप है कि अपर साख्यिकी अधिकारी अर्चना मिश्र का स्थानातरण 31 मई 2018 के आदेश के तहत किया गया था। इसके अतिरिक्त अर्थ एवं संख्या विभाग में कार्यरत अपर साख्यिकी अधिकारियों का स्थानातरण आठ मई को जनहित में 40 की संख्या में किया गया। इसके बाद 29 मई को संशोधित सूची जारी की गई। आरोप है कि स्थानातरण सूची में कई बार अलग-अलग तिथियों में बदलाव कर प्रकाशित किया गया। अर्चना ने जो स्थानातरण प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। तहरीर के मुताबिक इलाहाबाद समेत अन्य जनपदों में 15-18 साल से अपर साख्यिकीय अधिकारी कार्यरत हैं, लेकिन उनका स्थानातरण नहीं किया गया, जो नियम विरुद्ध है।
महिलाओं को बनाया जा रहा निशाना: सहायक विकास अधिकारी सेवा संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रमोद गुप्ता ने बताया कि विभाग में खासकर महिलाओं को निशाना बनाकर स्थानातरण किया गया। जो लोग स्थानातरण रुकवाने के लिए जाते थे उनसे डेढ़ से दो लाख रुपये मागे जाते थे। गिरोह द्वारा स्थानातरण के नाम पर करोड़ों रुपये के वारे न्यारे किए गए हैं। गिरोह में विभाग के कर्मचारी से लेकर बड़े अधिकारी शामिल हैं। इस संबंध में कई बार मुख्यमंत्री से मुलाकात की गई तो उन्होंने कई अधिकारियों के खिलाफ जाच के आदेश दिए।


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