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ग्रामसभा व वन विभाग की जमीनों को लेकर विवाद वन क्षेत्रधिकारी ने दिया नाप का आश्वासन

प्रयागराज, शंकरगढ़ । शंकरगढ़ वन रेंज के अकौरिया ग्राम सभा के अपने आप को भूमिहीन बताने वाले ग्रामीणों ग्राम सभा की भूमि पर झोपड़ी बनाकर रहने का प्रयास कर रहे थे लेकिन मौके पर पंहुचे वन दरोगा ने उन्हें उसे वन विभाग की जमीन बताकर रोक दिया ।
उक्त ग्रामीणों ने आक्रोशित हौई हुए आरोप लगाया कि उक्त भूमि ग्राम सभा अकौरिया की है । हम लोगों ने कई बार इसकी नाप कराने का अनूरोध किया लेकिन हमारी कोई नही सुनता जबकि  वन विभाग के कुछ अधिकारियों को मिली भगत से किसानों को खेती करने के लिए पैसा लेकर वन विभाग जमीन दी गई है। किसान नेता मान बहादुर ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है ।
 ग्रामीणों ने आज अकौरिया ग्राम में स्थित एक जमीन पर ग्राम सभा की जमीन बताकर  कब्जा करने का  प्रयास किया लेकिन वन दरोगा ने उन्हें कड़ी चेतावनी दी कि यह जमीन वन विभाग की है । इस पर कब्जा न करें अन्यथा कानूनी कार्यवाई की जाएगी।ग्रामीणों का कहना है कि यह जमीन ग्राम सभा की है, अतः वन विभाग नाप कराकर अपनी जमीन अलग कर ले यह जमीन हम लोगों की है । हम लोग भूमिहीन है, रहने को घर नहीं है, अतः इस ग्राम सभा की जमीन पर हम लोग घर बनाकर रहना चाहते हैं । मामले को बढ़ता देख वन क्षेत्राधिकारी को सूचित किया गया जिससे मौके पर पहुंचे वन क्षेत्राधिकारी ने मौका मुआयना किया और पाया कि वन विभाग के पास ही यह जमीन स्थित है तथा खाली अन्य जमीनों में खेती हो रही है। वन क्षेत्रधिकारी ने खेत तो देखे लेकिन यह साफ नहीं किया यह वन विभाग की जमीन है या किसानों की । ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वन विभाग की जमीन पर विभाग की मिलीभगत से अरसे से खेती हो रही है , लेकिन हम लोगों के ग्राम सभा की जमीन को वन विभाग ने कब्जा कर रखा है। इन जमीनों पर हम ग्रामीणों का हक है लेकिन हमें बस ने नहीं दिया जा रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक हम लोगों ने कई बार तहसील दिवस में इस हो रही अवैध खेती की शिकायत भी की है तथा अपने ग्राम सभा की जमीन को नाप कर हमें सौंपने संबंधित पत्र भी दिया है, लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। हम सब अब अपने ग्राम सभा की जमीन पर कब्जा कर रहे हैं । अंत मे सुलह समझौता से यह तय हुआ कि 15 से 20 दिन के अंदर हम वन विभाग की पैमाइश कराकर सर्वेयर बुलाकर वन विभाग का सीमांकन कर लेंगे। यदि यह जमीन ग्राम सभा की है तो आप को सौंप दी जाएगी तथा यदि कोई वन भूमि पर अवैध रूप से खेती कर रहा होगा तो जांच करा कर उसकी उसके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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