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हथकड़ीयाँ बेड़ीयाँ सम्भाले शाम चला बीमार*

बीमारे करबला हज़रत ज़ैनूल आबेदीन की शहादत पर कहीं जुलूस तो कहीं बरपा हुई मजलिस।चक स्थित इमामबाड़ा डिप्टी ज़ाहिद हुसैन से मातमी दस्तों ने मातमी जुलूस निकाल कर चौथे इमाम ज़ैनूल आबेदीन की शहादत पर नौहा और मातम कर नज़राना ए अक़िदत पेश की।


शहर की मातमी अन्जुमन हैदरया रानी मण्डी ,अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया बख्शी बाज़ार के नौहा ख्वानो ने पुरदर्द नौहे पढ़े।जुलूस मे अलम के साथ शबीहे ताबूत ज़ैनुल आबेदीन भी निकाला गया जिस पर अक़िदतमन्दों ने फूल माला चढ़ा कर मन्नत व मुरादें भी मांगी वहीं दूसरी मजलिस दायरा शाह अजमल मे इमामबाड़ा नवाब अब्बन साहब मरहूम पर हुई जिसमे रज़ा इसमाईल सफवी ने सोज़ख्वानी व शायर अनवार अब्बास ने पेशख्वानी कर करबला के शहीदों को याद किया।मौलाना सै०मो०यासिर ने चौथे इमाम ज़ैनूल आबेदीन पर यज़ीदी लशकर द्वारा ढाए गए ज़ुल्म की दास्ताँ बयान की तो हर ओर से आहो बुका की सदा गूंजने लगी।
उन्होंने बताया की शहादते इमाम हुसैन के बाद किस तरह बचे हुए लोगों को क़ैदी बना कर कशां कशां फिराया गया। चौथे इमाम के गले मे खारदार तौक़ हाथों मे हथकड़ी और पैरों मे भारी भरकम बेड़ीयां पहना कर शाम के बाज़ार मे घुमाया गया जिस्से पैरों मे आबले पड़ गए।बाद मजलिस शबीहे ताबूत हज़रत ज़ैनूल आबेदीन को गुलाब और चमेली के फूलों से सजा कर निकाला गया।अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया के नौहाख्वान शादाब ज़मन, अस्करी अब्बास,शबीह अब्बास,एखलाक़ रज़ा,ज़हीर अब्बास,एजाज़ नक़वी,अली रज़ा रिज़वी,यासिर ज़ैदी,कामरान रिज़वी,युसूफ मेहंदी,ज़ुलफेक़ार अज़मी,अज़ीम रिज़वी,अब्बास नक़वी,अली मौलाई,शबीह रिज़वी आदि ने शायर तालिब इलाहाबादी का बिमारे करबला पर लिखा दर्दअंगेज़ नौहा पढ़ा तो हर आँख अश्कबार हो गई।इस मौक़े पर मंज़र कर्रार,गौहर काज़मी,सै०मो०अस्करी,मिर्ज़ा अज़ादार हुसैन,रिज़वान जव्वादी,मक़सूद रिज़वी,आसिफ रिज़वी,शाहिद अस्करी,ताशू अलवी सहित अन्य हज़ारो अक़िदतमन्द मौजूद थे।
                        

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