ईद पर अपने से कमतर का रखें खयाल...मौलाना जव्वाद हैदर
मस्जिद क़ाज़ी जी बख्शी बाज़ार मे ईदूलफित्र की नमाज़ मौलाना जव्वाद हैदर जव्वादी की क़यादत मे अदा की गई।नमाज़ के बाद मौलाना ने अपने खुत्बे मे ईदूलफित्र के मक़सद को बयान किया।कहा ईद हमारी तभी है जब हम अपने से कमतर का भी उसी तरह खयाल रखें जैसे अपने घर के बच्चों और घर के दूसरे अफराद के लिए करते हैं।कहा अल्लाह ने फरमाया है की फित्रा मुस्तहक़ तक खुद पहुंचाओ।किसी ग़रीब ग़ुरबा की मदद करते वक़्त ऐसे मदद करो की एक हांथ से दो तो दूसरे हांथ को खबर तक न हो।
उन्होंने नौजवानों को एक मिसाल पेश करते हूए बताया की अगर कोई सामान हम किसी गाड़ी रिक्शा या ट्राली से कहीं भेजते हैं तो वह हमारे सामान को एक जगहां से दूसरे जगहां पहुचाने के बदले हमसे कुछ रुपये लेता है ।लेकिन अगर हम किसी ग़रीब और मिसकीन की मदद करते हैं ।तो उस दौलत या माल की क़ीमत हमे अल्लाह कई गूना देता है।मौलाना ने अभी कुछ दिन पहले आए एक फतवे का ज़िक्र करते हुए कहा यह फीरक़ों मे बांटने की साज़िश अमेरिका और इसराइल की शह पर अंजाम दी जा रही है।कलमा ए तय्यबा का पढ़ने वाला हमसे कैसे जूदा हो सकता है जब हम दूसरे धर्मों को वही सम्मान देते हैं जो मज़हबे इसलाम के मान्ने वाले को देते हैं तो इस तरहा का फतवा हमे कमज़ोर नही कर सकता ।कहा हम दावत दें आप हमारे यहाँ न शरीक हों लेकिन आप बुलाएं और हम न आंए ऐसा हरगिज़ मुमकिन नही। खुत्बा खत्म होने के बाद देश मे अमन चैन , बिमारों के लिये शिफा,रोज़ी मे बरकत, तालीम हासिल कर रहे नौजवानों की कामयाबी,बेरोज़गार को रोज़गार की दूआ की गई।उम्मुल बनीन सोसाइटी के महासचिव सै०मो०अस्करी ने सभी को गले लग कर ईद की मुबारकबाद दी।मस्जिद के मुतावल्ली शाहरुख काज़ी व मसजिद के मोमनीन की ओर से पांच लोगों को 50 वर्षों से मस्जिद को दी जा रही खिदमात के लिए मौलाना जव्वाद हैदर द्वारा शाल ओढ़ा कर सम्मानित भी किया गया।अन्त मे मुखतार रिज़वी,मौलाना जव्वाद हैदर,रिज़वान हैदर,जावेद रिज़वी, इरफान हैदर,सलमान हैदर काशान हैदर आदि की मौजूदगी मे मौलाना एहसान हैदर जव्वादी के सानहे इन्तेक़ाल पर उन्के बेटे और खानवादा ए जव्वादी को ताज़ियत पेश की गई।
उन्होंने नौजवानों को एक मिसाल पेश करते हूए बताया की अगर कोई सामान हम किसी गाड़ी रिक्शा या ट्राली से कहीं भेजते हैं तो वह हमारे सामान को एक जगहां से दूसरे जगहां पहुचाने के बदले हमसे कुछ रुपये लेता है ।लेकिन अगर हम किसी ग़रीब और मिसकीन की मदद करते हैं ।तो उस दौलत या माल की क़ीमत हमे अल्लाह कई गूना देता है।मौलाना ने अभी कुछ दिन पहले आए एक फतवे का ज़िक्र करते हुए कहा यह फीरक़ों मे बांटने की साज़िश अमेरिका और इसराइल की शह पर अंजाम दी जा रही है।कलमा ए तय्यबा का पढ़ने वाला हमसे कैसे जूदा हो सकता है जब हम दूसरे धर्मों को वही सम्मान देते हैं जो मज़हबे इसलाम के मान्ने वाले को देते हैं तो इस तरहा का फतवा हमे कमज़ोर नही कर सकता ।कहा हम दावत दें आप हमारे यहाँ न शरीक हों लेकिन आप बुलाएं और हम न आंए ऐसा हरगिज़ मुमकिन नही। खुत्बा खत्म होने के बाद देश मे अमन चैन , बिमारों के लिये शिफा,रोज़ी मे बरकत, तालीम हासिल कर रहे नौजवानों की कामयाबी,बेरोज़गार को रोज़गार की दूआ की गई।उम्मुल बनीन सोसाइटी के महासचिव सै०मो०अस्करी ने सभी को गले लग कर ईद की मुबारकबाद दी।मस्जिद के मुतावल्ली शाहरुख काज़ी व मसजिद के मोमनीन की ओर से पांच लोगों को 50 वर्षों से मस्जिद को दी जा रही खिदमात के लिए मौलाना जव्वाद हैदर द्वारा शाल ओढ़ा कर सम्मानित भी किया गया।अन्त मे मुखतार रिज़वी,मौलाना जव्वाद हैदर,रिज़वान हैदर,जावेद रिज़वी, इरफान हैदर,सलमान हैदर काशान हैदर आदि की मौजूदगी मे मौलाना एहसान हैदर जव्वादी के सानहे इन्तेक़ाल पर उन्के बेटे और खानवादा ए जव्वादी को ताज़ियत पेश की गई।

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