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माहे सफर का दूसरा अशरा : *या ग़ाज़ी अब्बासे गाज़ी ---- या ग़ाज़ी अब्बास*

 "बहरे करम अब आ जाओ" । "जाने हरम अब आ जाओ"।।
           *तनहा है सज्जाद मेरा         और कोई नही है पास*
           *या ग़ाज़ी अब्बासे ग़ाज़ी ---या ग़ाज़ी अब्बास*

 माहे सफर के दूसरे अशरे मे एक बार फिर से मजलिस मातम का दौर तेज़ हो गया है। कहीं महिलाओं की तो कहीं पुरुषों की मजलिसे हो रही हैं। करैली मे क़मर एडवोकेट के आवास पर हुई सालाना मजलिस मे जहां ओलमा ने करबला की जंग का मार्मिक अन्दाज़ मे बयान किया और अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया के नौहा ख्वानों ने पुरर्दद नौहा पढ़ा वहीं करैली मस्तान मार्केट के पास इम्तेयाज़ हुसैन के आवास पर हुई सालाना मजलिस को मौलाना रज़ी हैदर ने खिताब करते हुए हज़रत इमाम हुसैन व अन्य शहीदों की यज़ीदी लशकर द्वारा दी गई यातनाओं का ज़िक्र किया।कहा हुसैने मज़लूम व खानवादाए रसूल को यज़ीदी सेना ने तीन दिन का भूका प्यासा करबला की सरज़मी पर बे रहमों बे खता क़त्ल कर दिया ।मजलिस से पूर्व सोज़ख्वान नज़र अब्बास साहब ने ग़मगीन मरसिया पढ़ा तो अक़िदतमन्दों की आँखों से आँसूओं की धारा बहने लगी।मजलिस के बाद अलम मुबारक की ज़ियारत भी कराई जिस पर अक़िदतमन्दों ने फूल माला चढ़ा कर बोसा भी लिया।

बाद मजलिस अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया के नौहाख्वानों ने ग़ाज़ी अब्बास से मनसूब नौहा पढा़ तो हर तरफ से या ग़ाज़ी अब्बास की फलक शिगाफ नारों की सदा गूंजने लगी ।इस मौक़े पर सै०मो०अस्करी,शाहिद अब्बास,मसर्रत अब्बास,ज़फरुल हसन,नजमुल हसन,आसिफ रिज़वी,ताहा हुसैन,इब्ने हसन,साजिद नक़वी ,आसिफ नक़वी,मिर्ज़ा अज़ादार हुसैन सहित अन्य सैकड़ों लोग मौजूद थै। वहीं दायरा शाह अजमल मे स्व हैदर अब्बास के आवास पर दस दिनों के अशरे की सातवीं मजलिस को मौलाना जव्वाद हैदर जव्वादी ने सम्बोधित किया ।हुसैन अब्बास,मुशीर अब्बास और वली आलम ने नौहा पढ़ा।इमामबाड़े की आखरी मजलिस सफर की सोलह (27अकटूबर)शुक्रवार को रात 8 बजे होगी जिसे मौलाना रज़ी हैदर खिताब करेंगे ।बाद मजलिस  शबीहे ताबूत हज़रत अली अकबर और हजरत अब्बास के अलम की ज़ियारत भी कराई जाएगी।अन्जुमन ग़ुन्चाए क़ासिमया नौहा और मातम का नज़राना पेश करेगी

*इमाम बाड़ा सै०हसन अस्करी मे चल रही महिलाओं की मजलिस*
दायरा शाह अजमल स्थित इमामबाड़ा सै०हसन अस्करी मे दस दिवसीय महिलाओं के अशरे की चौथी मजलिस मे महिला ज़ाकिरा ने अहलेबैत ए अतहार पर हुए ज़ुल्म की दास्ताँ बयान। की।इमाम हुसैन की 7 साल की बेटी सकीना पर हुए मज़ालिम और बीबीयों के क़ैद और सैदानियों के सरों से चादरें छीन्ने के वाक़ए के साथ तमाम ज़ुल्मो सितम का ज़िक्र किया।मजलिस से पहले सय्यदा सारा ने सलाम व मर्सिया पढ़ा।बाद मजलिस फरहत अस्करी व मेना हैदर ने ग़मगीन नौहा पढ़ा।सफर की दस तारीक़ से शुरु हुआ महिलाओं का अशरा हज़रत इमाम हुसैन के चेहल्लूम तक जारी रहेगा जिसमे अलग अलग ज़ाकिरा बयान करेंगी।इस मौक़े पर सफदरी बेगम ,नुज़हत रज़ा,ज़ीनत रज़ा,ज़ारा बतूल,शबीना आब्दी सहित बड़ी संख्या मे महिलाओं ने शिरकत की।

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